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‘अयोध्या में राम मंदिर के लिए दूंगा सोने की ईंट’, मुगलों के वंशज की पेशकश

मुगल वंशल का कहना है कि साल 1529 में पहले मुगल बादशाह बाबर ने अपने सैनिकों को नमाज पढ़ने की जगह देने के लिए बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। इसका निर्माण सिर्फ सैनिकों के लिए किया गया था।

Author नई दिल्ली | Published on: August 18, 2019 3:40 PM
खुद को मुगल सल्तनत के वंशज कहने वाले याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने कहा कि विवादित भूमि के मामले में कोई भी पक्ष जमीन के मालिकाना हक के लिए सही दस्तावेज पेश नहीं कर सका है, और मुंगल शासकों का वशंज होने के चलते उनका अपनी राय रखने का अधिकार है कि विवादित भूमि किस पक्ष को दी जानी चाहिए। (ANI PHOTO)

हैदराबाद में रह रहे मुगल वंश के आखिरी वंशज ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए पहली ईंट देने की अपनी पेशकश दोहराई है। उन्होंने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि उन्हें सौंपने के लिए भी कहा। शनिवार (17 अगस्त, 2019) को टीओआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यह सोने की ईंट होगी। उन्होंने कहा, ‘मैं ना केवल सोने की ईंट देने की पेशकश करूंगा बल्कि मंदिर निर्माण के लिए पूरी जमीन भी सौंप दूंगा।’

पचास वर्षीय याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने पिछले साल सितंबर में भी सोने की ईंट देने की पेशकश की थी। तूसी ने खुद को बाबरी मस्जिद का पक्षकार बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की है। हालांकि कोर्ट ने अभी तक उनकी दलीलें स्वीकार नहीं की है। बता दें कि तूसी का दावा है कि वह मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की छठी पीढ़ी के वंशज हैं।

खुद को मुगल सल्तनत के वंशज कहने वाले तूसी ने कहा कि विवादित भूमि के मामले में कोई भी पक्ष जमीन के मालिकाना हक के लिए सही दस्तावेज पेश नहीं कर सका है, और मुंगल शासकों का वशंज होने के चलते उनका अपनी राय रखने का अधिकार है कि विवादित भूमि किस पक्ष को दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘कम से कम, मुझे सुना जाना चाहिए।’ विवादित भूमि से संबंधित याचिका तूसी ने आठ फरवरी में दाखिल की थी। उनके वकील प्रवीण कुमार ने टीओआई से दिल्ली में कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट में कोई और याचिका विचारणीय नहीं है।

तूसी ने कहा कि साल 1529 में पहले मुगल बादशाह बाबर ने अपने सैनिकों को नमाज पढ़ने की जगह देने के लिए बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। इसका निर्माण सिर्फ सैनिकों के लिए किया गया था। उन्होंने कहा, ‘मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता कि मस्जिद से पहले उस जमीन पर क्या था। मगर हिंदू अगर उस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानकर उसमें आस्था रखते हैं तो मैं एक सच्चे मुसलमान की तरह उनकी भावना का सम्मान करूंगा।’

गौरतलब है कि 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण जिस स्थान पर हुआ वहां ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में एक राम मंदिर होने का प्रमाण था।

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