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20 करोड़ से ज्यादा लड़कियों का हो चुका है खतना: जान‍िए Female Genital Mutilation क्‍या है और क्‍यों है व‍िवाद

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अफ्रीका और एशिया के करीब 30 देशों में 20 करोड़ से ज्यादा लड़कियों का खतना हो चुका है।

Author Updated: May 17, 2017 12:59 PM
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

आठ मई को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के चार मंत्रालयों से “महिलाओं के खतना” पर उनकी राय मांगी। महिलाओं के जननांग के खतना (Female Genital Mutilation) की प्रथा एशिया और अफ्रीका के बहुत से देशों में व्याप्त है, खासकर बोहरा समुदाय में। भारत में करीब 20 लाख बोहरा हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंत्रालयों की राय मांगने से कुछ दिन पहले अमेरिका के डेट्रायट में एक डॉक्टर को एक महिला का खतना करने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया। आम तौर पर महिलाओं का खतना करते समय उन्हें बेहोश या प्रभावित इलाके को सुन्न नहीं किया जाता और न ही कोई डॉक्टर निगरानी के  लिए मौजूद होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अफ्रीका और एशिया के करीब 30 देशों में 20 करोड़ से ज्यादा लड़कियों का खतना हो चुका है। आइए जानते हैं, क्या है ‘महिलाओं का खतना’ और इस पर क्यों विवाद है?

क्या है महिलाओं का खतना- महिलाओं का खतना करते समय उनकी योनि के बाहरी हिस्से (क्लाइटॉरिस) को आंशिक या पूरी तरह काट दिया जाता है। इस प्रथा का पालन करने वाले समुदायों का मानना है कि इससे महिलाओं की कामेच्छा नियंत्रित रहती है। अलग-अलग देशों में महिलाओं का भिन्न-भिन्न तरीके से खतना किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने महिलाओं के चार तरह के खतने को चिह्नित किया है।

पहला प्रकार- इसे क्लाइटॉरिडेक्टॉमी कहते हैं। इसमें महिलाओं के क्लाइटॉरिस को आंशिक या पूरी तरह निकाल दिया जाता है। कुछेक अपवाद मामलों में क्लाइटॉरिस को ढंकने वाले त्वचा को हटाया जाता है।

दूसरा प्रकार- इसे एक्सीजन कहते हैं। इसमें क्लाइटॉरिस और लेबिआ माइनोरा (योनि की अंदरूनी त्वचा) को आंशिक या पूरी तरह हटा दिया जाता है लेकिन इसमें लेबिआ मेजोरा (योनि की बाहरी त्वचा) नहीं हटायी जातीं।

तीसरा प्रकार- इसे इनफिबुलेशन कहते हैं। इसमें योनिमुख को संकरा बनाया जाता है। इसके लिए लेबिए माइनोरा या लेबिअ मेजोरा को काटकर दोबारा लगा दिया जाता है या कई बार योनिमुख को आंशिक रूप से सिल दिया जाता है। इनफिबुलेशन में क्लाइटॉरिडेक्टॉमी नहीं होती।

चौथा प्रकार- गैर-चिकत्सकीय कारणों से महिलाओं के जननांग में छेद करना, काटना, जलाना इत्यादि अन्य प्रकार से विकृत करने को चौथे प्रकार में रखा जाता है।

किन देशों में है ज्यादा प्रचलन- महिलाओं के खतना का सर्वाधिक प्रचलन अफ्रीकी देशों में है। अफ्रीकी देशों में इसके प्रचलन से विश्व समुदाय और विश्व स्वास्थ्य संगठन का इस पर ध्यान गया। भारत में दाऊदी बोहरा समेत अन्य बोहरा समुदायों में इसका प्रचलन है। बोहरा समुदाय की कितनी लड़कियों का खतना हुआ है इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं कि करीब 80-90 प्रतिशत बोहरा लड़कियों का खतना होता है।  भारत में बोहरा लड़कियों का केवल पहले और चौथे प्रकार का खतना होता है।

खतना से होने वाले नुकसान- खतना से महिलाओं को दो तरह के दुष्परिणाम का सामना करना होता है। एक तुरंत होने वाले नुकसान और दूसरा लंबे समय तक बने रहने वाला नुकसान। इससे महिलाओं को रक्तस्राव, बुखार, संक्रमण, सदमा जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में उनकी मृत्यु  भी हो जाती है। माना जाता है कि महिलाओं का खतन करने से उन्हें पेशाब, संभोग या प्रजनन के समय दिक्कतें होती हैं। भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने इसे महिलाओं के लैंगिक आधार पर भेदभाव कहा है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इस पर कानूनन रोक है।

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