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20 सालों में 20 बार हुई थी अटल जी की सर्जरी, लता-रफी के गाने सुनते कटता था वक्‍त, सांसदों का हंगामा देख बदलवा देते थे टीवी चैनल

साल 2008 में जब शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में एमपी में भाजपा की जीत हुई और शिवराज कुछ अन्य नेताओं के साथ उनसे मिलने आए थे तब वो नेताओं के आने से पहले ही हॉल में कुर्सी पर बैठ गए थे। इससे पहले वो नेताओं के आने के बाद हॉल में आया करते थे।

Atal Bihari Vajpayee पहली बार 1957 में संसद सदस्य चुने गए थे। (फ़ाइल फ़ोटो पीटीआई)

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद उनकी स्मृतियां शेष रह गई हैं। एक कुशल वक्ता, दमदार कवि और लोकप्रिय राजनेता के रूप में उन्होंने अपनी वाणी से सबको कायल बना लिया लेकिन जीवन के अंतिम दिनों में वो मौन रह गए। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने एक शब्द भी मुंह से नहीं निकाला था। पैरालिसिस अटैक के बाद वाजपेयी अक्सर इशारों में ही बातें किया करते थे। पिछले करीब 10-11 वर्षों से वह किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखाई दिए। 2015 में उनकी तस्वीर सामने आई थी जब उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उनके आवास पर जाकर भारत रत्न से सम्मानित किया था। आखिरी चुनावी भाषण उन्होंने साल 2007 में लखनऊ में विधान सभा चुनाव प्रचार के दौरान दिया था। बीमारी की अवस्था में पहले वाजपेयी व्हील चेयर पर दिखते थे लेकिन हाल के कुछ वर्षों में वो अक्सर 9 कृष्ण मेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में अपने बेड पर ही लेटे रहते थे। जब उनसे कोई रिश्तेदार या कोई नेता मिलने आते तो वह इशारों में बात किया करते थे।

साल 2015 में एक इंडिया टीवी को दिए एक इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने बताया था कि वाजपेयी जी के शब्द समझने अब मुश्किल हैं क्योंकि उनकी जुबान लड़खड़ाने लगी है। अटल जी स्मृति दोष (डिमेंशिया) के भी शिकार हो चले थे। वो स्पष्ट बोल सकें, इसलिए डॉक्‍टरों ने अपनी ओर से कुछ कोशिश भी की थी। इसके लिए मुंह में एक पाइप भी डाली गई थी। उस समय उनकी दिनचर्या सुबह करीब 6 बजे शुरू होती थी। 6.30 बजे फिजियोथेरेपिस्ट उन्हें एक्सरसाइज करवाने आते थे। सुबह 8 से 9 बजे के बीच उन्हें नाश्ता दिया जाता था। वह कभी कभार अखबारों की हेडलाइंस देखा करते थे या टीवी चैनल्स देखा करते थे। दिन में 11 बजे के आसपास वो सो जाया करते थे। दोपहर में भोजन करने के बाद शाम में भी जल्दी ही भोजन कर लेते थे।

वाजपेयी की दिनचर्या को लेकर काफी समय से सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं है। साल 2012 में ‘दैनिक भास्‍कर’ ने उनके कुछ नजदीकी लोगों के हवाले से इस बारे में जानकारी छापी थी। इसमें बताया गया था कि वाजपेयी अक्सर टीवी पर पुरानी फिल्में देखा करते थे और लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी के पुराने गाने सुना करते थे। वो टीवी पर संसदीय गतिविधियों को देखकर विचलित हो जाया करते थे और चैनल बदलने को कहते थे। वाजपेयी को इंडियन आइडॉल कार्यक्रम पसंद था। करीब पचास साल तक उनके सहयोगी रहे शिव कुमार के हवाले से अखबार ने बताया था कि 20 सालों में वाजपेयी जी की 20 बार सर्जरी हो चुकी थी। बतौर प्रधानमंत्री उनके मीडिया सलाहकार रहे अशोक टंडन के मुताबिक अटल जी किसी के सामने व्हील चेयर पर जाना पसंद नहीं करते थे। साल 2008 में जब शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में एमपी में भाजपा की जीत हुई और शिवराज कुछ अन्य नेताओं के साथ उनसे मिलने आए थे तब वो नेताओं के आने से पहले ही हॉल में कुर्सी पर बैठ गए थे। इससे पहले वो नेताओं के आने के बाद हॉल में आया करते थे।

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