कानूनों में समय के अनुरूप सुधार किए जाने की जरूरत: CJI; जस्टिस एनवी रमण ने कहा- जरूरतों के अनुरूप कानूनों में बदलाव लाए विधायिका

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, कानूनों में समय के अनुरूप सुधार करने की जरूरत है ताकि वे ‘व्यावहारिक वास्तविकताओं’ से मेल खा सकें। एनवी रमण ने कहा कि ऐसा करने से न्यायपालिका को कानून-निर्माता के रूप में कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा और केवल कानूनों को लागू करने व व्याख्या करने के कर्तव्य रह जाएंगे।

CJI, Cuttack
समारोह में बोलते भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण। (फाइल फोटो)

देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) एनवी रमण ने शनिवार को कहा कि विधायिका को कानूनों पर फिर से विचार करने और उन्हें समय व लोगों की जरूरतों के अनुरूप सुधारने की जरूरत है ताकि वे ‘व्यावहारिक वास्तविकताओं’ से मेल खा सकें। प्रधान न्यायाधीश ने यहां ओड़ीशा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के नए भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि ‘संवैधानिक आकांक्षाओं’ को साकार करने के लिए कार्यपालिका और विधायिका को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। न्यायमूर्ति रमण ने कहा, ‘मैं कहना चाहूंगा कि हमारे कानूनों को हमारी व्यावहारिक वास्तविकताओं से मेल खाना चाहिए। कार्यपालिका को संबंधित नियमों को सरल बनाकर इन प्रयासों का मिलान करना होगा।’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा करने से न्यायपालिका को कानून-निर्माता के रूप में कदम उठाने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
प्रधान न्यायाधीश ने उल्लेख किया कि भारतीय न्यायिक प्रणाली दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है और सबसे पहले ‘न्याय वितरण प्रणाली का भारतीयकरण’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के 74 साल बाद भी परंपरागत जीवन शैली का पालन कर रहे लोग और कृषि प्रधान समाज ‘अदालतों का दरवाजा खटखटाने में झिझक महसूस’ करते हैं।

न्यायमूर्ति रमण ने कहा, ‘हमारे न्यायालयों की परंपराएं, प्रक्रियाएं, भाषा उन्हें विदेशी लगती हैं।’ उन्होंने कहा कि कानूनों की जटिल भाषा और न्याय वितरण की प्रक्रिया के बीच आम आदमी अपनी शिकायत के भविष्य पर नियंत्रण खो देता है। उन्होंने कहा कि यह एक कठोर वास्तविकता  है कि अक्सर भारतीय कानूनी प्रणाली सामाजिक वास्तविकताओं और निहितार्थों को ध्यान में रखने में विफल रहती है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘दुर्भाग्य से हमारी प्रणाली को इस तरह से बनाया गया है कि जब तक सभी तथ्यों और कानून को अदालत में मंथन किया जाता है, तब तक बहुत कुछ खत्म हो जाता है।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट