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किसान आंदोलन: पूर्व फौजी से डॉक्टर तक- जानिए सरकार से वार्ता में बैठे कौन 35 लोग

बोघ सिंह मंसा (68) भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं। वह पिछले 42 साल से किसानों के मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं। वह पंजाब छात्र संघ से भी जुड़े हैं।

किसान आंदोलनआजाद किसान संघर्ष कमेटी (पंजाब) के हरजिंदर सिंह टांडा संवाददाताओं से बातचीत करते हुए (फोटो एएनआई)

खेती को लेकर सरकार के तीन कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के कई संगठन दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं। सरकार से वार्ता के लिए कुल 35 संगठनों के किसान नेता पहुंचे थे। इन नेताओं में पूर्व फौजी से लेकर डॉक्टर तक शामिल हैं। कई ऐसे भी नेता हैं जिन्होंने बहुत कम उम्र में संगठन से जुड़कर सामाजिक गतिविधियों में लगे हैं।

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू-क्रांतिकारी) के सुरजीत सिंह फूल (75) किसान आंदोलन में सबसे प्रभावशाली नेता हैं। पंजाब सरकार ने इनके खिलाफ 2009 में यूएपीए के तहत केस दर्ज किया था। इन पर माओवादियों से संबंध होने का आरोप लगा था। अमृतसर के जेल में इनसे कड़ी पूछताछ हुई थी। इनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।

पश्चिम बंगाल के हन्नाह मोल्लाह (74) आल इंडिया किसान सभा के नेता हैं और सीपीएम के सदस्य हैं। उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में सीपीएम ज्वाइन की थी और पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य बने। बोघ सिंह मंसा (68) भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं। वह पिछले 42 साल से किसानों के मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं। वह पंजाब छात्र संघ से भी जुड़े हैं।

जोगिंदर सिंह (75) बीकेयू (उग्रहण) के नेता हैं। उन्होंने सेना की नौकरी छोड़कर खेती शुरू की थी। 2002 में बीकेयू (उग्रहण) की स्थापना की थी। वह उन नेताओं में हैं जिनसे गृहमंत्री अमित शाह ने आंदोलन को बुरारी शिफ्ट करने का अनुरोध किया था। मालवा क्षेत्र के क्रांतिकारी किसान यूनियन के डॉ. दर्शन पाल (70) मेडिकल सर्विस छोड़कर अपने पैतृक 15 एकड़ जमीन पर खेती शुरू की थी।

जम्हूरियत किसान सभा के कुलवंत सिंह संधू (65) वामपंथी नेता हैं और रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के सेंट्रल कमेटी के सदस्य हैं। बीकेयू (एकता डाकोंडा) के बूटा सिंह बुर्ज गिल (66) 1984 से किसानों के लिए काम कर रहे हैं और पंजाब राजभवन का कई दिनों तक घेराव किया था।

कीर्ति किसान यूनियन के निर्भय सिंह दूधिके (70) सीपीआई (एमएल) न्यू डेमोक्रेसी के भी सदस्य हैं। वह 1972 में मोगा में पुलिस फायरिंग में दो छात्रों की मौत के बाद हुए आंदोलन में चर्चा में आए थे। कुल हिंद किसान सभा के बलदेव सिंह निहालगढ़ (64) सीपीआई के राज्य कार्यकारिणी के सदस्य हैं।

पंजाब किसान यूनियन के रुल्डू सिंह मंसा (68) मालवा में प्रभावशाली हैं और सीपीआई (एमएल) लिबरेशन से जुड़े हैं। आल इंडिया किसान सभा के मेजर सिंह पुन्नावाल (68) सीपीएम से जुड़े हैं। इंदरजीत सिंह कोट बुधा (50) किसान संघर्ष कमेटी (पंजाब कोट बुधा) से जुड़े हैं।

जय किसान आंदोलन के गुरुबख्श सिंह बरनाला, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सतनाम सिंह पन्नू (65), किसान संघर्ष कमेटी (पंजाब) के कंवलप्रीत सिंह पन्नू (55), आजाद किसान संघर्ष कमेटी (पंजाब) के हरजिंदर सिंह टांडा (57), बीकेयू सिधूपुर के जगजीत सिंह डालेवाल (62), बीकेयू (कादियान) के हरमीत सिंह (43), बीकेयू (राजेवाल) के बलबीर सिंह राजेवाल (77), बीकेयू (द्वाबा) के सतनाम सिंह साहनी, माझा किसान कमेटी के बलविंदर सिंह औलाख (42), लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी के बलदेव सिंह सिरसा (72) भी सरकार के साथ वार्ता में मौजूद रहे।

इसके अलावा इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन के सतनाम सिंह बेहरू (81), भारतीय किसान मंच के बूटा सिंह शादीपुर (59) शिरोमणि अकाली दल के पूर्व सदस्य हैं। द्वाबा किसान समिति के जंगबीर सिंह टांडा (45), द्वाबा किसान संघर्ष कमेटी के मुकेश चंद्र (65), गन्ना संघर्ष कमेटी के सुखपाल सिंह डफर (61), आजाद किसान कमेटी द्वाबा के हरपाल सिंह (60), बीकेयू (मान) के बलदेव सिंह मियांपुर (69) कांग्रेस से जुडे़ हैं।

किसान बचाओ मोर्चा के कृपाल सिंह नाथुवाला (52), बीकेयू (लाखोवाल) परमिंदर सिंह पल माजरा (65), कुलहिंद किसान फेडरेशन के सीपीएम नेता प्रेम सिंह भांगू, कुलहिंद किसान फेडरेशन (संगरूर) के सीपीएम नेता किरनजीत सिंह सेखोन, आम आदमी पार्टी से जुड़े बीकेयू (चडौनी) के गुरनाम सिंह चन्नूनी (60), मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के शिवकुमार कक्का जेपी आंदोलन से जुड़े रहे है। वे भी सरकार से वार्ता में शामिल रहे।

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