जेल का खाना खाकर देख‍िए तो सही- महाराष्‍ट्र के पूर्व गृह मंत्री की अपील पर बोले जज

देशमुख ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उन्हें घर का खाना खाने की अनुमति दी जाए लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील को खारिज करते हुए कहा कि कुछ दिन जेल का खाना खाकर देख‍िए तो सही।

Anil Deshmukh arrested, ED,
अनिल देशमुख गिरफ्तार ((Express photo/Ganesh Shirsekar))

महाराष्‍ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख कभी अर्श पर थे। सारा सरकारी सिस्टम उनके आगे पीछे था। लेकिन आज उन्हें घर के खाने के लिए भी तरसना पड़ रहा है। देशमुख ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उन्हें घर का खाना खाने की अनुमति दी जाए लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील को खारिज करते हुए कहा कि कुछ दिन जेल का खाना खाकर देख‍िए तो सही।

अदालत ने घर के खाने को लेकर उनकी अपील पर कहा कि यदि भोजन के बारे में कोई शिकायत है तो कुछ दिन बाद वह अदालत से संपर्क कर सकते हैं। राकांपा नेता के वकीलों ने उनको बिस्तर उपलब्ध कराए जाने का भी आग्रह किया। उनका कहना था कि देशमुख की पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द है और वह फर्श पर नहीं सो पाएंगे। अदालत ने जेल अधिकारियों को राकांपा नेता को बिस्तर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। वह डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं ले सकते हैं।

देशमुख को पीएमएलए अदालत ने सोमवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ईडी ने उन्हें और हिरासत में देने का अनुरोध किया था। ईडी ने मामले में पूछताछ के बाद एक नवंबर को देशमुख को गिरफ्तार किया था। ईडी हिरासत की अवधि समाप्त होने पर राकांपा नेता को स्पेशल जस्टिस एचएस साथभाई के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने उनको न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एजेंसी ने उनका और रिमांड नहीं मांगा।

सीबीआई ने इस साल 21 अप्रैल को राकांपा नेता के खिलाफ भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप में केस दर्ज किया था। उसके बाद ईडी ने देशमुख के खिलाफ जांच शुरू की थी। देशमुख के खिलाफ मनी लांड्रिंग का मामला तब सामने आया था जब मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने उन पर रिश्वत के आरोप लगाए थे। ईडी का कहना है कि देशमुख ने गृह मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया। बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के माध्यम से मुंबई के विभिन्न बार और रेस्तराओं से 4.70 करोड़ रुपये एकत्र किए।

देशमुख ने इन आरोपों का खंडन कर कहा था कि एजेंसी का पूरा मामला एक दागी पुलिसकर्मी के बयानों पर आधारित है। ईडी ने इससे पहले उनके दो सहयोगियों- संजीव पलांडे और कुंदन शिंदे को भी इस मामले में गिरफ्तार किया था। पलांडे अतिरिक्त कलेक्टर रैंक के अधिकारी थे। वह देशमुख के निजी सचिव के रूप में काम कर रहे थे। जबकि शिंदे उनके निजी सहायक थे।

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