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Lala Lajpat Rai Birth Anniversary: ‘शेरे पंजाब’ और ‘पंजाब केसरी’ के नाम से मशहूर थे लाल, भगतसिंह ने लिया था इनकी मौत का बदला

लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 के दिन पंजाब के धुदिके में एक जैन परिवार में हुआ था। स्वामी दयानंद सरस्वती के सुधारवादी आंदोलन से प्रभावित होकर वे आर्य समाज लाहौर के सदस्य बने और लाहौर के आर्य गजट के संपादक बने। 1886 में वे हिसार बार काउंसिल के सदस्य बने। उसी साल कांग्रेस की हिसार ब्रांच की स्थापना भी की।

लाल राजपत राय, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

गरम दल के क्रांतिकारी नेता लाला लाजपत राय (Lala Lajpat Rai) की बहादुरी के किस्से कई किताबों में दर्ज हैं। ‘शेरे पंजाब’ और ‘पंजाब केसरी’ के नाम से मशहूर लाजपत राय मशहूर सेनानी तिकड़ी ‘लाल-बाल-पाल’ का हिस्सा थे। राष्ट्रवाद की उनकी विचारधारा ने ही उन्हें यह पहचान दिलाई। ‘स्वदेशी’ आंदोलन की वकालत करने वाली यह तिकड़ी अंग्रेजों के खिलाफ अपने गरम मिजाज के लिए मशहूर थी। एक और खास बात यह है कि पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की स्थापना की पहल भी लाजपतराय ने ही की थी। 28 जनवरी 2020 को देश उन्हें उनकी 155वीं जयंती पर याद कर रहा है।

लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 के दिन पंजाब के धुदिके में एक जैन परिवार में हुआ था। स्वामी दयानंद सरस्वती के सुधारवादी आंदोलन से प्रभावित होकर वे आर्य समाज लाहौर के सदस्य बने और लाहौर के आर्य गजट के संपादक बने। 1886 में वे हिसार बार काउंसिल के सदस्य बने। उसी साल कांग्रेस की हिसार ब्रांच की स्थापना भी की। उन्होंने कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना भी की। लाल-बाल-पाल की जोड़ी ने ही पूर्ण स्वराज की मांग उठाई थी। 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वे अमेरिका चले गए थे, जहां से 1920 में लौटे। 1921 से 1923 तक वे जेल में रहे।

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लाठीचार्ज में लहूलुहान लाल ने यूं तोड़ा था दमः साइमन कमीशन के विरोध में सड़क पर उतरे लाला उनके समर्थकों पर अंग्रेजों ने जमकर अत्याचार किया था। ब्रिटिश पुलिस के लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय बुरी तरह घायल हो गए थे। बुरी तरह घायल होने के बावजूद उन्होंने वहां एकत्रित भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘मैं घोषित करता हूं कि आज मुझ पर जो हमला किया गया, वह भारत में ब्रिटिश शासन के ताबूत की आखिरी कील साबित होगा।’ इसके बाद इलाज के दौरान हार्ट अटैक के चलते उनका निधन हो गया था।

भगत सिंह ने लिया था मौत का बदलाः अंग्रेजों से लाला लाजपत राय की मौत का बदला शहीदे आजम भगत सिंह और राजगुरु ने लिया था। दोनों ने 17 फरवरी 1928 के दिन सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल से गोली मार कर ब्रिटिश पुलिस ऑफिसर जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर दी थी। सॉन्डर्स के मरने के बाद भी भगतसिंह का ताबड़तोड़ हमला जारी रहा। इस मामले में भगत सिंह को उनके साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी दे दी गई थी।

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