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Zomato, Swiggy या अन्य ऐप्स से लोग क्यों मंगाते हैं खाना? डिस्काउंट नहीं है बड़ी वजह, जानें असली कारण

सर्वे में केवल 22 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ऑनलाइन खाना मंगाने के दौरान उनकी सबसे बड़ी चिंता डिलीवरी की सामयिकता होती है, जबकि 12 फीसदी लोगों ने माना कि ऐसे फूड डिलीवरी ऐप्स अधिक पैसे वसूलते हैं।

फूड ऐप्स से खाना मंगाने का सबसे बड़ा फायदा है कि इसमें बताए गए पते पर निर्धारित समय में खाना पहुंचाया जाता है। (सांकेतिक फोटो)

जोमैटो, स्विगी, ऊबर ईट्स और फूड पांडा सरीखे ऐप्स से लोग खान क्यों मंगाते हैं? इस सवाल पर ज्यादातर लोगों का जवाब रहता है कि इन ऐप्स के जरिए अच्छा डिस्काउंट मिलता है और खाना सीधे बाजार से खरीदने के मुकाबले सस्ता पड़ता है। पर हाल ही में आई एक सर्वे रिपोर्ट बताती है कि इन ऐप्लीकेशंस से ऑनलाइन खाना मंगाने के पीछे कुछ और ही वजह होती है।

‘लोकल सर्किल्स’ सर्वे के मुताबिक, 81 फीसदी लोग ऑनलाइन खाना सिर्फ और सिर्फ सहूलियत की वजह से मंगाते हैं, क्योंकि उसमें उन्हें कहीं जाना नहीं पड़ता है। खाना बताए गए पते पर डिलीवर होता है और पेमेंट के लिए कई ऑप्शन भी मिलते हैं।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि केवल 10 प्रतिशत लोग ही इन फूड डिलीवरी ऐप्स को कूपन्स और ऑफर्स के लिए इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, सर्वे में पांच फीसदी लोगों ने यह भी माना कि ऑनलाइन खाना मंगाने से उन्हें फूड आइटम्स में बेहतर विकल्प मिल जाते हैं।

वैसे, भारी संख्या में लोगों ने कहा कि ऑनलाइन खाना मंगाने के दौरान खाने की गुणवत्ता उनके लिए सबसे बड़ी चिंता होती है। सर्वे में आधे से अधिक लोगों का मानना है कि पैकेजिंग और खाना एक जगह से दूसरी जगह तक लाने की वजह से खाने की क्वालिटी खराब हो जाती है।

वहीं, 17 प्रतिशत का कहना था कि खाना लाने ले जाने और पैकिंग की वजह से उसकी गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जाता है, जबकि एक तिहाई से कम लोगों ने कहा कि रेस्त्रां पर खाना खाने पर उन्हें खाने की एक ही जैसी हालत मिलती है।

हाल ही में कुछ फूड ज्वॉइंट्स को लेकर खबरें आई थीं कि वे खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। ऐसे में जोमैटो और स्विगी ने कई रेस्त्रां को एफएसएसएआई की शिकायतों पर दोषी पाए जाने के बाद अपनी लिस्ट से हटा दिया था।

सर्वे में केवल 22 प्रतिशत लोगों ने कहा कि ऑनलाइन खाना मंगाने के दौरान उनकी सबसे बड़ी चिंता डिलीवरी की सामयिकता होती है, जबकि 12 फीसदी लोगों ने माना कि ऐसे फूड डिलीवरी ऐप्स अधिक पैसे वसूलते हैं। कई बार यूजर्स इन्हीं ऐप्स पर टैक्स और शुल्क से जुड़ी नीतियों के स्क्रीनशॉट्स लेकर सवालिया निशान उठाते हैं। मोटा-मोटी सर्वे बताता है कि फूड ऐप्स से खाना मंगाने पर ज्यादातर लोग संतुष्ट तो रहते हैं पर वे खाने की गुणवत्ता और पैकिंग जैसी चीजों के और बढ़िया होने की उम्मीद करते हैं।

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