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नीतीश कुमारः मुख्यमंत्री बनने के 2 दशक पहले ही कहा था, ‘by hook or by crook, मैं बनूंगा 1 दिन CM’

जनता दल से अलग होकर नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नाडिस के साथ मिलकर समता पार्टी का गठन किया था।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (इंडियन एक्सप्रेस)।

भारतीय राजनीति के मैदान में कई ऐसे खिलाड़ी हुए जिन्हें शुरुआती दिनों में ही सफलता मिल गयी। लेकिन कुछ ऐसे नेता हुए जिन्होंने शुरुआती असफलताओं से आगे बढ़ते हुए अपने संघर्ष के दम पर बड़े मुकाम को प्राप्त किया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन नेताओं में से हैं जो जयप्रकाश आंदोलन के बाद हुए चुनाव में भी हार गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपनी राजनीतिक कुशलता के दम पर आगे बढ़ते रहे।

नीतीश ने कहा था मैं बनूंगा मुख्यमंत्री: 1977 और 1980 में बिहार के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हारने वाले नीतीश कुमार ने उसी दौरान पटना के कॉफी हाउस में बड़े ही दावे के साथ एक पत्रकार से कहा था कि मैं बनूंगा एक दिन बिहार का मुख्यमंत्री, by hook or by crook’… उस समय उनकी बातों को स्वाभाविक रूप से गंभीरता से नहीं लिया गया होगा। लेकिन उस बयान के लगभग 2 दशक बाद उनकी बात सही हुई। नीतीश कुमार साल 2000 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने।

कुर्मी चेतना रैली ने बदल दी राजनीति: साल 1990 में लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री बनाने में नीतीश कुमार ने अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद नीतीश कुमार और लालू प्रसाद के रिश्ते खराब होने लगे थे। नीतीश कुमार ने 1994 में पटना के गांधी मैदान में कुर्मी चेतना रैली का आयोजन कर अपनी ताकत दिखायी थी। उस रैली में नीतीश कुमार ने मंच से कहा था, ‘भीख नहीं अधिकार चाहिए।’ उस रैली को लव कुश एकता का पर्याय करार दिया गया था।

सोशल इंजीनियरिंग को बनाया हथियार: नीतीश कुमार उन नेताओं में माने जाते हैं जिन्हें बिहार की सामाजिक और राजनीतिक हालात की अच्छी समझ है। नीतीश कुमार ने सरकार में आने के बाद बिहार में जातियों के बीच मौजूद उप-जातियों और उन जातियों पर फोकस किया जिनका इससे पहले कोई राजनीतिक आधार नहीं माना जाता था। नीतीश ने उन जातियों की राजनीतिक पहचान बनाकर अपने लिए एक मजूबत वोट बैंक तैयार कर लिया।

पांच विधायकों से 115 विधायकों का सफर: जनता दल से अलग होकर नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नाडिस के साथ मिलकर समता पार्टी का गठन किया था। 1995 के पहले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को अधिक सफलता नहीं मिली थी। लेकिन बाद के दिनों में शरद यादव के जनता दल युनाइटेड के साथ विलय के बाद, 2010 में एक ऐसा भी समय भी आया जब नीतीश की पार्टी के पास बिहार में 115 विधायक और लोकसभा में  20  से अधिक सांसद थे।

अपनी शर्तों पर बीजेपी से जुड़े रहे हैं नीतीश: पिछले 16 साल में कुछ दिनों को छोड़कर नीतीश कुमार लगातार बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। जिसमें एक दफे को छोड़कर हर बार उन्हें बीजेपी का साथ मिला है। लेकिन कई ऐसे मौके आए हैं जब नीतीश कुमार ने बीजेपी को आंख दिखाया है। नरेंद्र मोदी को नेता मानने से लेकर NPR के मुद्दे पर विधानसभा में प्रस्ताव पारित करवाने तक, कई मौके आए जब नीतीश ने बीजेपी की परवाह नहीं की।

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