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टी शर्ट और शॉर्ट्स में दिखे लालू, ठेठ गंवई अंदाज़ के दम पर राजनीति में हुए थे लोकप्रिय

लालू प्रसाद यादव अपने देसी अंदाज के लिए जाने जाते हैं। अकसर जब उनके घर की तस्वीर आती थी तो वह लूंगी-बनियान में या कुर्ते में नजर आते थे। लेकिन इस बार वह टीशर्ट और शॉर्ट्स में दिखे।

अपने जन्मदिवस के मौके पर लालू प्रसाद यादव। फोटो क्रेडिट- फेसबुक (Pankaj Srivastav)

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव आम जनमानस में जिस वज़ह से प्रसिद्ध हैं, वह है उनका गंवई और ठेठ अंदाज़। बिहार में गोपालगंज के छोटे से गांव फुलवरिया में जन्मे लालू ने जीवन में बड़े-बड़े मुकाम हासिल किए लेकिन अपना देसी अंदाज़ और ठेठ भाषा नहीं छोड़ी। इसी वज़ह से आज भी लोग उनके भाषणों के कायल हैं। क्लर्क के रूप में काम की शुरुआत करने वाले लालू आज अगर लोगों के इतने क़रीब हैं तो इसकी एक वजह उनका गंवईपन भी है।

अपने 74वें जन्मदिन के मौके पर जब लालू प्रसाद यादव की तस्वीर सामने आई तो यह उनके पुराने अंदाज़ से बिल्कुल अलग थी। वह पहली बार टी शर्ट और शॉर्ट्स में दिखायी दिए। अपना जन्मदिन मनाने वह बेटी मीसा भारती के घर पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर तस्वीर आने के बाद लोग उनके लूंगी-बनियान वाले हुलिए को याद करने लगे। दरअसल जेल में रहने के दौरान ही लालू यादव का स्वास्थ्य भी बिगड़ गया था। इसके बाद वह पहले की तरह ऐक्टिव नहीं दिखायी दिए।

लालू प्रसाद यादव बचपन में अपनी मां के साथ जाकर दूध बांटा करते थे। कॉलेज के समय जब लालू यादव ने छात्र राजनीति शुरू की तो मंच पर चढ़कर भाषण देने लगे। बात करने का तरीक़ा और चुटीलापन यहां भी उनके बहुत काम आया। वह छात्रों के बीच भी लोकप्रिय रहे। मंच पर वह ‘नटुआ’ बनकर कमाल करते थे। दरअसल नटुआ का मतलब स्थानीय भाषा में वह लड़का होता है जो कि लड़की बनकर नाचता गाता है।

अपनी लोकप्रियता के चलते अगले ही साल वह पटना यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन के महासचिव बन गए। यहीं से उनके सफल राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई। 29 साल की उम्र में सांसद बनने के बाद भी वह सर्वेंट क्वार्टर में रहा करते थे।

राबड़ी देवी भी हमेशा देसी अंदाज़ में नज़र आईं
लालू प्रसाद यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी हमेशा आम गृहिणी की तरह ही दिखती थीं। एक बार तो उनकी पोछा लगाते हुए तस्वीर अख़बार में छप गई थी। बाद में लालू यादव के जेल जाने के बाद वह सीएम भी बनीं। आज भी छठ का पर्व मनाते हुए उनकी तस्वीरें देखने को मिल जाती हैं। lalu yadav

साल 2004 में वह यूपीए सरकार में रेल मंत्री बन गए। पद संभालने के बाद उन्होंने कई कदम उठाए जिसमें स्टेशनों पर मिट्टी के कुल्हड़ में चाय मिलना भी एक था। उनका भौकाल टाइट था लेकिन उनकी बोली-बानी बिल्कुल ठेठ ही रही। मुख्यमंत्री रहते हुए तो लालू यादव पत्रकारों से भी दूध दुहते हुए बात करते थे। हालांकि रेल मंत्री बनने के बाद कुछ बदलाव देखने को मिला।

सन 77 में जब वह पहली बार संसद पहुंचे थे तो उन्होंने वेस्पा स्कूटर खरीदा था। विधायक बनने के बावजूद वह अपने घर पर बंडी या तो कमीज़ में ही नज़र आते थे। परिधान महंगे होते गए लेकिन अंदाज़ वही रहा। देसी कपड़ों को छोड़ वह पश्चिमी सभ्यता की ओर कभी नहीं गए।

चरवाहा विद्यालय
लालू प्रसाद यादव ने कई देसी प्रयोग भी किए। उन्होंने चरवाहा विद्यालय की भी शुरुआत की थी। इसमें जानवर चराने वाले बच्चे आकर पढ़ा करते थे। हालांकि यह प्रयोग सफल नहीं रहा। एक साल के बाद यहां बच्चों के साथ अध्यापकों ने भी आना छोड़ दिया। हालांकि यूनीसेफ समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इसकी तारीफ़ की थी।

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