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कोरोना के साए में मनी छठ: दिल्ली में प्रतिबंध तो लोग चले एनसीआर

कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए सभी लोगों ने मास्क लगा रखा था। साथ ही स्थानीय पुलिस और छठ समिति से जुड़े आयोजक भी लोगों से अपील कर रहे थे कि भौतिक दूरी का ख्याल रखें।

Author Edited By Sanjay Dubey नई दिल्ली | Updated: November 21, 2020 6:09 AM
Chhath Poojaघर में कुंड बनाकर छठ की पूजा करतीं महिलाएं।

निर्भय कुमार पांडेय
दिल्ली में सार्वजनिक तौर पर छठ महापर्व मनाने पर लगी पाबंदी के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने राजधानी से एनसीआर की ओर रुख किया। लोगों ने अपने रिश्तेदारों या फिर जानकारों के घर जाकर छठ महापर्व के मौके पर शुक्रवार को अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। दिल्ली के अलावा नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम, गाजियाबाद और आसपास के कई इलाकों में लोगों ने अस्था के लोकपर्व को मनाया। नोएडा सेक्टर-45, काशी राम अवासीय परिसर में बने घाट पर पहुंचे न्यू अशोक नगर निवासी राम चंद्र सिंह ने बताया कि उनके मामा इसी इलाके में रहते हैं। यहां से न्यू अशोक नगर की दूरी महज छह-सात किमी है। यही कारण है कि उन्होंने निर्णय लिया कि वह इस बार न्यू अशोक नगर में छठ नहीं कर अपने मामा के घर करेंगे।

उन्होंने कहा कि घाट पर लोग काफी सतर्क दिखे। कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए सभी लोगों ने मास्क लगा रखा था। साथ ही स्थानीय पुलिस और छठ समिति से जुड़े आयोजक भी लोगों से अपील कर रहे थे कि भौतिक दूरी का ख्याल रखें। साथ ही व्रतियों को अर्घ्य देने के लिए व्यवस्था इस प्रकार से की गई थी कि लोग भौतिक दूरी का ख्याल रखें। समूह में ना कर लोगों से दूर-दूर बैठकर सूर्य देव की उपासना करने की सलाह देते हुए आयोजक दिखे।

वहीं, नरेला जनहित पूर्वांचल सोसायटी पंजीकृत के महासचिव विनीत कुमार ने बताया कि उन्होंने आखिर समय तक सभी मंचों से दिल्ली के मुख्यमंत्री से अपील करते रहे कि सार्वजनिक तौर पर यमुना नदी के किनारे नहीं पार्क या फिर अन्य स्थान पर छठ महापर्व करने की अनुमति दी जाए। इसके लिए उपराज्यपाल से लेकर जंतर-मंतर तक धरना भी दिया गया। पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई तो उन्होंने निर्णय लिया कि उनके रिश्तेदार हरियाणा के सबोली सफियाबाद में रहते हैं। वह नहाय खाय के दिन ही वहां चले गए थे।

घर बने छठ घाट, बालकनी से दिया अर्घ्य
कोरोना महामारी के बाबत दिल्ली के घाटों पर छठ पूजा की मनाही के चलते यहां व्रतियों ने छतों और बालकनी से अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य दिया। शुक्रवार को सूर्यास्त का समय 5:26 मिनट निहित था। सूर्य अर्घ्य अर्पण के लिए जरूरी जल जमाव एक बड़ी चुनौती रही। हर साल विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर पहले से आरक्षित घाटों में साफ पानी की व्यवस्था सरकारी एंजसियां, दिल्ली सरकार व नगर निगम या आरडब्लूए करता था।

इस बार दिल्ली के छठ व्रतधारियों को अपनी व्यवस्था खुद करनी पड़ी। उन्होंने अपनी जगह व क्षमता के हिसाब से पानी का भराव किया। जल जमाव के लिए प्लास्टिक के बड़े-बड़े टबों, रबड़ वाले टब या फिर ईंट से चारदीवारी बनाकर उस पर प्लास्टिक की पन्नी लगाकर पानी से भर दिया गया। घाट की तर्ज पर छठ पूजा के लिए घरों में वेदी भी बनाई गई। लोकगीत बजाए गए। पूजा स्थल को सजाया गया।

खोड़ा छठ समिति के समन्यवयक व एनबीसीसी मजदूर संघ के महासचिव बलिराम सिंह ने बताया कि गरीब और असहाय लोगों के घर जाकर छठ पूजन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही लोगों से पूजा के दौरान कोरोना से बचाव रखने का भी अनुरोध किया। यह पहली छठ रही जिसमें बच्चों ने पटाखों से परहेज किया। हर बार स्थानीय विधायक, निगम पार्षदों से लेकर छुटभैया नेताओं का जो जमावड़ा और संबोधन होता था वो इस बार गायब रहा। शायद घाटों पर वोट बैंक न जुटने के कारण ऐसा हुआ। छठ पूजा से जुड़ी सामग्री को लेकर पहला अर्घ्य देने से पहले बाजारों में जमकर खरीदारी हुई। इससे व्यापारी भी खुश दिखे। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में पूजन सामग्री की खरीद के लिए महिलाओं की भीड़ जुटी हुई थी।

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