कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी KPSC की वेटरनरी डॉक्टर भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि जनवरी में वेटरनरी डॉक्टरों की भर्ती के लिए हुई KPSC परीक्षा में 14 टॉप रैंक वाले उम्मीदवारों को कथित पेपर लीक से फायदा मिला।

जांचकर्ताओं ने एक सांख्यिकीय संभावना परीक्षण किया। इसमें इन उम्मीदवारों के परीक्षा में दिए गए जवाबों का मिलान किया गया। जांच के मुताबिक, पेपर में पहले से लीक हुए सवाल मिलने की वजह से इन उम्मीदवारों को फायदा पहुंचने की संभावना सामने आई है। आरोप है कि ये सवाल KPSC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने परीक्षा से पहले लीक किए थे। यह जानकारी The Indian Express की जांच से सामने आई है।

9 जनवरी को हुई दो परीक्षाओं में इन टॉप रैंक वाले उम्मीदवारों के सही और गलत जवाबों का पैटर्न लगभग एक जैसा पाया गया। ये दोनों परीक्षाएं MCQ यानी बहुविकल्पीय सवालों पर आधारित थीं। एक सामान्य योग्यता और दूसरी वेटरनरी साइंस की विशेषज्ञता से जुड़ी थी। जांच में यह भी सामने आया कि इन 14 उम्मीदवारों के पास परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक हुआ प्रश्नपत्र पहुंचने की 99 फीसदी संभावना थी। हालांकि, जांचकर्ताओं ने इसे प्रारंभिक संकेत माना है, अंतिम सबूत नहीं।

यह सांख्यिकीय टेस्ट (Probability Test) कर्नाटक पुलिस की सीआईडी टीम ने किया है, जो KPSC भर्ती घोटाले की जांच कर रही है। आरोप है कि बिचौलिया बसवराज कनाले ने करीब 20 उम्मीदवारों से 20 से 40 लाख रुपये तक लिए थे। इसके बदले उन्हें कथित तौर पर लीक हुए सवाल उपलब्ध कराने थे। जांच के मुताबिक, ये सवाल 7 जनवरी को KPSC के परीक्षा नियंत्रक और IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के जरिए कथित तौर पर लीक हुए थे।

गंगवार को 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। इसके चार दिन बाद बिचौलिया बसवराज कनाले को भी गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, अभी तक किसी भी उम्मीदवार को गिरफ्तार नहीं किया गया है। बताया गया है कि कम से कम 10 उम्मीदवारों ने लीक हुए सवाल पाने के लिए पैसे देने की बात कबूल कर ली है और अब वे सरकारी गवाह बन गए हैं।

इस टेस्ट के अनुसार, 95 फीसदी या उससे ज्यादा का मिलान का मतलब है कि संबंधित उम्मीदवारों की उत्तर-कुंजी में लगभग हूबहू समानता है। वहीं, 99.6 से 100 फीसदी तक का मिलान मिलने पर जांचकर्ताओं के अनुसार धोखाधड़ी की संभावना को सांख्यिकीय रूप से लगभग निश्चित माना जाता है।

कर्नाटक सीआईडी (CID) पहले भी इस टेस्ट का इस्तेमाल कर चुकी है। 2021 में पुलिस भर्ती बोर्ड की सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के टॉप रैंकर्स की जांच के दौरान यह टेस्ट किया गया था। इसमें तीन उम्मीदवारों के बारे में सामने आया कि उनके बाहरी मदद मिलने की संभावना 100 फीसदी थी। इस मामले में कुल 52 आरोपी हैं और केस की सुनवाई अदालत में चल रही है। ऐसे टेस्टों का इस्तेमाल बैंकिंग परीक्षाओं में नकल का पता लगाने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनेल सिलेक्शन (IBPS) द्वारा भी आमतौर पर किया जाता है।

सूत्रों ने बताया है कि आजकल परीक्षाओं में नकल की पहचान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद से प्रोबेबिलिटी टेस्ट किए जा सकते हैं। इस मामले (veterinarians) में प्रोबेबिलिटी टेस्ट के निष्कर्ष जांच से मेल खाते हैं। शीर्ष 14 रैंक हासिल करने वाले 10 उम्मीदवार पहले ही यह स्वीकार कर चुके हैं कि वे उस रैकेट का हिस्सा थे, जिसमें पहले से प्रश्न हासिल करने के लिए उन्होंने बड़ी रकम का भुगतान किया था।

