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कोरोना का नया रूप: डॉक्टर पर एक साथ दो वैरियंट्स का हमला, 40 करोड़ लोगों पर अब भी खतरा- ICMR बोला

सरकार ने कहा कि ICMR के चौथे राष्ट्रीय कोविड सीरो सर्वे के नतीजों से उम्मीद की किरण नजर आ रही है, लेकिन ढिलाई की कोई जगह नहीं है और कोविड से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र डिब्रूगढ़/नई दिल्ली | Updated: July 21, 2021 8:18 AM
कोरोना की दूसरी लहर में ‘डेल्टा वैरिएंट’ ने मचाया तांडव। (express file)

असम की एक महिला डॉक्टर को एक ही समय पर कोरोनावायरस के दो अलग-अलग स्वरूप से संक्रमित पाया गया है, जो कि देश में इस तरह का पहला मामला हो सकता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ बी बोरकाकोटी ने यहां यह जानकारी दी। कोविड-रोधी टीके की दोनों खुराक लेने के बावजूद डॉक्टर वायरस के अल्फा और डेल्टा दोनों स्वरूपों से संक्रमित पायी गईं। आरएमआरसी की प्रयोगशाला में मई में मरीज में दोहरे संक्रमण का पता चला था।

डॉ बोरकाकोटी ने कहा कि दोहरे संक्रमण के कुछ मामले ब्रिटेन, ब्राजील और पुर्तगाल में सामने आए थे लेकिन इस तरह का मामला भारत में पहले सामने नहीं आया है। टीके की दोनों खुराक लेने के करीब एक महीने बाद महिला और उनके पति कोरोना वायरस के अल्फा स्वरूप से संक्रमित पाए गए थे। दंपति डॉक्टर हैं और कोविड देखाभल केंद्र में तैनात थे। वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा, ”हमने दोबारा दंपति के नमूने एकत्र किए और परीक्षण के दूसरे चरण में महिला डॉक्टर में दोहरे संक्रमण की पुन: पुष्टि हुई।” उन्होंने बताया कि महिला डॉक्टर में हल्की गले की खराश, बदन दर्द और अनिद्रा के हल्के लक्षण थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं पड़ी।

इस बीच सरकार ने मंगलवार को बताया कि एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण के मुताबिक करीब 40 करोड़ लोगों को अब भी कोरोनावायरस संक्रमण का खतरा है, जबकि छह साल से अधिक आयु की देश की आबादी के दो तिहाई हिस्से में कोरोनावायरस की एंटीबॉडी पाई गई है। सरकार ने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के चौथे राष्ट्रीय कोविड सीरो सर्वे के नतीजों से उम्मीद की किरण नजर आ रही है, लेकिन ढिलाई की कोई जगह नहीं है और कोविड से जुड़े नियमों का अनुपालन करना होगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हालिया राष्ट्रीय सीरो सर्वे में दो तिहाई या छह वर्ष से अधिक आयु की भारत की 67.6 प्रतिशत आबादी में कोविड-19 एंटीबॉडी पाई गई है। अधिकारी ने कहा कि एक तिहाई आबादी में यह एंटीबॉडी नहीं है, जिसका मतलब है कि करीब 40 करोड़ लोगों को अब भी कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा है।

सरकार के मुताबिक सर्वेक्षण में शामिल किये गये स्वास्थ्य कर्मियों में 85 प्रतिशत में सार्स-सीओवी-2 के खिलाफ एंटीबॉडी है और स्वास्थ्य कर्मियों में 10 प्रतिशत का अब तक टीकाकरण नहीं हुआ है। सर्वेक्षण में 28,975 आम आदमी और 7,252 स्वास्थ्य कर्मियों को शामिल किया गया था।

चौथे दौर का सर्वेक्षण 21 राज्यों में 70 जिलों में किया गया, जहां पिछले तीन दौर का सर्वेक्षण भी किया गया था। सरकार ने कोविड-19 से जुड़े नियमों का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक समागम से दूर रहना चाहिए और अनावश्यक यात्राएं टालनी चाहिए।

सरकार ने कहा, ‘‘पूरी तरह से टीकाकरण कराने के बाद ही यात्रा करनी चाहिए।’’ आईसीएमआर ने यह सुझाव भी दिया कि प्राथमिक विद्यालयों को पहले खोलना विवेकपूर्ण होगा क्योंकि बच्चे वायरस संक्रमण से कहीं बेहतर निपट सकते हैं। आईसीएमआर ने कहा, ‘‘फैसला लेने के बाद और सभी कर्मचारियों का टीकारकण होने के बाद प्राथमिक विद्यालयों को पहले खोलना विवेकपूर्ण होगा।’’

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