ताज़ा खबर
 

गांवों में सुविधाओं का अभाव, सरकार बोली- वैक्सीन के लिए कॉमन पोर्टल पर कराएं रजिस्ट्रेशन

वैक्सीनेशन में टॉप-5 में आने वाले महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल, जहां कम से कम एक डोज़ वैक्सीन दी गई है, वहां भी कॉमन सर्विस सेंटरों के जरिए कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने वालों का प्रतिशत अधिकतम 0.1 और न्यूनतम 0.02 के बीच है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार लगभग तीन लाख कॉमन सर्विस सेंटरों में सिर्फ 54,460 ही सक्रिय हैं। (फोटो – पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों सरकार से पूछा था कि गांवों में रहने वालों के लिए कोविड वैक्सीन की क्या व्यवस्था है? केंद्र सरकार ने जवाब दिया था कि कस्बों और गांवों में रहने वाले लोग कोविन पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कॉमन सर्विस सेंटरों की मदद ले सकते हैं।

हालांकि सच्चाई यह है कि अधिकांश जनसुविधा केंद्र निष्क्रिय हैं। सबसे बड़ी बात कि इनको पहले से कोविन पोर्टल से लिंक ही नहीं किया गया था। ये केंद्र इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इनफॉरमेशन टेक्नॉलजी मंत्रालय चलाती है। ये लोगों को आधार और बैंक एकाउंट जैसी डिजिटल सुविधाओं में मदद करते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार  लगभग तीन लाख केंद्रों में सिर्फ 54,460 ही सक्रिय हैं। इन सक्रिय केंद्रों ने मात्र 1.7 लाख लोगों के पंजीकरण कोविन पोर्टल पर किए है, जबकि टारगेट आबादी 17 करोड़ है। मतलब, लगभग 0.1 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन।

वैक्सीनेशन में टॉप-5 में आने वाले महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल, जहां कम से कम एक डोज़ वैक्सीन दी गई है, वहां भी कॉमन सर्विस सेंटरों के जरिए कोविन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने वालों का प्रतिशत अधिकतम 0.1 और न्यूनतम 0.02 के बीच है। वहीं झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहां कस्बाई और ग्रामीण आबादी काफी ज्यादा है, वहां भी इन केंद्रों के जरिए हुए कोविन पंजीकरणों की संख्या नगण्य—एक प्रतिशत है।

ये आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि कॉमन सर्विस सेंटर कोरोना की दूसरी लहर के पहले से वैक्सीनेशन प्रक्रिया के नेटवर्क में नहीं हैं। यह तब है जब सब लोग जानते हैं कि इन केंद्रों की क्षमता अपार है। नेशनल हेल्थ अथारिटी के सीईओ आरएस शर्मा का मानना है कि ये केंद्र बहुत ख़ास हैं। कोविन प्लेटफॉर्म इसी एजेंसी के तहत काम करता है। शर्मा कहते हैं कि कोविन पोर्टल इस तरह बनाया गया है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों का पंजीकरण किया जा सके। इसीलिए एक स्मार्टफोन से चार रजिस्ट्रेशनों की अनुमति दी गई है। यहां तक कि लाभार्थी बिना किसी औपचारिकता के सीधे भी आ सकता है।

आरएस शर्मा ने कॉमन सर्विस सेंटरों के बेअसर होने का कारण कई राज्यों में लॉकडाउन और कर्फ्यू को बताया है। जानकारी के अनुसार इन केंद्रों को 18-44 आयुवर्ग के लोगों के रजिस्ट्रेशन के बारे में तीन हफ्ते पहले ही सूचित किया गया। तब तक कई जगहों पर लॉकडाउन लग चुके थे। कॉमन सर्विस सेंटरों के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार त्यागी ने बताया कि कोविन पोर्टल को अभी हाल में इन सुविधा केंद्रों के साथ जोड़ा गया है। उनकी नज़र में कम पंजीकरण के पीछे लोगों में फैली भ्रामक सूचनाएं, जैसे कि वैक्सीन हानि पहुंचा सकती भी है, भी एक कारण है। इसके अलावा अफवाह टीकों की कीमतों को लेकर भी है, जैसे कि आठ लोगों का परिवार में सबको दो-टीके लगाने पर साढे छह हजार का खर्चा आएगा। सरकार के ये तर्क सिर्फ तर्क हीहै क्योंकि ज्यादातर कॉमन सर्विस सेंटर निष्क्रिय हैं।

Next Stories
1 कोरोना काल में मदद करने वालों से दिल्ली पुलिस ने की पूछताछ, कांग्रेस बोली- घृणित काम कर रही मोदी सरकार
2 कोरोना संकट के बीच भारत बायोटेक ने भेजी वैक्सीन की ‘ईदी’, रमजान में काम करने वालों को दी बधाई
3 ‘लव यू ज़िंदगी’ गा लोगों को हौसले दे रही थी कोरोना पीड़ित युवती, हार गई ज़िंदगी की जंग
ये पढ़ा क्या?
X