जांच में सीआईटी ने पाया कि शीर्ष 14 उम्मीदवारों में शामिल अन्य चार उम्मीदवारों ने भी कथित तौर पर लीक हुए प्रश्न हासिल किए थे, हालांकि उन्होंने जांचकर्ताओं के सामने इसे स्वीकार नहीं किया है।

जांच के बाद KPSC ने भर्ती परीक्षा के परिणाम रोक दिए थे। यह जांच 24 जुलाई को दर्ज FIR के आधार पर की जा रही है। FIR तत्कालीन KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार और दो अन्य सदस्यों के खिलाफ उन अभ्यर्थियों की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि 2024 में घोषित 400 पदों पर चयन के लिए उन्हें गलत तरीके से बाहर कर दिया गया।

KPSC और साहूकार इस भर्ती घोटाले पर द इंडियन एक्सप्रेस की इस महीने की शुरुआत में प्रकाशित जांच-पड़ताल वाली रिपोर्टों की एक सीरीज के केंद्र में रहे हैं। अखबार की जांच में सामने आया कि ये घोटाले साहूकार के कार्यकाल के दौरान हुई अनियमितताओं के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा थे। साहूकार को 2019 में भाजपा ने KPSC के लिए चुना था और 2023 में कर्नाटक में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने उन्हें संरक्षण दिया।

द इंडियन एक्सप्रेस की संबंधित जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि नौकरी के अभ्यर्थियों ने जिन कथित अनियमितताओं की शिकायत की, उनमें अंक रोकना, शीर्ष स्कोर करने वाले अभ्यर्थियों से रिश्वत मांगना, इंटरव्यू पैनल में हेरफेर, टेबुलेशन रिकॉर्ड में बदलाव, उत्तर पुस्तिकाओं से छेड़छाड़ और चुनिंदा अभ्यर्थियों के लिए प्रश्नपत्र लीक करना शामिल थे। साहूकार को 25 अगस्त को KPSC द्वारा उनकी अपनी बेटी की कथित अवैध भर्ती से जुड़े एक अलग घोटाले में निलंबित कर दिया गया था।

प्रोबेबिलिटी टेस्ट से यह भी संकेत मिला है कि तीन अन्य अभ्यर्थियों, जिनमें साहूकार से जुड़े एक अभ्यर्थी भी शामिल हैं। उनको 9 जनवरी को हुई प्रवेश परीक्षा के दो पेपरों में से एक जनरल प्रोफिशिएंसी पेपर के प्रश्न पहले ही मिल गए थे।

प्रोबेबिलिटी टेस्ट में क्या सामने आया?

मुख्य श्रेणी में दूसरे, चौथे, पांचवें, छठे, सातवें, नौवें और दसवें स्थान पर रहे अभ्यर्थियों के सही और गलत किए गए उत्तरों में 100 प्रतिशत समानता पाई गई। वहीं, बैकलॉग (pending exams) श्रेणी में पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे अभ्यर्थियों के दोनों प्रवेश परीक्षा पेपरों के उत्तरों में भी 100 प्रतिशत समानता मिली।

टेस्ट में मुख्य श्रेणी के पहले, तीसरे, आठवें और 12वें रैंक वाले अभ्यर्थियों के मामले में नकल की संभावना का 99 प्रतिशत मैच सामने आया। सूत्रों के मुताबिक, इन अभ्यर्थियों ने बड़े रैकेट का हिस्सा होने की बात स्वीकार नहीं की, लेकिन सीआईडी की जांच ने टेस्ट के निष्कर्षों की पुष्टि की है। जांच के अनुसार, इन चारों ने दोनों प्रवेश परीक्षा पेपरों में कथित तौर पर नकल की।

इन निष्कर्षों का उल्लेख मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट में तीसरे स्थान पर रहने वाली अभ्यर्थी की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान किया गया। 29 वर्षीय पशु चिकित्सक ने परीक्षा में 486.75 अंक यानी 81.12 प्रतिशत हासिल किए थे। विशेष लोक अभियोजक बी. एन. जगदीश ने हाईकोर्ट को बताया कि वह एक औसत छात्रा थीं।

विशेष लोक अभियोजक (SPP) ने दलील के दौरान कहा कि नेगेटिव मार्किंग के बावजूद उन्होंने 486 अंक हासिल किए। एक पेपर में उन्होंने 95 सवाल हल किए, जिनमें 89 सही और छह गलत थे। दूसरे पेपर में उन्होंने 91 सवाल हल किए, जिनमें 83 सही और आठ गलत थे।

