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ऐसे मिलती है भारत की नागरिकता: जानिए अपने हर सवाल का जवाब

असम में एनआरसी से जुड़ा हुआ अंतिम ड्राफ्ट सोमवार (30 जुलाई) को जारी किया गया, जिसे पर खूब हो-हल्ला मचा। ऐसे में आम लोगों के बीच कुछ बुनियादी सवाल उठना लाजिमी हैं कि आखिर देश की नारिकता किसे और कैसे मिलती है।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Pixabay)

कांग्रेस की पूर्व सर्वेसर्वा सोनिया गांधी के भारतीय होने को लेकर अक्सर सवालिया निशान लगते रहे हैं। हाल ही में उनके बेटे और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भी भारतीय होने पर प्रश्न खड़े किए गए। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि राहुल ने खुद को ब्रिटिश नागरिक घोषित किया, ताकि वह विदेश में एक कंपनी चलवा सकें। वहीं, असम में एनआरसी से जुड़ा अंतिम ड्राफ्ट सोमवार (30 जुलाई) को जारी किया गया, जिस पर खूब हो-हल्ला हुआ। ऐसे में आम लोगों के बीच कुछ बुनियादी सवाल उठना लाजिमी हैं कि आखिर देश की नागरिकता किसे और कैसे मिलती है। आइए जानते हैं नागरिकता से जुड़े हर उस सवाल के जवाब, जो इस मुद्दे पर आपकी जानकारी को दुरुस्त कर देंगे।

– भारत की नागरिकता कैसे मिलती है?
गृह मंत्रालय के अनुसार, चार पैमानों पर भारत की नागरिकता मिलती है, जिसमें जन्म, पंजीकरण, वंश और रहने का आधार शामिल है। ये प्रावधान नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत धारा 3, 4, 5(1) और 5(4) में आते हैं।

1- जन्म के आधार परः 26 जनवरी 1950 या उसके बाद से 1 जुलाई 1987 के दौरान देश में पैदा हुए लोगों को उनके माता-पिता की नागरिकता का ख्याल करे बगैर भारतीय माना जाता है।

दूसरी स्थिति में भारत में जन्म लेने वाले हर उस शख्स को भारतीय माना जाता है, जो 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच पैदा हुआ है। भले ही उसके मां-बाप उसके (शख्स) जन्म के समय देश के नागरिक क्यों न हों।

3 दिसंबर 2004 या उसके बाद देश में जन्म लेने वाले लोग भी भारतीय माने जाते हैं, जिनके अभिभावक भारतीय होते हैं या फिर उनमें (माता-पिता में) से एक बच्चे के जन्म के वक्त भारतीय हो, जबकि दूसरा अवैध प्रवासी नहीं होना चाहिए।

2-पंजीकरण के आधार परः नागरिकता पंजीकरण के आधार पर भी हासिल की जा सकती है, जिसके लिए नियम निम्नवत हैं-

– भारतीय मूल का शख्स, जो देश में नागरिकता के लिए आवेदन देने के सात साल पहले तक रहा हो।

– भारतीय मूल का वह शख्स जो अविभाजित भारत के बाहर किसी देश का नागरिक हो।

– वह शख्स जिसकी शादी किसी भारतीय नागरिक से हुई हो और वह नागरिकता के आवेदन करने के सात साल पहले से देश में रह रहा हो।

– वे नाबालिग बच्चे, जिनके माता-पिता भारतीय हों।

3- वंश के आधार परः भारत के बाहर किसी भी देश में 26 जनवरी 1950 या उसके बाद जन्मा शख्स तब भारतीय माना जाएगा, जब उसके पिता नागरिकता के आधार पर भारतीय रहे हों।

भारत के बाहर 10 दिसंबर 1992 या उसके बाद से 3 दिसंबर 2004 के बीच पैदा हुआ भी भारतीय माना जाएगा। वह भी तब, जब उसके पिता जन्म से भारतीय हों।

3 दिसंबर 2004 या उसके बाद देश के बाहर पैदा हुए शख्स को नागरिकता तभी मिलेगी, जब उसके माता-पिता यह स्पष्ट करेंगे कि उनके नाबालिग बच्चे के पास किसी अन्य देश का पासपोर्ट नहीं है। साथ ही बच्चे का पंजीकरण जन्म के एक साल के भीतर भारतीय वाणिज्य दूतावास में करा लिया गया हो।

4- नागरिक बनने या रहने के आधार परः देश में रहने के आधार पर कोई भी शख्स देश की नागरिकता हासिल कर सकता है। बशर्ते वह 12 सालों तक देश में रहा हो और नागरिकता अधिनियम की तीसरी अनुसूची की सभी योग्यताओं पर खरा उतरता हो।

– क्या कोई भारतीय दो देशों की नागरिकता पा सकता है? अगर हां, तो कैसे?
संशोधित नागरिकता अधिनियम, 1955 देश के किसी भी व्यक्ति को दो देशों की नागरिकता पाने का अधिकार नहीं देता।

– नागरिकता कैसे अमान्य हो जाती है?
नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9 में इसे खत्म करने का जिक्र भी है। प्रावधान के अनुसार, भारत का कोई भी नागरिक, जो पंजीकरण या रहने के आधार पर या अन्य कारण से किसी दूसरे देश की नागरिकता पा लेता है, तब उसकी पहले देश वाली नागरिकता को अमान्य घोषित कर दिया जाता है।

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