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किसानों की आत्महत्या को लेकर बोले श्री श्री रविशंकर, कहा- आध्यात्म की कमी है आत्महत्या की वजह

आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने आज कहा कि ‘आध्यात्म’ की कमी किसानों की खुदकुशी का एक कारण है।
Author नई दिल्ली | April 28, 2017 22:20 pm
आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर। (फाइल फोटो)

आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने आज कहा कि ‘आध्यात्म’ की कमी किसानों की खुदकुशी का एक कारण है। यहां आयोजित एक कार्यक्रम में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान किसानों की खुदकुशी के बारे में पूछे गए एक सवाल में जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘हमने विदर्भ के 512 गांवों में पदयात्रा की है और उस आधार पर हम कह सकते हैं कि केवल गरीबी किसानों की खुदकुशी का कारण नहीं है। उनमें आध्यात्म की भी कमी होती है। आध्यात्मिक गुरच्च् ने कहा, ‘इसलिए मैं इस क्षेत्र (आध्यात्म) में काम करने वाले सभी लोगों से किसानों तक पहुंचने का आग्रह करता हूं। उन्होंने कहा कि किसानों में आत्महत्या की मनोवृत्ति को खत्म करने के लिए योग और प्राणयाम जरूरी है।

गौरतलब है कि आए दिन ही किसानों की आत्महत्या की खबरें सुनने को मिलती हैं। वहीं दूसरी ओर जनवरी में आए राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार साल 2015 में सूखे और कर्ज के कारण 12602 किसानों और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या कर ली थी। 30 दिसंबर को जारी की गई ‘एक्सिडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड इन इंडिया 2015’ नामक रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 के मुकाबले 2015 में किसानों और कृषि मजदूरों की कुल आत्महत्या में दो फीसदी की बढ़ोतरी हुई। साल 2014 में कुल  12360 किसानों और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की थी।

साल 2014 और 2015 दोनों ही साल देश के बड़ा हिस्सा सूखे से प्रभावित रहा। देश के कई बड़े राज्यों को सूखा पीड़ित घोषित किया गया। इन मौतों में करीब 87.5 फीसदी केवल देश के सात राज्यों में हुई हैं। आत्महत्या के मामले में सबसे ज्यादा खराब स्थिति महाराष्ट्र की रही। राज्य में साल 2015 में 4291 किसानों ने आत्महत्या कर ली। महाराष्ट्र के बाद किसानों की आत्महत्या के सर्वाधिक मामले कर्नाटक (1569), तेलंगाना (1400), मध्य प्रदेश (1290), छत्तीसगढ़ (954), आंध्र प्रदेश (916) और तमिलनाडु (606) में सामने आए।

साल 2015 में कृषि सेक्टर से जुड़ी 12602 आत्महत्याओं में 8007 किसान थे और 4595 कृषि मजदूर। साल 2014 में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 5650 और कृषि मजदूरों की 6710 थी। इन आंकड़ों के अनुसार किसानों की आत्महत्या के मामले में एक साल में 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वहीं कृषि मजदूरों की आत्महत्या की दर में 31.5 फीसदी की कमी आई है।

रिपोर्ट में उन सभी किसान माना गया है जिनके पास अपना खेत हो या लीज पर खेत लेकर खेती करते हैं। रिपोर्ट में उन लोगों को कृषि मजदूर माना गया है जिनकी जीविका का आधार दूसरे खेतों पर मजदूर के रूप में काम करना है। रिपोर्ट में किसानों और कृषि मजदूरों की आत्महत्या के पीछे कारणों का भी विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार किसानों, कृषि मजदूरों की आत्महत्या के पीछे कंगाली, कर्ज और खेती से जुड़ी दिक्कतें प्रमुख वजहें रहीं। इन तीन कारणों से करीब 38.7 फीसदी किसानों ने आत्महत्या की। आंकड़ों के अनुसार आत्महत्या करने वाले 73 फीसदी किसानों के पास दो एकड़ या उससे कम जमीन थी।

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  1. Rabindra Nath Roy
    Apr 29, 2017 at 11:30 pm
    रविशन्कर जी, आपका जवाब नही, दिल्लली मे जमुना किनारे बिश्व सान्स्क्रितिक मन्च लगाकर आपने जितना उल्टा पुल्टा काम किया और अब आप अदालत से नोटिश पर जवाब देने कॉ बाध्य मानते हैं या नही आप या अदालत ही जाने लेकिन आपने ये बात साबित कर दिया है के आपका जीने की कला है अपराध करॉ लेकिन अपने आप कॉ अपराधी मत समझॉ. छॉडिये उन बातो को, गान्धी जी ने भी महशुस किया था कि भुखे के पास भगवान कॉ आना पडे तो उन्हे भी रॉटी के रुप मे ही आना पडेगा, और ये बात भी ी है कि भुख़े भजन न हॉही गॉपाला. स्वामी बिवेकानन्द ने भी इस बात से इनकार नही किया है कि ईश्वर भुखॉ के लिये कॉइ मायने नही रखता, ईश्वर कॉ भी भुखे के सामने रॉटी का स्वरुप लेकर आना पडेगा . और एक आप है कि अनाप सनाप बके जा रहे है . अ‍ध्यात्मबाद के नाम पर उन किसानॉ की खुदकुशी का मजाक उडा रहे है. अ‍ॅगर आपकी बा त ी है तो फिर किसने मना किया है उन्हे अध्यात्मवाद की शिक्शा देने कॉ . मोदी जी तॉ आपके करीबी है क्यॉ नही आप उनकी मदद लेते है?
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    1. M
      manish agrawal
      Apr 28, 2017 at 10:33 pm
      Ravi Shankarji ! aap corporate world ke so called spiritual leader hain !aap billionaires main uthte bethte hain, apko kya pata ki ek kisaan, subah 4 baze se shaam tak kaise kheti ke kaam main laga rahta hai.saare kaam,ghar gruhasthi, bimaari sabhi se ladna padta hai . Yog aur Pranaayam WELL OFF public ke chochle hain. kisaan ke paas itni fursat nahi hoti ki inme time kharch kare. aap Rishi Muni parampara ke Adhyaatmik Guru nahi balki Air Conditioned bungalows aur Luxury Cars ki culture ke spiritual leader hain ! kisi din tapti huyi dhoop main, kisi kisaan ke sath uske khet main 8 hours kaam karke dekh lena, saara Yog aur Pranaayam bhool jaayenge ! jab jeevan ki requirements easily poori hoti hain tabhi Yog aur Pranaayam ki luxury pasand aati hai !Aap ke liye Yog aur Pranaayam sirf ek profession hai, crores of rupees chhaapne wali industry hai aur kuchh nahi ! jis din kisaan ko krushi ka sahi daam milne lagega, jis din mediators khatm ho jaayenge,kisaan ki suicides bhi band ho jaayengi
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