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कौन हैं राजीव कुमार? जिनके लिए ममता बनर्जी ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ खोल दिया मोर्चा

पश्चिम बंगाल कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी कुमार ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए पिछले दिनों कोलकाता आए चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था।

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों की एक टीम चिटफंड घोटालों के मामलों में पूछताछ की खातिर कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के आवास पर पहुंची। वहां मौजूद कर्मियों ने सीबीआई टीम को आवास में दाखिल होने से रोक दिया। उन्हें हिरासत में ले लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया। इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्काल प्रेस कांफ्रेंस करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। ममता बनर्जी अपने राज्य के पुलिस कमिश्नर का बचाव करते हुए धरने पर बैठ गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिस पुलिस कमीश्नर की वजह से ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है, वो 1989 बैच के आईपीएस ऑफिसर हैं।

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, राजीव कुमार को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। राजीव कुमार 2013 में सारदा चिटफंड घोटाला मामले की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम के प्रमुख थे। उनके उपर जांच के दौरान धांधली का आरोप लगा है। एसआईटी के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन गुप्ता और उनके सहयोगी देवयानी को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से एक डायरी मिली थी। कथित तौर पर इस डायरी में चिटफंड कंपनी से रुपये लेने वाले नेताओं के नाम थे। आरोप है कि राजीव कुमार ने इस डायरी को गायब कर दिया था, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने राजीव कुमार को आरोपी बनाया था।

धरने पर बैठी ममता बनर्जी के साथ पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार। (Photo: ANI)

सीबीआई ने शनिवार को दावा किया था कि कुमार ‘‘फरार’’ चल रहे हैं और शारदा एवं रोज वैली चिटफंड घोटालों के सिलसिले में उनकी ‘‘तलाश’’ की जा रही है। सीबीआई के मुताबिक, चिटफंड घोटालों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा गठित एसआईटी की अगुवाई कर चुके आईपीएस अधिकारी कुमार से गायब दस्तावेजों और फाइलों के बाबत पूछताछ करनी है, लेकिन उन्होंने जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए जारी नोटिसों का कोई जवाब नहीं दिया है। सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल कैडर के 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी कुमार ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए पिछले दिनों कोलकाता आए चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था।

हालांकि, रविवार को कोलकाता पुलिस ने एक बयान जारी कर उन खबरों को सिरे से खारिज किया था कि कुमार ड्यूटी से गायब हैं। पुलिस ने अपने बयान में कहा था, ‘‘कृपया गौर करें कि कोलकाता के पुलिस आयुक्त न केवल शहर में उपलब्ध हैं बल्कि नियमित आधार पर दफ्तर भी आ रहे हैं। सिर्फ 31 जनवरी 2019 को वह दफ्तर नहीं आए, क्योंकि उस दिन उन्होंने अवकाश लिया था। सभी संबंधित पक्ष कृपया गौर करें कि यदि उचित जांच के बगैर कोई खबर फैलाई जाती है तो कोलकाता पुलिस, कोलकाता के पुलिस आयुक्त एवं कोलकाता पुलिस दोनों की मानहानि के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी।’’ (एजेंसी इनपुट के साथ)

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