लखीमपुर हिंसा पर SC ने पूछा सवाल, जब हजारों लोग मौजूद थे तो सिर्फ 23 चश्मदीद गवाह कैसे; राज्य को गवाहों की सुरक्षा के लिए भी कहा

सुप्रीम कोर्ट ने लखमीपुर हिंसा मामले की सुनवाई के दौरान सवाल किया कि रैली में सैकड़ों किसान शामिल थे और सिर्फ 23 ही चश्मदीद गवाह बने?

Lakhimpur kheri
लखीमपुर खीरी में किसाान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा। फाइल फोटो।

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे पेश हुए। उन्होंने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय को स्टेटस रिपोर्ट सौंपते हुए जानकारी दी कि अभी तक 68 गवाहों में से 30 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। साल्वे ने कहा कि 23 लोगों ने इस घटना के चश्मदीद होने का दावा किया है।

इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रैली में तो सैकड़ों किसान शामिल थे और सिर्फ 23 ही चश्मदीद गवाह बने? हरीश साल्वे ने कहा कि चश्मदीद गवाहों को लेकर हमने सार्वजनिक विज्ञापन देकर कहा है कि जो घटनास्थल पर थे, जिन्होंने कार में असल में लोगों को देखा था, वो सामने आएं। हमने घटना के सभी मोबाइल वीडियो और वीडियोग्राफी पर भी ध्यान दिया है।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वहां पर चार- पांच हजार लोग थे, जो स्थानीय थे। इसपर साल्वे ने जवाब दिया कि वहां मौजूद लोग अधिकतर लोकल थे, लेकिन उनमें बाहरी भी शामिल थे। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि घटना के बाद जांच की मांग करने वालों की तादाद अधिक थी। इस पर साल्वे ने कहा कि यहां सवाल उन लोगों का है जो घटना के वक्त मौजूद थे।

CJI ने कहा कि जांच कर रही अपनी एजेंसी से कहें कि वो यह देखें कि 23 लोगों के अलावा घटना के समय और कितने लोग थे। बता दें कि इस मामले की अगली सुनवाई अब 8 नवंबर को होगी।

वहीं सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वहां मौजूद चार हजार लोगों में से कई लोगों ने इन चीजों को काफी गंभीरता से देखा होगा और वो गवाही देने में सक्षम हो सकते हैं। CJI ने कहा कि क्या इन 23 चश्मदीद गवाहों में से कोई घायल हुआ है? जवाब में हरीश साल्वे ने कहा, दुर्भाग्य से जिन लोगों को चोटें आईं, उनकी बाद में मौत हो गई। 23 गवाहों में से कोई घायल नहीं हुआ है।

सीजेआई ने कहा कि इसपर और अधिक जानकारी जुटाएं, फिर हम लैब को मामले में तेजी लाने के लिए कह सकते हैं। वहीं कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। जिसपर साल्वे ने कहा कि गवाहों को सुरक्षा दी जा रही है।

वहीं इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की कार्यशैली पर अपनी नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा था कि, ऐसा लग रहा है कि इस मामले में राज्य सरकार अपने पैर खींच रही है। उस दौरान कोर्ट ने यूपी सरकार को और अधिक जानकारी जुटाने के लिए कहा था।

बता दें कि लखीमपुर खीरी में 3 अक्टूबर को किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों सहित आठ लोग मारे गए थे। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में CJI एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ कर रही है।

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