लद्दाख प्रशासन ने गुरुवार को घोषणा की कि वह पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए कुछ व्यक्तियों के खिलाफ मामला बंद करने की रिपोर्ट दाखिल करेगा। यह निर्णय कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के प्रतिनिधियों द्वारा लेह में गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों से मुलाकात के एक दिन बाद आया है।

लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “पिछले साल करीब 87 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से लगभग 9 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जिसका मतलब है कि घटना में उनकी संलिप्तता के सबूत मौजूद हैं। बुधवार हुई बैठक के बाद हमने उपराज्यपाल से बातचीत की और यह निर्णय लिया गया कि 25 लोगों के खिलाफ मामले वापस ले लिए जाएंगे।” उन्होंने कहा कि इन लोगों से संबंधित क्लोजर रिपोर्ट समय आने पर अदालत में दाखिल की जाएगी।

हिंसा से प्रभावित लोगों के खिलाफ मामलों की बिना शर्त वापसी

बुधवार को केडीए और एलएबी ने केंद्र को गैर-समझौते योग्य मांगों की एक सूची सौंपी थी जिसमें प्रस्तावित निर्वाचित लद्दाख विधान सभा के लिए वित्तीय शक्तियां, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में नौकरियों के लिए एक अलग लोक सेवा आयोग और पिछले साल 24 सितंबर की हिंसा से प्रभावित लोगों के खिलाफ सभी मामलों की बिना शर्त वापसी शामिल थी। बुधवार की बैठक में लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान, केडीए के सह-अध्यक्ष सज्जाद कारगिली, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे, मुख्य सचिव कुंद्रा और गृह मंत्रालय के अधिकारी शामिल हुए।

गुरुवार को लद्दाख के मुख्य सचिव कुंद्रा ने इस घटना को भारत के इतिहास पर एक कलंक बताया और कहा, “हमने डीजीपी को जांच में शामिल बाकी लोगों के मामलों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। हम इन मामलों की फिर से जांच करेंगे और देखेंगे कि क्या कोई और व्यक्ति भी है जिसकी इस घटना में सक्रिय भूमिका नहीं थी।” कुंद्रा ने कहा कि अनुच्छेद 371 के कुछ प्रावधानों के तहत लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश स्तर की विधायी निकाय की परिकल्पना भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इन चर्चाओं को उप-समिति की एक औपचारिक संरचित बैठक में आगे बढ़ाया जाएगा जो संभवतः सितंबर के पहले सप्ताह में होगी।

लेह में पिछले साल हुए थे हिंसक प्रदर्शन

पिछले साल लेह में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण प्रदान करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के दौरान चार लोग मारे गए और कम से कम 50 लोग घायल हो गए थे। हिंसा के बाद लद्दाख की मांगों के समर्थन में लगभग 35 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। कार्यकर्ता पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और उन्हें 6 महीने के लिए जोधपुर जेल में भेज दिया गया।

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