13 मई 2026 को मणिपुर के कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव के चलते दोनों पक्षों के दर्जनों ग्रामीणों का अपहरण कर उन्हें बंधक बना लिया गया था। दिनभर चले गतिरोध के बाद, दोनों पक्षों ने 15 मई की सुबह 14-14 बंधकों को रिहा कर दिया था। हालांकि, 6 पुरुषों का नाम रिहा किए गए लोगों में शामिल नहीं था। नागा समूहों का आरोप है कि उन्हें कुकी समूहों ने बंधक बना लिया था जबकि कुकी समूहों का कहना है कि उन्होंने सभी बंधकों को रिहा कर दिया है और इन 6 लोगों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
सुरक्षा बल अब उन्हें खोजने के लिए तलाशी अभियान चला रहे हैं, वहीं नागा समूहों का कहना है कि जब तक इन छह लोगों का पता नहीं चल जाता, वे 14 कुकी पुरुषों को बंधक बनाए रखेंगे।
12 मई को थिउमाई परिवार अपने पैतृक गांव में अपने सबसे छोटे भाई पैशो की शादी का जश्न मनाने के लिए इकट्ठा हुआ था। अगली सुबह जब शादी के बाद लोग वहां से निकले तो वे मणिपुर में तीन चर्च नेताओं की मौत के बाद हुए सामूहिक अपहरणों की चपेट में आ गए। एक हफ्ते बाद भी, दूल्हे के दो बड़े भाइयों का कोई पता नहीं चल पाया है।
दूल्हे के परिवार के तीन सदस्य लापता
दूल्हे के परिवार के तीन सदस्य लापता हैं- उनके भाई मनु थिउमाई जो पास के लेइमाखोंग में एक बैपटिस्ट चर्च में पादरी हैं और वहां एक स्कूल भी चलाते हैं, दूसरे भाई दिलीप थिउमाई जो लेइमाखोंग सैन्य स्टेशन में काम करते हैं और एक रिश्तेदार फेनरी लुंगबो। उनके भतीजे साइमन चावांग ने बताया कि उन्होंने उन्हें आखिरी बार 13 मई की सुबह देखा था।
उस सुबह, राज्य में तनाव तब बढ़ गया जब चुराचंदपुर से कांगपोकपी जाते समय थाडौ बैपटिस्ट एसोसिएशन के तीन चर्च नेताओं की उनकी गाड़ियों पर हमला कर हत्या कर दी गई। कुकी समूहों ने आरोप लगाया कि नागा सशस्त्र समूह इसके लिए जिम्मेदार थे और इसके जवाब में उन्होंने कई नागा ग्रामीणों का अपहरण कर लिया।
नागा समूहों ने सेनापति में कुकी गांव के दो दर्जन से अधिक लोगों का अपहरण कर लिया था
कुकी समुदाय के लोग कहते हैं कि उन्हें इन पुरुषों के बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन इन तीनों पुरुषों की पत्नियां उन 14 लोगों में शामिल हैं जिन्हें बंधक बनाकर रिहा किया गया था। कोंसाखुल गांव के लोगों के अपहरण के बाद, नागा समूहों ने सेनापति में कुकी गांव के दो दर्जन से अधिक लोगों का अपहरण कर लिया था। वे अभी भी उनमें से 14 लोगों को बंधक बनाए हुए हैं।
ताफौ गांव के मुखिया लेनखोमांग चोंगलोई ने बताया कि अपहरण किए गए ज्यादातर लोग उस सुबह जंगल में लकड़ियां इकट्ठा करने के लिए गांव से निकले थे। उन्होंने कहा, “वे मणिपुर के अलग-अलग हिस्सों में हो रही घटनाओं से बेखबर सेनापति कस्बे से गुजरे। जब हमें लेइमाखोंग के पास घात लगाकर किए गए हमले और अपहरण की खबर मिली तब हमने उनसे संपर्क किया और उन्हें सतर्क और सावधान रहने को कहा। लेकिन, लौटते समय सेनापति में उन्हें पकड़ लिया गया।”
मुखिया ने कहा, “हमें ठीक से पता नहीं है कि उन्हें कहां रखा गया है लेकिन हमने सुना है कि वे अब तक सुरक्षित हैं। इस संबंध में नागरिक समाज संगठनों और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बीच चर्चा चल रही है।”
सीएम वाई खेमचंद की जनता से शांति बनाए रखने की अपील
वहीं, मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार कई लोगों के अपहरण से उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति को शांत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। कांगपोकपी और सेनापति जिलों में सशस्त्र समूहों द्वारा 13 मई को 38 से अधिक लोगों का अपहरण कर उन्हें बंधक बना लिया गया था। यह घटना कांगपोकपी में चर्च के तीन पादरियों की घात लगाकर हत्या किए जाने के कुछ घंटों बाद हुई। अधिकारियों ने बताया कि उनमें से 31 को रिहा कर दिया गया है और कई अन्य लोगों के अब भी बंधक होने के दावे किए जा रहे हैं। बयान के अनुसार, “लियांगमाई नगा परिषद और लियांगमाई नगा महिला संघ ने मुख्यमंत्री सचिवालय में सिंह से मुलाकात की और 13 मई को कांगपोकपी जिले से अज्ञात हथियारबंद लोगों द्वारा अगवा किए गए एक पादरी सहित छह लापता पुरुषों की तत्काल रिहाई की मांग की।”
बयान के अनुसार, लियांगमाई समुदाय के एक नेता ने मुख्यमंत्री वाई खेमचंद से कहा कि कोंसखुल गांव के इन छह पुरुषों की मौत भी हो गई हो, तो उनके शव अंतिम संस्कार के लिए उनके परिजनों को सौंप दिए जाएं। आदिवासी नेताओं ने मुख्यमंत्री से कांगपोकपी जिले के संवेदनशील गांवों में पुलिस बल तैनात करने की भी मांग की। सीएम सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि पुलिस और सीआरपीएफ के जवान छह लापता पुरुषों की तलाश के लिए संदिग्ध क्षेत्रों में तलाश अभियान चला रहे हैं। इस परिस्थिति में शांति बनाए रखने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार तनावपूर्ण स्थिति को शांत करने और क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।” उन्होंने सभी समुदायों से हिंसा से दूर रहने और सामान्य स्थिति बहाल करने में सरकार का सहयोग करने की अपील की। कुकी जनजातियों के शीर्ष संगठन ‘कुकी इनपी मणिपुर’ ने दावा किया कि समुदाय के 14 लोग अब भी बंधक हैं।
(भाषा के इनपुट के साथ)
