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JK: आतंकी हमले में जख्मी मजदूर ने सुनाई आपबीती, ‘एक के बाद एक, लाशें गिरती गईं…पता नहीं मैं कैसे जिंदा रह गया था’

जहीरुद्दीन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, 'हम उस वक्त कमरे में थे जब बंदूकधारी घर के बाहर आ गए और सभी को सीढ़ियों से नीचे उतरकर आने को कहा। इनमें से तीन बंदूकधारी पहले से घर के बाहर हमारा इंतजार कर रहे थे। घर से बाहर निकाल कर हमें करीबी इलाके में ले जाया गया और एक लाइन में खड़े होने को कहा। इसके बाद उन्होंने हम पर गोलीबारी शुरू कर दी। एक के बाद एक लाशें जमीन पर गिरती गईं। मुझे नहीं पता मैं जिंगा कैस बच गया।'

Author कुलगाम, मुर्शिदाबाद | Updated: October 31, 2019 9:36 AM
kulgam terror attackकुलगाम में प्रवासी मजदूरों को सांत्वना देता एक सैनिक। (Shuaib Masoodi)

Atri Mitra, Adil Akhzer

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में जब आतंकियों द्वारा चलाई गईं गोलियों की बौछार खत्म हुई तब पश्चिम बंगाल के जहीरुद्दीन (25) को वहीं मरने के लिए छोड़ दिया गया। मगर मुर्शीदाबाद के सागरदिघी स्थित अपने घर वापस लौटे जहीरुद्दीन आतंक की उस खौफनाक वारदात में खुद के जिंदा होने की कहानी पत्नी को बताने के लिए जिंदा थे। बता दें कि बुधवार सुबह इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। करीब दो महीना पहले प्रमिता बीबी से विवाह करने वाले जहीरुद्दीन कश्मीर में फसल के मौसम (अक्टूबर-दिसंबर) के दौरान सेब के बागों और धान के खेतों में काम करने के लिए गए थे। मगर वह खुद और गांव से आए अपने साथियों के साथ मंगलवार को आंतकियों का निशाना बन गए। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त होने के बाद दक्षिणी कश्मीर में बाहर कश्मीरियों पर ये छठा हमला था।

जहीरुद्दीन पश्चिम बंगाल के उन छह मजदूरों में से एक थे, जिन्हें कुलगाम जिले में आतंकवादियों द्वारा किराए के घर से बाहर निकाला गया और गोलियों भून दिया गया। इनमें से पांच लोग मुर्सलीन शेख, कमरुद्दीन शेख, राफीक शेख, निजामुद्दीन शेख और रफीक-उल शेख (सभी सागरदिघी निवासी थे।) की मौत हो गई जबकि तब जहीरुद्दीन की जान किसी तरह बच गई थी।

गंभीर अवस्था में जहीरुद्दीन को श्रीनगर के एसएमएचएस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने मौत से पहले अपनी पत्नी और मां से बात की और मंगलवार रात करीब आठ बजे उस भयानक मंजर को बताया जब आतंकियों ने उनपर हमला कर दिया। प्रमिता ने बताया जहीरुद्दीन की दोनों टांगों और दाएं फेफड़े पर गोली लगी हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि अब उनकी हालत कैसी है। मगर उन्होंने मुझे बताया कि वो बहुत पीड़ा में थे और खुद को हिला भी नहीं सकते थे।’

जहीरुद्दीन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, ‘हम उस वक्त कमरे में थे जब बंदूकधारी घर के बाहर आ गए और सभी को सीढ़ियों से नीचे उतरकर आने को कहा। इनमें से तीन बंदूकधारी पहले से घर के बाहर हमारा इंतजार कर रहे थे। घर से बाहर निकाल कर हमें करीबी इलाके में ले जाया गया और एक लाइन में खड़े होने को कहा। इसके बाद उन्होंने हम पर गोलीबारी शुरू कर दी। एक के बाद एक लाशें जमीन पर गिरती गईं। मुझे नहीं पता मैं जिंगा कैस बच गया।’

जहीरुद्दीन ने अपनी पत्नी को बताया, ‘संयोग से मैं लाशों के ढेर में सबसे नीचे था और सिर्फ मेरा पैर दिख रहा था।’ जहीरुद्दीन के ऊपर जो लोग थे वो सभी मारे गए। बता दें कि जहीरुद्दीन और अन्य पांच मृतकों के अलावा अन्य और लोग भी कुलगाम में काम कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है।

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