हाईकोर्ट को बताया गया कि विश्लेषण में पाया गया कि अभ्यर्थी ने जिन सवालों के जवाब गलत दिए, उन्हीं सवालों के जवाब अन्य सफल अभ्यर्थियों ने भी गलत दिए थे, जिन पर धोखाधड़ी का संदेह है। अभियोजन के मुताबिक, उन्होंने उन्हीं सवालों को चुना और उन्हीं के जवाब गलत दिए। इससे संदेह पैदा होता है।

विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि 10 शीर्ष रैंक वाले अभ्यर्थियों ने परीक्षा से पहले 8 और 9 जनवरी को प्रश्न उपलब्ध कराए जाने की बात स्वीकार करने के बाद सरकारी गवाह बनने की पेशकश की। इसी वजह से उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सवाल किया कि तीसरे रैंक वाले अभ्यर्थी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, जबकि वह मामले में सरकारी गवाह नहीं बनी हैं, जैसा कि अन्य 10 अभ्यर्थियों ने किया है। जांच में सामने आया है कि बैकलॉग श्रेणी में शीर्ष तीन स्थान हासिल करने वाले और मुख्य श्रेणी में शीर्ष 11 में रहने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश परीक्षा से पहले उसके प्रश्न मिल गए थे।

कुल 1,400 अभ्यर्थी 400 पदों के लिए परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से 329 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। 56 बैकलॉग श्रेणी में और 273 मुख्य श्रेणी में। सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ताओं को संदेह है कि गंगवार और कन्नाले ने बड़ी रकम देने वाले अभ्यर्थियों को अधिक प्रश्न लीक किए, जबकि जिन लोगों ने अन्य माध्यमों से संपर्क किया, उन्हें कम प्रश्न दिए गए होंगे।

हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों में मुख्य और बैकलॉग श्रेणी के रैंकधारकों के अंकों और कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्रों के लिए दी गई रकम का भी उल्लेख है।

बैकलॉग श्रेणी: शीर्ष तीन अभ्यर्थियों ने क्रमशः 600 में से 481.5 (80.5%), 411.75 (68.62%) और 400.5 अंक (66.75%) हासिल किए। आरोप है कि उन्होंने बिचौलिए और उसके सहयोगियों को कुल 50 लाख रुपये दिए।

मुख्य श्रेणी: चौथे, पांचवें, छठे और 13वें स्थान पर रहे अभ्यर्थियों ने क्रमशः 483.75 (80.62%), 483 (80.5%), 471.5 (78.50%) और 443.25 अंक (73.87%) हासिल किए। आरोप है कि इन चारों ने लीक हुए प्रश्नपत्रों के लिए कुल 77 लाख रुपये दिए।

केस के दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य श्रेणी में पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाले अभ्यर्थियों ने क्रमशः 493.5 (82.25%) और 487.50 अंक (81.25%) हासिल किए।

केस रिकॉर्ड के अनुसार, दूसरे स्थान वाले अभ्यर्थी ने नकल की बात स्वीकार कर ली है, जबकि पहले और तीसरे स्थान वाले अभ्यर्थियों की जांच चल रही है। सातवें और दसवें स्थान वाले अभ्यर्थियों ने भी कथित तौर पर अज्ञात रकम का भुगतान किया और क्रमशः 468.75 (78.12%) और 458.25 अंक (76.37%) हासिल किए।

सीआईडी जांच में अब तक सामने आया है कि कम से कम 11 अभ्यर्थियों ने कथित बिचौलिए कन्नाले को कुल 1.52 करोड़ रुपये की रिश्वत दी। ताकि परीक्षा के प्रश्न हासिल किए जा सकें। आरोप है कि ये प्रश्न परीक्षा नियंत्रक (Exams Controller) गंगवार ने लीक किए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में गंगवार और कन्नाले को गिरफ्तार किया है। मंगलवार को ईडी को कन्नाले की 14 दिन की हिरासत मिली।

हाई कोर्ट ने 21 सितंबर को KPSC की दो अलग-अलग भर्ती गड़बड़ियों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया था। एक पशु चिकित्सकों की भर्ती से जुड़ी और दूसरी साहूकार की बेटी की कथित अवैध भर्ती से संबंधित। कांग्रेस शासित राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार का तर्क है कि SIT के अधिकारियों के चयन में सरकार से राय नहीं ली गई।

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