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LAC विवादः चीन ने तोड़ा सितंबर का इकरारनामा! पूर्वी लद्दाख में चोरी-छिपे PLA की पोजीशंस कर ली मजबूत

इसी बीच, करीब ढाई महीने के अंतराल के बाद भारत और चीन की सेनाओं ने रविवार को कोर कमांडर स्तर की नौवें दौर की वार्ता की। इसका उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ना है।

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: January 24, 2021 6:41 PM
LAC, Ladakh, India, Chinaलद्दाख में लेह और करगिल के बीच बनी दुरुस्त सड़कें। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः ताशी तोबग्याल)

LAC विवाद के मद्देनजर भारत और चीन के बीच सितंबर 2020 में एक इकरारनामा (संधि) हुआ था। दोनों ही मुल्कों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा था, “जमीनी तौर पर संवाद मजबूत करने के लिए हम गलतफहमियों और गलत फैसलों से बचेंगे और फ्रंटलाइन पर और सैनिक भेजना बंद करेंगे। क्षेत्र में अपनी स्थिति (पोजीशन) में भी बदलाव से बचेंगे और मुश्किल पैदा करने वाली ऐसी किसी भी हालत से बचेंगे।”

हालांकि, चार महीने बाद शांति बहाल करने से जुड़ी यह प्रक्रिया नाकाफी नजर आई। ऐसा इसलिए, क्योंकि अंग्रेजी न्यूज चैनल India Today की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन ने चोरी छिपे उत्तरी लद्दाख में अपनी पोजीशंस को मजबूत कर लिया है। PLA (चीन की सेना) ने दौलत बेग ओल्डी में नई पोजीशंस ले ली हैं। इतना ही नहीं, LAC के आसपास तनाव वाले क्षेत्र में सैन्य जमावड़ा कर लिया है। बता दें कि हाल ही में भारतीय वायु सेना के एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने भी हाई एल्टीट्यूड वाले इस एयरबेस पर जाकर सुरक्षा इंतजामातों का जायजा लिया था।

भारत-चीन में 9वें दौर की हुई बातः करीब ढाई महीने के अंतराल के बाद भारत और चीन की सेनाओं ने रविवार को कोर कमांडर स्तर की नौवें दौर की वार्ता की। इसका उद्देश्य पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ना है। सूत्रों ने बताया कि उच्च स्तरीय सैन्य वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के चीन की ओर स्थित मोल्दो सीमावर्ती क्षेत्र में पूर्वाह्न दस बजे शुरु हुई थी। वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14 वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन कर रहे हैं।

भारत लगातार यह कहता आ रहा है कि पर्वतीय क्षेत्र में टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और तनाव को कम करने की जिम्मेदारी चीन की है। इससे पहले, छह नवंबर को हुई आठवें दौर की वार्ता में दोनों पक्षों ने टकराव वाले खास स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने पर व्यापक चर्चा की थी। कोर कमांडर स्तर की सातवें दौर की वार्ता 12 अक्टूबर को हुई थी, जिसमें चीन ने पेगोंग झील के दक्षिणी तट के आसपास सामरिक महत्व के अत्यधिक ऊंचे स्थानों से भारतीय सैनिकों को हटाने पर जोर दिया था। लेकिन भारत ने टकराव वाले सभी स्थानों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया एक ही समय पर शुरू करने की बात कही थी।

पूर्वी लद्दाख में विभिन्न पवर्तीय क्षेत्रों में भारतीय थल सेना के कम से कम 50,000 जवान युद्ध की तैयारियों के साथ अभी तैनात हैं। दरअसल, गतिरोध के हल के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की वार्ता में कोई ठोस नतीजा हाथ नहीं लगा है। अधिकारियों के अनुसार चीन ने भी इतनी ही संख्या में अपने सैनिकों को तैनात किया है।

पिछले महीने, भारत और चीन ने भारत-चीन सीमा मामलों पर ‘परामर्श एवं समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र’ (डब्ल्यूएमसीसी) ढांचा के तहत एक और दौर की राजनयिक वार्ता की थी, लेकिन इस वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था। छठें दौर की सैन्य वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने अग्रिम मोर्चों पर और सैनिक नहीं भेजने, जमीनी स्थिति में बदलाव करने के एकतरफा प्रयास नहीं करने तथा विषयों को और अधिक जटिल बनाने वाली किसी भी गतिविधि से दूर रहने सहित कई फैसलों की घोषणा की थी। (भाषा इनपुट्स के साथ)

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