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केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू की मुस्लिमों को सलाह: हिंदुओं से सीखें, ट्रिपल तलाक को खत्‍म करें

सुप्रीम कोर्ट को मुस्लिम समुदाय में ट्रिपल तलाक, 'निकाह हलाला' और बहुविवाह की वैधता से जुड़ी कई याचिकाओं पर 11 मई को सुनवाई करनी है।

केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू। (पीटीआई फाइल फोटो)

केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने देश के मुसलमानों को हिंदू समाज से सीख लेने की सलाह दी है। नायडू ने कहा कि जिस तरह हिंदुओं ने बाल-विवाह, दहेज और सती जैसी कुप्रथाओं को त्‍यागा है, वैसे ही मुस्लिमों को ट्रिपल तलाक की व्‍यवस्‍था खत्‍म करनी चाहिए। नायडू ने कहा क‍ि यही वक्‍त है कि मुस्लिम समाज आत्‍ममंथन करे और अपनी महिलाओं को न्‍याय देने के लिए ट्रिपल तलाक पर बहस करे। उन्‍होंने कहा, ”ट्रिपल तलाक की इजाजत नहीं है और सभी इसे जानते हैं, लेकिन फिर भी कुछ लोग है जो मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्‍याय कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाय को बदलाव से गुजरना चाहिए। जैसे हिंदू समाज इतना बदला, हमने बाल विवाह, दहेज, सती को खत्‍म किया। मुझे विश्‍वास है कि इस मुद्दे (ट्रिपल तलाक) पर मुस्लिम समुदाय में स्‍वस्‍थ चर्चा होगी और वे कोई न कोई हल निकालेंगे।” इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिसंबर 2016 में कहा था कि ट्रिपल तलाक की प्रथा ‘निर्दयी’ है और पूछा था कि क्‍या मुस्लिम महिलाओं को राहत देने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में बदलाव किया जा सकता है।

हाई कोर्ट ने कहा था कि ‘तुरंत तलाक’ का यह रूप ‘सबसे घटिया’ है। सुमुस्लिम समुदाय में जारी तीन तलाक की प्रथा को फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है और मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होने वाली है। प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि गर्मिर्यों की छुट्टियों में एक संविधान पीठ मामले में सुनवाई करेगी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने 27 मार्च को उच्चतम न्यायालय से कहा था कि मुस्लिमों के बीच प्रचलित इन परंपराओं को चुनौती देने वाली याचिकाएं विचारणीय नहीं हैं क्योंकि ये मुद्दे न्यायपालिका के दायरे के बाहर के हैं।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दो तर्क दिए। पहला, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट कहा कि अगर तीन तलाक को अवैध करार दिया जाता है, तो इससे अल्लाह के आदेशों की अवमानना होगी।

इतना ही नहीं इस फैसले से कुरान को बदलने की नौबत भी आ सकती है। बोर्ड ने कहा कि इससे मुसलमान पाप के भागी भी हो सकते हैं। दूसरे तर्क में मुस्लिम पर्सनल लॉ प्रोविजन्स जैसे ट्रिपल तलाक को संविधान की धारा 25 के तहत संरक्षण हासिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को मानवाधिकार का मुद्दा बताया; 11 मई तक होगा सभी याचिकाओं का निपटारा

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