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तो नोटबंदी की वजह से बैकों के NPA में हुई है 56.4 फीसद की बढ़ोतरी!

बैंकों के एनपीए या फिर बैड लोन्स बीते साल (दिसंबर 2016) में लगभग 56.4 फीसद बढ़ गए हैं।

इससे पहले ईपीएफओ ने अपने अंशधारकों को 50 हजार रुपये का अलग से वित्तीय लाभ दिए जाने का ऐलान किया था। (संकेतात्मक तस्वीर)

बीते कुछ सालों से बैंक के लिए ग्राहकों को दिए गए कर्ज को रीकवर करना मुश्किल होता जा रहा है। बैंकों के एनपीए या फिर बैड लोन्स बीते साल (दिसंबर 2016) के लिए अब 56.4 फीसद पर आ गए हैं। सरकारी और प्राइवेट बैंकों के बैड लोन्स अब मिलकल लगभग 6 लाख करोड़ रुपये तक हो गए हैं (आंकड़े केयर रेटिंग्स द्वारा)। वहीं माना यह भी जा रहा है कि स्थिति अभी और खराब हो सकती है। खबरों के मुताबिक इसकी वजह नोटबंदी भी बताई जा रही है। ऐसा इसलिए माना जा कहा है क्योंकि नोटबंदी ने छोटे-मंझोले कारोबारियों की कमर तोड़ दी, जिसकी वजह से अब उन्हें अपने कर्ज चुकाने में परेशानियां होंगी। बीते दो सालों में बैड लोन्स अब 135 फीसद तक पहुंच गए हैं। गौरतलब है कि आरबीआई ने बैंकों के एनपीए कम करने को लेकर कई तरह की योजनाएं भी जारी की थी लेकिन इसके बाद भी पीएसयू बैंकों के बैड लोन्स 11 फीसद पर बरकार है। स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। वहीं दिसंबर 2016 के आंकड़ों की बात करें तो देश के सरकारी और प्राइवेट बैंकों के एनपीए मिलाकर 697,409 करोड़ रुपये के हैं।

आरबीआई ने बैंकों को एनपीए-बैड लोन्स को लेकर अपनी बैलेंसशीट्स मार्च 2017 तक खत्म करने की समय सीमा दी थी लेकिन शायद ही बैंक इस समय सीमा के अंदर अपना काम पूरा कर सकें। यह कहना है नेशनलाइज्ड बैंक के पूर्व चेयरमैन का। उन्होंने आगे यह भी कहा कि नोटबंदी से बैकों पर बैड लोन्स को रीकवर करने का तनाव भी बढ़ गया है। वहीं एसबीआई के एनपीए की बात करें तो 2016 के सितंबर क्वार्टर में ये 1.06 लाख करोड़ का था जो बढ़कर 1.08 लाख करोड़ हो गया था। गौरतलब है कि देश के 5 नामी बैंकों के एनपीए का रेशो 15 फीसद से ज्यादा हो गया है जो किसी भी लिहाज से अच्छा नहीं। इन 5 बैकों में इंजियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, यूनाइटिड बैंक, आईडीबीआई और बैंक ऑफ महाराष्ट्र है।

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