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अर्धसैनिक बलों का खाना: जवानों को आटा, चावल और दाल ज्यादा, अफसरों को अधिक मीट, अंडा और मक्खन

जवान इस बात की अक्सर शिकायत करते हैं कि मेस के खाने में विविधता की कमी होती है। नाम न देने की शर्त पर एक सैनिक ने कहा, "अगर मीट भी पका हो तो जरूरी नहीं कि किसी दक्षिण भारतीय और पूर्वोत्तर भारतीयों को वो पसंद आए।"

बीएसएफ के जवान तेज बहादुर यादव (Source: Facebook)

जम्मू-कश्मीर में तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान तेज बहादुर यादव ने जब से फ़ेसबुक पर खराब खाना मिलने की वीडियो शिकायत की है तब से शायद पहली बार सुरक्षा बलों का खाना “राष्ट्रीय चर्चा” में आया। बीएसएफ ने तुरत-फुरत जवान की शिकायत को खारिज कर दिया लेकिन गृह मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले पर बीएसएफ को जवाब तलब किया है। आइए एक नजर डालते हैं कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) के जवानों को खाने में क्या मिलता है। सीएपीएफ में बीएसएफ के अलावा भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) इत्यादि आते हैं। इन सुरक्षा बलों को पैरामिलिट्री (अर्धसैनिक बल) भी कहते हैं।

खाने में क्या मिलता है- सीएपीएफ (बीएसएफ, आईटीबीएफ, एसएसबी, सीआरपीएफ और सीआईएसएफ) के जवानों को सुबह के नाश्ते में परांठा मिलता है। दोपहर के खाने (लंच) और राते के खाने (डिनर) में दाल, रोटी, सब्जी और चावल मिलता है। कुछेक बार रात को खाने में खीर भी मिलती है। सीएपीएफ में आप को क्या खाना मिलेगा ये इस बात पर भी निर्भर करता है आप ट्रूपर (सिपाही/सैनिक) हैं या अफ़सर। खाने में ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपकी पोस्टिंग कहां है। नौ हजार फीट से नीचे, नौ हजार फीट से ऊपर और 12 हजार फीट से ऊपर की पोस्टिंग के अनुसार जवानों और अफसरों को अलग-अलग खाना मिलता है।

नौ हजार फीट से नीचे तैनात पैरामिलिट्री ट्रूपरों को अफसरों से ज्यादा आटा, चावल और दाल मिलते हैं लेकिन मीट, अंडा और मक्खन इत्यादि अफसरों को ज्यादा मिलता है। 12 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर तैनात पैरामिलिट्री सैनिकों को सेना के जवानों के बराबर राशन मिलता है। 12 हजार फीट से ऊपर तैनात जवानों को दैनिक राशन के अलावा बादाम और काजू जैसे मेवे, चॉकलेट, नूडल्स और फ्रूट जूस भी खाने में मिलते हैं।

देखें बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव द्वारा शेयर किया गया वीडियो:

जवान इस बात की अक्सर शिकायत करते हैं कि मेस के खाने में विविधता की कमी होती है। नाम न देने की शर्त पर एक सैनिक ने कहा, “अगर मीट भी पका हो तो जरूरी नहीं कि किसी दक्षिण भारतीय और पूर्वोत्तर भारतीयों को वो पसंद आए। मैंने पूर्वोत्तर भारत के एक सैनिक को पका हुआ मीट पानी से धोकर नमक-मिर्च के साथ खाते देखा है, शायद उसे वो बहुत मसालेदार लग रहा होगा। ”

आईटीबीपी के मेस के इनचार्ज कहते हैं कि “पूरी मशीनरी को दोष देना सही नहीं है। टुकड़ियों के बड़े आकार और सैनिकों के अलग-अलग पृष्ठभूमि की वजह से भिन्न-भिन्न तरह का खाना देना संभव नहीं हो पाता। इसलिए हम एक मानक मेन्यू देते हैं। हफ्ते में तीन बार नॉन-वेज दिया जाता है।”

पढ़ेंः जानिए, कौन चलाते हैं जवानों का मेस और कैसे पहुंचता है खाना?

जवानों को मिलने वाला राशन भत्ता- अर्धसैनिक बलों को राशनभत्ते (आरएमए) के रूप में 2905 रुपये हर महीने या 95.52 रुपये प्रति दिन मिलते हैं। जवानों को 3850 कैलोरी प्रति दिन मिलना चाहिए। अर्धसैनिक बल गृह मंत्रालय के तहत आते हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार अर्धसैनिक बलों के राशन भत्ते में साल 2014 में संशोधन किया गया था। 1980 में ये 106 रुपये, 1995 में 450 रुपये और साल 2000 में 892 रुपये था।

देखें तेज बहादुर यादव द्वारा शेयर किया गया खाने का वीडियो:

गृह मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार सियाचीन और कारगिल जैसे दुर्गम इलाकों में तैनात अर्धसैनिक बलों को नियमित भत्ते के अलावा प्रति दिन 191.04 रुपये का अतिरिक्त भत्ता मिलता है। जवान हर महीने अपने राशन भत्ते को जमा करते हैं जिसे बटालियन मुख्यालय को दे दिया जाता है। उसके बाद उस पैसे को जवानों की संख्या के आधार पर अलग-अलग यूनिट को भेजा जाता है।

अर्धसैनिक बलों को मिलने वाला राशन-

paramilitary ration chart अर्धसैनिक बलों को मिलने वाला राशन। (इंडियन एक्सप्रेस)

 

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