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महाराष्ट्र में हार के बाद बीजेपी में और भड़की बगावत की आग: अध्यक्ष के सामने मंच से पंकजा मुंडे ने दिखाए तेवर, एकनाथ खड़से ने दिया साथ

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पंकजा ने बीजेपी के नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। माना जा रहा है कि पंकजा मुंडे जल्द ही बड़ा ऐलान कर सकती हैं।

परली में अपने पिता, गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर एक रैली में पंकजा मुंडे।(PTI Photo)

महाराष्ट्र में शिवसेना से गठबंधन टूटने और सरकार न बनाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीतर सियासी घमासान मचा हुआ है। पार्टी में टकराव की स्थिति खुलकर सामने आ रही है। महाराष्ट्र के बीड जिले में गोपीनाथ मुंडे की जयंती पर उनकी बेटी पंकजा मुंडे ने रैली का आयोजन किया और बागी तेवर दिखाये। इस दौरान उनका साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से भी दे रहे थे। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद पंकजा ने बीजेपी के नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। माना जा रहा है कि पंकजा मुंडे जल्द ही बड़ा ऐलान कर सकती हैं।

बीड जिले में सार्वजनिक रैली के दौरान पंकजा ने राज्य भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल की उपस्थिति में फडणवीस के खिलाफ विद्रोह का झण्डा बुलंद किया। चंद्रकांत ने इस कार्यक्रम में बात की और आश्वासन दिया था कि पार्टी में सभी आवाजें सुनी जाएंगी। वरिष्ठ नेता और पार्टी के बागी एकनाथ खड़से ने कहा कि गोपीनाथ मुंडे ने महाराष्ट्र में पार्टी की उच्च जाति-ब्राह्मण छवि को बदल और इसे व्यापक अपील दी है। पंकजा की तरह, उन्होंने भी पूर्व मुख्यमंत्री का कभी नाम नहीं लिया। बता दें कि फडणवीस एक ब्राह्मण हैं।

भाजपा का कमल चिन्ह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनर से गायब थे। यह घोषणा करते हुए कि वह मुंबई में अपने पिता के पूर्व कार्यालय से काम करना शुरू करेगी, पंकजा ने कहा कि वह 26 जनवरी से राज्यव्यापी दौरा शुरू करेगी और 27 जनवरी को औरंगाबाद में सूखे के खिलाफ धारणा देते हुए एक दिन का उपवास रखेगी।

पंकजा मुंडे ने कहा, ‘मैं हाथ में मशाल लेकर पूरे महाराष्ट्र का दौरा करूंगी। मैं दोबारा संघर्ष यात्रा निकालूंगी और बताउंगी कि मैं क्या हूं। मराठवाड़ा के लिए अनशन पर बैठूंगी। शांत बैठी हूं तो यह मत समझना कि आग नहीं है।’ पंकजा ने पार्टी से बगावत को लेकर कहा कि मेरे पिता के जाने के बाद आज भी उनकी यादें आम लोगों के दिलों में हैं। मेरे अंदर भी उनका ही खून है, इसलिए मैं कभी पार्टी से बगावत नहीं कर सकती। यह पार्टी किसी एक की नहीं है। हमारे खून में गद्दारी नहीं है। मैं पार्टी नहीं छोड़ रही, अगर पार्टी चाहे तो कोई भी निर्णय ले सकती है।’

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