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किसान आंदोलन बना सिख बनाम हिंदू का मुद्दा? सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने कहा- देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए अल्पसंख्यकों को दबा रहा RSS

एसजीपीसी ने आरएसएस पर अल्पसंख्यक समुदायों को उनके मामलों में हस्तक्षेप करने की धमकी देने का आरोप लगाया। कहा कि 17वीं शताब्दी में मुगलों ने भी इस तरह के प्रयास किए थे, जिनका सिख गुरुओं ने जोरदार विरोध किया था।

SGPC, RSS, BJPएसजीपीसी की बैठक को संबोधित करतीं अध्यक्ष बीबी जागीर कौर। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस फाइल)

पिछले चार महीने से ज्यादा समय से देश की राजधानी की सीमाओं पर डेरा डालकर बैठे किसानों का तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में भी जातिवाद उभरने लगा है। बताया जा रहा है कि किसान आंदोलन सिख बनाम हिंदू का मुद्दा बनता जा रहा है। इसको लेकर सिखों का सबसे बड़ा संगठन एसजीपीसी ने आरएसएस पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि यह देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए अल्पसंख्यकों को दबा रहा है।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने अपनी एक आम सभा एक संकल्प प्रस्ताव पेश कर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की निंदा की। एसजीपीसी ने कहा कि देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के प्रयास में आरएसएस अन्य धर्मों और अल्पसंख्यकों की स्वतंत्रता को दबाने में जुटा है। यह पहली बार है कि एसजीपीसी की आम सभा की बैठक में आरएसएस के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया है। कार्यवाहक अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए इसके खिलाफ कड़ी चेतावनी दी। बैठक में एसजीपीसी अध्यक्ष बीबी जागीर कौर और अकाल तख्त जत्थेदार भी उपस्थित थे।

एसजीपीसी ने आरएसएस पर अल्पसंख्यक समुदायों को उनके मामलों में हस्तक्षेप करने की धमकी देने का आरोप लगाया। कहा कि 17वीं शताब्दी में मुगलों ने भी इस तरह के प्रयास किए थे, जिनका सिख गुरुओं ने जोरदार विरोध किया था। नौवें सिख गुरु गुरु तेग बहादुर ने अन्य समुदायों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

संकल्प में कहा गया है कि प्रत्येक धर्म ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना योगदान दिया और बलिदान किया। इनमें से 80 प्रतिशत सिख थे। एसजीपीसी ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे ऐसे तत्वों पर लगाम कसना चाहिए और अन्य धर्मों की धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी चाहिए।

कहा कि धर्म के आधार पर विभाजन करने वालों पर सख्ती नहीं बरती गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। भारत एक ऐसा देश है, जहां सभी धर्मों के लोग समान आदरभाव और अधिकार के साथ रहते हैं। उनमें विभेद करना मानवता के खिलाफ होगा।

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