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संविधान सभा के अंतिम भाषण में बाबा साहेब आंबेडकर ने जताई थी चिंता, उठाए थे कई सवाल

बाबा साहब ने कहा था कि मैं मानता हूं कि संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि वो लोग जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाएगा खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा।

बाबा साहब भीमराव आंबेडकर (सोर्स – एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

आज बाबा साहेब आंबेडकर की 130 वीं जयंती है। कोरोना संकट के बीच देश में लोकतंत्र, संविधान, स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर कई जगह बहस हो रहे हैं। आज के दौर में बाबा साहब के द्वारा संविधान सभा में दिया गया अंतिम भाषण काफी प्रासंगिक हो जाता है। आंबेडकर ने अपने भाषण में कई चिंताए जतायी थी। उनके द्वारा कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की गयी थी।

बाबा साहब ने कहा था कि मैं मानता हूं कि संविधान चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि वो लोग जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाएगा खराब निकले तो निश्चित रूप से संविधान खराब सिद्ध होगा। दूसरी तरफ अगर संविधान चाहे कितना भी खराब क्यों न हो यदि वो लोग जिन्हें संविधान को अमल में लाने का काम सौंपा जाएगा वो अगर अच्छे हुए तो संविधान अच्छा सिद्ध होगा। उन्होंने कहा था कि 26 जनवरी 1950 को भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र होगा लेकिन उसकी स्वतंत्रता का भविष्य क्या होगा?

वो अपनी स्वतंत्रता बनाए रखेगा ये उसे फिर से खो देगा? मेरे मन में आने वाला यह पहला विचार है। 26 जनवरी 1950 को भारत एक प्रजातांत्रिक देश बन जाएगा उस दिन से भारत में जनता की जनता द्वारा और जनता के लिए बनी एक सरकार होगी। उन्होंने कहा था कि क्या भारत अपने प्रजातांत्रिक संविधान को बनाए रखेगा या उसे फिर से खो देगा? मेरे मन में आने वाला यह दूसरा विचार है। और यह भी पहले विचार जितना ही चिंताजनक है।

आंबेडकर ने खुद से सवाल किया था कि आज की तारीख में, जब हमारा सामाजिक मानस अलोकतांत्रिक है और राज्य की प्रणाली लोकतांत्रिक, ऐसे में कौन कह सकता है कि भारत के लोगों तथा राजनीतिक दलों का भविष्य का व्यवहार कैसा होगा?

आंबेडकर ने कहा था कि तमाम समस्याओं का समाधान यह है कि सारे भारतवासी देश को अपने पंथ से ऊपर रखें, न कि पंथ को देश से ऊपर। लेकिन इस बात को लेकर आंबेडकर भरोसे में नहीं थे। यही कारण था कि उन्होंने कहा था कि यदि राजनीतिक दल अपने पंथ को देश से ऊपर रखेंगे तो हमारी स्वतंत्रता एक बार फिर से खतरे में पड़ जाएगी और संभवत: हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

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