संसद के बाहर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद के बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कानून-व्यवस्था संभालने की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलनों से निपटने में सबसे पहले सिविल पुलिस और सिविल डिफेंस को आगे रखा जाना चाहिए, जबकि सशस्त्र बलों की तैनाती अंतिम विकल्प होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को कानून-व्यवस्था के मामले में ब्रिटिश काल की व्यवस्था से बाहर निकलने की जरूरत है। एएनआई से बातचीत में किरण बेदी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी वहां मौजूद सबसे वरिष्ठ अधिकारी की होती है।

उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं है, तब भी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी को हालात के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश का इंतजार करने का सवाल ही नहीं उठता।

‘आर्म्ड फोर्स नहीं, सिविल पुलिस हो पहली लाइन ऑफ डिफेंस’

किरण बेदी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्र प्रदर्शन सीधे हथियारबंद बलों के साथ टकराव तक क्यों पहुंच जाता है। उनके अनुसार यह हमारे सिस्टम की खामी है। उन्होंने कहा कि हर विरोध प्रदर्शन में सीधे लाठीचार्ज या सशस्त्र बलों को आगे करना गलत है और यह औपनिवेशिक ब्रिटिश काल की सोच का हिस्सा है।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी सभा को अवैध घोषित किया जाता है तो सबसे पहले सिविल पुलिस या सिविल डिफेंस के प्रशिक्षित जवानों को तैनात किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, ये जवान बिना लाठी के भी भीड़ को कंट्रोल करने का प्रयास कर सकते हैं और संवाद के जरिए तनाव कम किया जा सकता है।

‘बैरिकेड टूटने पर महिला पुलिस संभाले मोर्चा’

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि यदि प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ देते हैं, तो दूसरी पंक्ति में महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला पुलिस के पास लाठी नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें हेलमेट, हेडगियर और बॉडी आर्मर जैसे सुरक्षा उपकरण दिए जाने चाहिए ताकि वे खुद सुरक्षित रहते हुए स्थिति को नियंत्रित कर सकें। उनके अनुसार इससे अनावश्यक बल प्रयोग की संभावना कम होगी और प्रदर्शनकारियों के साथ सीधा हिंसक टकराव टाला जा सकेगा।

‘आर्म्ड पुलिस और वाटर कैनन आखिरी विकल्प हों’

किरण बेदी ने कहा कि यदि हालात पूरी तरह बेकाबू हो जाएं, तभी सशस्त्र पुलिस को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंसू गैस, लाठीचार्ज या वाटर कैनन जैसे उपाय अंतिम विकल्प होने चाहिए। उनका मानना है कि हर प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग और ड्रोन निगरानी की जानी चाहिए ताकि बाद में यह स्पष्ट हो सके कि हिंसा किसने शुरू की, आगजनी किसने की और कानून तोड़ने की जिम्मेदारी किसकी थी।

संसद की ओर मार्च कराने पर भी उठाए सवाल

किरण बेदी ने प्रदर्शन के रूट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को सीधे संसद भवन की ओर बढ़ने देने के बजाय ऐसे प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान जैसे निर्धारित स्थानों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार जंतर-मंतर का क्षेत्र छोटा है और आसपास बाजार होने के कारण व्यापार भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि निर्धारित और पर्याप्त बड़े स्थान पर प्रदर्शन होने से सुरक्षा व्यवस्था बेहतर ढंग से संभाली जा सकती है और सार्वजनिक जीवन पर भी कम असर पड़ेगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह विरोध प्रदर्शनों के दौरान जंतर-मंतर पर तैनात आरएएफ कर्मियों के गोला-बारूद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखे। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।