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लेटरल एंट्री: नरेंद्र मोदी सरकार ने RSS कनेक्‍शन वाले वैद्य को बनाया AYUSH मंत्रालय में सचिव

वैद्य राजेश कोटेचा और प्रधानमंत्री मोदी के सम्बन्ध 32 साल पुराने हैं। 1988 में मोदी भाजपा के महासचिव थे। उस समय उन्होंने कोटेचा के एक व्यावसायिक उपक्रम का उद्घाटन किया था। साल 2015 में कोटेचा को पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।

Rajesh Kotecha, Lateral entry, Ayurveda, Ministry Of Ayushगुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति वैद्य राजेश कोटेचा। (फाइल फोटोः fb)

केंद्र सरकार ने जून, 2020 में गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति वैद्य राजेश कोटेचा को AYUSH मंत्रालय में विशेष सचिव नियुक्त किया। वह विज्ञान भारती के अंतर्गत आने वाले एक संगठन विश्व आयुर्वेद फाउंडेशन के ट्रस्टी भी हैं। विज्ञान भारती RSS का एक अनुषांगिक संगठन है।

वैद्य की नियुक्ति लेटरल एंट्री का मामला है, क्योंकि वह आईएस अधिकारी नहीं हैं। इससे पहले, मोदी सरकार में इस उच्च स्तर पर लेटरल एंट्री का एकमात्र मामला एक आईएस अधिकारी परमेश्वर अय्यर का है, जिन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पेयजल और स्वच्छता सचिव बनाया गया था।

कोटेचा और पीएम मोदी के रिश्ते 32 साल पुराने हैं। 1988 में मोदी भाजपा के महासचिव थे। उस समय उन्होंने कोटेचा के एक व्यावसायिक उपक्रम का उद्घाटन किया था। साल 2015 में कोटेचा को पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।

कोटेचा 1988 के घटनाक्रम को याद करते हुए बताते हैं कि तब मेरी उनसे (मोदी) पहली मुलाकात हुई थी। वे हमारे जयपुर स्थित चक्रपाणि क्लिनिक का उद्घाटन करने आये थे। मैं तब उन्हें जानता भी नहीं था। किसी ने मुझे उनका नाम सुझाते हुए कहा कि वे गुजराती हैं, वे आपके कार्यक्रम में आ जाएंगे। इसके अलावा 2013 में मेरी उनसे एक शिष्टाचार भेंट हुई थी। मैं बहुत ज्यादा उनसे मिला नहीं हूँ।

आरएसएस विचारक नानाजी देशमुख से संबंधों के विषय में पूछे गए सवाल के जवाब में कोटेचा ने कहा कि वे हमारे लिए पिता के सामान और पथप्रदर्शक थे। मैं उनका निजी चिकित्सक रहा हूं।

कोटेचा ने बीते 29 जून को अपना कार्यभार ग्रहण किया। इससे पहले, 20 जून के आदेश में कहा गया था कि जबतक कोटेचा मंत्रालय के कार्यशैली से पूरी तरह परिचित नहीं हो जाते तब तक सी.के मिश्रा प्रभारी बने रहेंगे।

ऐसे में मंत्रालय के अन्य अधिकारी इस दोहरे शासन पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त एक हितों के टकराव का मामला भी सामने आ रहा है। कोटेचा की पत्नी भी मंत्रालय के द्वारा संचालित एक संस्थान में कार्यरत हैं।

वहीं, लेटरल एंट्री और आईएस और गैर आईएस के विवादों में घिरे कोटेचा ने सवालों का जवाब देते हुए कहा कि मैं आईएएस और गैर आईएस की बहस में नहीं पड़ना चाहता हूं। अगर आईएएस कई सारे कामों को कर सकते हैं तो मैं भी एक टेक्नोक्रेट के रूप में कई जिम्मेदारियां संभाल सकता हूं।

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