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प. बंगाल विशेष: कोरोना के डर ने बनाया शाकाहारी

डॉ. रतन भौमिक ने जनसत्ता को बताया कि मांसाहारी भोजन से व्यक्ति की रोग से लड़ने की क्षमता में इजाफा होता है, लेकिन इस बात का बारीकी से ध्यान रखना होगा कि जो मांसाहारी भोजन वे ग्रहण कर रहे हैं, वह पुरी शुद्धता से पकाया गया है और शत-प्रतिशत विषाणु मुक्त है।

Author कोलकाता | Published on: June 11, 2020 5:13 AM
vegetarian, carnivorus, food choice, foodingकोरोना वायरस के चलते पश्चिम बंगाल में काफी संख्या में लोग शाकाहारी हो गए हैं।

शंकर जालान
उत्तर कोलकाता निवासी विनोद कुमार सिंह हो या मध्य कोलकाता की अंजू देवी, ढाई महीने पहले तक दोनों का ही प्रिय भोजन मांसाहार था। घर ही नहीं, बाहर निकलने पर भी पहली फरमाइश मांसाहारी भोजन की ही होती थी। अब कोरोना आया तो विनोद व अंजू समेत उन लाखों लोग 70 दिनों से सब्जियों के सहारे हैं।

सूबे के 80 फीसद कोरोना के कारण फिलहाल शाकाहारी बन गए हैं। मांसाहारी कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि 20 मार्च से पहले वे रोजाना 200 किलो मुर्गी बेच लेते थे, लेकिन कोरोना काल में मुश्किल से 20-25 किलो ही बेच पा रहे हैं। इसी तरह मानिकतला बाजार में सालों से मछली बेच रहे हेमा दास ने बताया कि कोरोना के भय से लोगों ने मानो मछली खाने से परहेज कर लिया हो।

ढाई महीने से मछली बेच कर जितनी आमदनी हुई है उससे परिवार का तो क्या खुद का पेट भरना भी मुश्किल है। मछली के एक थोक कारोबारी ने बताया कि पहले कोलकाता और आसपास के इलाके में रोजाना 30 से 35 टन मछली की बिक्री होती थी, जो मार्च के आखिरी सप्ताह से घटकर केवल 2-3 टन रह गई है। यही हाल बकरे की मांस विक्रेताओं का है।

दरअसल, सूबे में ज्यों-ज्यों कोरोना का संक्रमण बढ़ता गया त्यों-त्यों यह कथन में जंगल में लगी आग की तरह फैसने लगा कि मांसाहार से दूर रहने वाले से कोरोना दूर रहेगा, इसी कथन के तहत लोगों ने मांसाहार त्यागा और शाकाहार अपनाया।
चिकित्सकों के मुताबिक, मांसाहार खाने और ना खाने से कोरोना का कोई संबंध नहीं है। जो व्यक्ति जितना सावधान रहेगा कोरोना उससे उतना ही दूर रहेगा।

डॉ. रतन भौमिक ने जनसत्ता को बताया कि मांसाहारी भोजन से व्यक्ति की रोग से लड़ने की क्षमता में इजाफा होता है, लेकिन इस बात का बारीकी से ध्यान रखना होगा कि जो मांसाहारी भोजन वे ग्रहण कर रहे हैं, वह पुरी शुद्धता से पकाया गया है और शत-प्रतिशत विषाणु मुक्त है। सूत्र बताते है कि चाहे मछली हो या चिकन या फिर मटन, कोरोना काल ने उनकी बिक्री में करीब-करीब 90 फीसद की गिरावट दर्ज की गई है।

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