केरल के वायनाड में मेप्पाडी के पास कल्लाडी में जबरदस्त भूस्खलन हुआ है। इस भूस्खलन की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि सात लोग घायल हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह भूस्खलन वायनाड सुरंग परियोजना वाली जगह पर हुआ है।

फायर और रेस्क्यू सर्विस के अधिकारियों ने बताया कि भूस्खलन की यह घटना कल्लाडी में मीनाक्षी पुल के पास हुई। यहांं मलप्पुरम और वायनाड जिलों को जोड़ने वाली सुरंग सड़क परियोजना का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (KSDMA) ने मीडिया को जानकारी दी है कि भारी बारिश की वजह से वायनाड में यह भुस्खलन हुआ। इस भूस्खलन में पांच लोग घायल हुए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हालांकि बाद में बाद में मंंत्री टी. सिद्दीकी ने बताया कि छह लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

केरल के मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि कि मीनांगडी में तैनात NDRF यूनिट तुरंत हादसे वाली जगह पर पहुंच रही है। कोझिकोड में मौजूद NDRF टीम को भी वायनाड जाने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने हालात का जायजा लेने के लिए वायनाड के जिला कलेक्टर से फोन पर बात भी की।

मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से यह भी बताया गया है कि मुख्यमंत्री ने वायनाड के मंत्री टी. सिद्दीकी के साथ एक इमरजेंसी मीटिंग की और उन्हें बचाव कार्यों में तालमेल बिठाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने राजस्व मंत्री एपी अनिल कुमार और कृषि मंत्री टी. सिद्दीकी को भी तुरंत वायनाड जाने का निर्देश दिया है।

‘यह प्राकृतिक भूस्खलन नहीं, इंसानों की वजह से हुआ’

केरल के मंत्री टी. सिद्दीकी ने तिरुवनंतपुरम में मीडिया से कहा, “यह कोई प्राकृतिक भूस्खलन नहीं है, यह बल्कि इंसानों की वजह से हुआ भूस्खलन है। यह साफ तौर पर लापरवाही का मामला है। छह लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत स्थिर है।”

उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर ने कोंकण रेलवे को लिखित रूप में उस जगह पर भूस्खलन की आशंका के बारे में बताया था। वायनाड और कोझिकोड से NDRF के कुल 60 जवानों वाली दो टीमों को घटनास्थल पर भेजा गया है। जिला कलेक्टर घटनास्थल पर मौजूद हैं। कोंकण रेलवे को पहले ही इस बारे में जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसी चीजें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं क्योंकि दो साल पहले मुंडक्कई में भूस्खलन से 298 लोगों की जान चली गई थी