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कोरोनाः Bharat Biotech की COVAXIN फायदेमंद- Lancet, SII सीईओ ने बताया था ‘पानी जैसा’

लांसेट में यह बताया गया है कि आमतौर पर किसी भी वैक्सीन को लेने से लोगों में गंभीर साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं। लेकिन कोवैक्सीन में ऐसी कोई भी साइड इफेक्ट्स नहीं है। कोवैक्सीन पूरी तरह से मेड इन इंडिया है और इसे भारत बायोटेक ने विकसित किया है।

bharat biotech , covaxin , lancetप्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो – ट्विटर /BharatBiotech)

भारत में बनी कोवैक्सीन से लोगों के ऊपर कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होंगे और इससे शरीर की इम्युनिटी भी बढ़ेगी। यह दावा विश्व प्रसिद्ध मैगजीन लांसेट में किया गया है। लांसेट में यह बताया गया है कि आमतौर पर किसी भी वैक्सीन को लेने से लोगों में गंभीर साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं। लेकिन कोवैक्सीन में ऐसी कोई भी साइड इफेक्ट्स नहीं है। कोवैक्सीन पूरी तरह से मेड इन इंडिया है और इसे भारत बायोटेक ने विकसित किया है। हालाँकि सीरम इंस्टिट्यूट के अदर पूनावाला ने भारत बायोटेक के द्वारा बनाई गयी कोवैक्सीन को पानी की तरह का बताया था। 

लांसेट में छपी रिपोर्ट के अनुसार कोवैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता और सुरक्षा क्षमता को मापने के लिए करीब 11 अस्पतालों में इसका परीक्षण किया गया। इस परीक्षण में करीब 18 साल से लेकर 55 साल के लोगों को शामिल किया गया था। कोवैक्सीन की क्षमता को जाँचने के लिए करीब 827 प्रतिभागियों की जांच की गयी थी जिसमें से 375 लोगों को शामिल किया गया था। लांसेट के अनुसार जब इस परीक्षण को किया गया तो सभी एज ग्रुप के लोगों के बीच इस डोज को आसानी से सहन किया गया और कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स भी देखने को नहीं मिले। हालाँकि कई लोगों को सिरदर्द , थकान और बुखार जैसी शिकायतें हुई।

भारत बायोटेक की सुचित्रा येल्ला ने लांसेट मैगजीन में छपी रिपोर्ट पर ख़ुशी व्यक्त किया। सुचित्रा येल्ला ने ट्वीट करते हुए लिखा कि कोवैक्सीन भारत की ऐसी पहली वैक्सीन है जिसकी रिपोर्ट लांसेट जैसे ख्यातिप्राप्त मैगजीन में छपी है। लांसेट ने अपनी रिपोर्ट में भारत बायोटेक के द्वारा बनाई गयी कोवैक्सीन को BBV152 नाम का कोड दिया है और कहा कि नतीजों में इस वैक्सीन के सुरक्षित होने और शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने का पता चला है। 

आपको बता दूँ कि कुछ दिन पहले सीरम इंस्टिट्यूट के अदर पूनावाला ने भारत बायोटेक के द्वारा बनाई गयी  कोवैक्सीन को मंजूरी मिलने पर आपत्ति जाहिर की थी। पूनावाला ने कहा था कि सिर्फ तीन वैक्सीन ही कारगर हैं और बाकी सभी वैक्सीन पानी की तरह हैं। जिसपर भारत बायोटेक के संस्थापक कृष्णा इल्ला ने पलटवार करते हुए कहा था कि हमने ईमानदार क्लिनिकल ट्रायल किया है। इसके बावजूद भी कुछ कंपनियां हमारी वैक्सीन को पानी जैसा बता रही हैं। मैं इससे इंकार करता हूँ। हालाँकि बाद में PMO ने दोनों के बीच सुलह करवाया था जिसके बाद एक जॉइंट स्टेटमेंट भी आया था।

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