लखीमपुर खीरी: चर्चा में आए अजय मिश्रा रखते हैं पहलवानी का शौक, मर्डर केस में सुनवाई के दौरान कोर्ट में ही हुआ था हमला, 2017 में बेटे को बनवाना चाहते थे MLA

2012 में सपा की अच्छी लहर के बीच अजय मिश्रा ने निघासन सीट पर भाजपा का परचम लहराया था। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी ने 2014 में उन्हें खीरी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था।

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अजय मिश्रा मोदी सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हैं(फाइल/फोटो सोर्स: PTI)

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का नाम काफी चर्चा में हैं। आरोप है कि मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा की गाड़ी की टक्कर से चार किसानों की मौत हो गई है। विपक्षी दल अजय मिश्रा का इस्तीफा मांग रहे हैं। वैसे मोदी सरकार में मंत्री अजय मिश्रा खीरी से सांसद हैं और आसपास के क्षेत्रों में उन्हें ‘टेनी महराज’ के नाम से जानते हैं।

कुश्ती का शौक: पहलवानी का शौक रखने वाले अजय मिश्रा, हर साल अपने गांव बनबीरपुर में कुश्ती का आयोजन करवाते हैं। इस साल के आयोजन में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी शिरकत करने वाले थे। जिसका किसान विरोध कर रहे थे और मामला हिंसा तक जा पहुंचा। बता दें कि अजय मिश्रा राजनीति में आने से पहले वकालत करते थे। 2009 में उन्होंने राजनीति में पहली बार कदम रखा और जिला पंचायत का चुनाव लड़ा और जीत भी दर्ज की।

सपा लहर में भी दर्ज की जीत: दबंग छवि के बताए जाने वाले अजय मिश्रा ने 2012 में सपा की लहर के बाद भी लखीमपुर खीरी के निघासन सीट पर भाजपा के टिकट से जीत दर्ज की। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा ने भरोसा जताते हुए 2014 में उन्हें खीरी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई। 2019 में भी अजय दोबारा इसी सीट से लोकसभा पहुंचे। एक बार विधायक और दो बार भाजपा सांसद बने अजय मिश्रा को इसी साल जुलाई में मोदी कैबिनेट विस्तार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बनाया गया।

जब कोर्ट में हुआ था जानलेवा हमला: राजनीति में प्रवेश के साथ अजय मिश्रा कई संगीन मामलों में भी नामजद रह चुके हैं। उनके ऊपर तिकुनिया में धारा 147, 323, 504 और 324 के तहत मुकदमा भी दर्ज हुआ था। तिकुनिया के ही एक हत्याकांड मामले में नामजद अजय मिश्रा पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में ही जानलेवा हमला किया गया था लेकिन वो बाल-बाल बच गए। बाद में इस मामले से भी अदालत ने उन्हें आरोपमुक्त कर दिया था।

बेटे को बनवाना चाहते थे विधायक: 2014 में खीरी से लोकसभा सीट जीतने के बाद अजय मिश्रा चाहते थे कि 2017 में उनकी निघासन सीट पर भाजपा उनके बेटे आशीष मिश्र उर्फ मोनू को उम्मीदवार बनाए। लेकिन पार्टी से निराशा हाथ लगी। ऐसे में 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदें जरूर थीं, लेकिन लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में अजय मिश्रा और आशीष का नाम आने के बाद से अब राजनीतिक करियर ही दांव पर लगा हुआ है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि: अजय का परिवार मुख्यत: कानपुर का रहने वाला है, जोकि 1990 में लखीमपुर खीरी आया। अजय मिश्रा के पिता अंबिका प्रसाद मिश्र एक किसान थे। 18 साल पहले उनका निधन हो गया था। चार भाइयों में अजय मिश्रा दूसरे नंबर पर हैं। अजय मिश्रा के दो बेटे हैं, जिनमें एक अभिमन्यु मिश्र पेशे से डॉक्टर हैं, और अपनी निजी प्रैक्टिस करते हैं। वहीं दूसरे आशीष मिश्र उर्फ मोनू, राजनीति में हैं।

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