कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से अस्थायी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने जांच एजेंसी से कहा है कि वह अगले दो हफ्ते तक अभिषेक बनर्जी के खिलाफ दबाव डालने वाली कोई भी कार्रवाई न करे।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जांच एजेंसी को कोई पूछताछ करनी है तो उसे 24 घंटे का नोटिस जारी करना होगा।
हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को आज (गुरुवार) CID ऑफिस जाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इसके लिए शाम छह बजे का समय निर्धारित किया है। कोलकाता हाई कोर्ट के जस्टिस कौशिक चंदा ने अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया है कि वो CID के समन पर जरूर पेश हों।
क्या है फर्जी हस्ताक्षर मामला?
यह विवाद टीएमसी चीफ ममता बनर्जी द्वारा उनके कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई एक बैठक से जुड़ा है। इस मीटिंग में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नाम पर चर्चा की गई थी और इसके बाद विधानसभा सचिवालय को एक पत्र सौंपा गया, जिसपर टीएमसी के नवनिर्वाचित विधायकों के हस्ताक्षर थे।
इस पत्र में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष (कैबिनेट मंत्री के पद के समान) के रूप में समर्थन देने की पेशकश की गई थी। आरोप है कि विधानसभा सचिवालय को सौंपे गए इस पत्र पर कई विधायकों के हस्ताक्षर उनकी अनुपस्थिति के बावजूद कर दिए गए। इन आरोपों के सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
इस मामले में CID नयना बनर्जी, बोलपुर से विधायक चंद्रनाथ सिन्हा, बेलेघाटा से विधायक कुणाल घोष और कैनिंग-पूर्व के विधायक बहारुल इस्लाम सहित एक दर्जन से अधिक टीएमसी विधायकों से पूछताछ कर चुकी है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी इस मामले को लेकर मीडिया को बताया था कि कम से कम तीन टीएमसी – बहरुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभाषिस दास – ने जांचकर्ताओं को बताया है कि हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। यह भी पता चला है कि इस्लाम उक्त तृणमूल बैठक स्थल पर मौजूद ही नहीं थे।
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टीएमसी में जारी उठापटक के बीच लगातार ममता बनर्जी के साथ दिखाई दे रहे कल्याण बनर्जी ने भी अब बगावती रुख अपना लिया है। उन्होंने ममता बनर्जी से कहा है कि या तो अभिषेक बनर्जी को रखिए या फिर मुझे छोड़ दीजिए। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
