ताज़ा खबर
 

टेंडर कमेटी के तीनों सदस्यों को नहीं कुछ भी याद, CBI कर रही है लालू यादव के खिलाफ ठेके में धांधली की जांच

टेंडर कमेटी के सदस्य रहे बीके अग्रवाल ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "मुझे उन दो होटलों के बारे में कुछ भी याद नहीं। ये बहुत पुरानी बात है।"

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव। (File Photo)

साल 2006 में लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान मंत्रालय के दो होटलों के रख-रखाव का ठेका पटना के सुजाता होटल को देने के मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जांच कर रहे हैं। जब ये ठेका दिया गया उस समय के इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन टेंडर कमेटी के तीन सदस्यों बीके अग्रवाल, विनोद अस्थाना और राकेश गोगिया ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि उन्हें इन ठेकों के बारे में कुछ भी याद नहीं है। अग्रवाल, अस्थाना और गोगिया की कमेटी ने ही दिसंबर 2006 में बीएनआर पुरी और बीएनआर रांची की देखरेख का ठेका सुजाता होटल को दिया था। अग्रवाल अभी भी रेल मंत्रालय में वरिष्ठ पद पर कार्यरत हैं। अस्थाना साल 2014 में रिटायर हो चुके हैं और गोगिया कमेटी के एकमात्र गैर-रेलवे कर्मचारी सदस्य थे। गोगिया प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं।

अग्रवाल से पूछा गया कि क्या उन्होंने दोनों होटलों के ठेके से जुड़े दस्तावेज देखे थे? अग्रवाल ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “मुझे उन दो होटलों के बारे में कुछ भी याद नहीं। ये बहुत पुरानी बात है।” उन्होंने आगे कहा, “अगर मैंने दस्तावेज देखे भी होंगे तो ये कहना सही नहीं होगा कि मैं याद करूंगा।” अग्रवाल रेलवे के मैकेनेकिल सर्विस अफसर रहे हैं और 2006 में आईआरसीटीसी के टूरिज्म सर्विस  के जनरल मैनेजर होने के नाते कमेटी के सदस्य थे। अभी वो रेलवे के सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माडर्नाजेशन ऑफ वर्कशॉप के प्रमुख हैं।

अस्थाना रेलवे ट्रैफिस सर्विस के अफसर रहे हैं और वो साल 2006 में आईआरसीटीसी के जनरल मैनेजर (ऑपरेशंस) होने के नाते कमेटी के सदस्य थे। अस्थाना आईआरसीटीसी के डायरेक्टर भी रहे हैं। वो सेंट्रल रेलसाइड के वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर बनने के बाद रिटायर हो गए। दोनों होटलों के ठेके के बारे में पूछने पर अस्थाना ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “उन दिनों रोज ही टेंडर पास होते थे, मेरे लिए तत्काल कुछ याद करना मुश्किल है। उस समय लगभग रोज ही कोई ने कोई टेंडर निकलता था। बहरहाल, मैं कैटरिंग में था और ये मामला मेरे विभाग से जुड़ा नहीं है। मैं केवल टेंडर कमेटी का हिस्सा भर था।”

कमेटी के तीसरे सदस्य गोगिया साल 2006 में आईआरसीटीसी के ज्वाइंट जनरल मैनेजर (फाइनेंस) और कंपनी सेक्रेटरी थे। साल 2008 में जब पहली बार इन ठेकों पर सवाल उठाए गए तो गोगिलया ने मीडिया में एक हस्ताक्षरित नोट जारी किया था और दावा किया था कि पूरी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। उन ठेकों और नोट के बारे में पूछने पर गोगिया ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “आप किस नोट की बात कर रहे हैं? मैंने कभी कोई नोट नहीं जारी किया। वो मेरा काम नहीं था।” इंडियन एक्सप्रेस के पास नोट की प्रति मौजूद है। गोगिया ने आगे कहा, “(ठेकों के बारे में) मुझे कोई याद नहीं। कुछ असमान्य नहीं हुआ है।” गोगिया ने साल 2010 में आईआरसीटीसी छोड़ दिया था।

सीबीआई ने हाल ही में दोनों होटलों के ठेके से जुड़े सभी अधिकारियों के नाम एकत्रित किए। पिछले महीने सीबीआई ने अपनी एफआईआर में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर इन ठेकों के बदले पटना में एक कीमती जमीन लेने का मामला दर्ज किया। पिछले हफ्ते ईडी ने इन होटलों के ठेके के संबंध में लालू परिवार पर कालेधन को सफेद करने का मामला दर्ज किया। दस्तावेज के अनुसार इन होटलों के ठेके लिए केवल सुजाता होटल एकमात्र योग्य दावेदार था। टेंडर कमेटी ने भुवनेश्वर स्थित होटल केशरी का दावा यह कहकर रद्द कर दिया कि उनके पास “लगता नहीं है कि उनके पास कोई योजना है।” रांची के होटल के लिए भी दीनानाथ होटल की दावेदारी खारिज कर दी गई थी और सुजाता होटल को दे दी गई थी। टेंडर कमेटी ने जिस दिन (23 दिसंबर 2006) सुजाता होटल को ठेका देने की अनुशंसा की उसी दिन उसे आईआरसीटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर पीके गोयल ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी। गोयल का नाम भी सीबीआई एफआईआर में शामिल है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App