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किरण बेदी के पार्टी में आ जाने से छिड़ गई लड़ाई: टिकट बंटवारे से नाराज हुए भाजपा कार्यकर्ता

दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट बंटवारे से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को दिल्ली भाजपा के मुख्यालय पर विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी भाजपाई दिल्ली विधानसभा चुनाव के टिकट बंटवारे से नाराज थे। भाजपा कार्यकर्ताओं को वहां से हटाने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी। दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जिस तरह रातोरात […]

दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट बंटवारे से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को दिल्ली भाजपा के मुख्यालय पर विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी भाजपाई दिल्ली विधानसभा चुनाव के टिकट बंटवारे से नाराज थे। भाजपा कार्यकर्ताओं को वहां से हटाने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी।

दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जिस तरह रातोरात आप और कांग्रेस के नेताओं को भाजपा में शामिल कर संगठन के मूल कार्यकर्ताओं को नाराज किया, उसका लावा मंगलवार को फूट पड़ा। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि बरसों से संगठन की सेवा करने के बावजूद उन्हें संगठन ने दरकिनार कर दिया। बीते एक सप्ताह में भाजपा में शामिल होने वाले किरण बेदी, कृष्णा तीरथ, डॉक्टर एससी वत्स, शकील अंजुम देहलवी, एमएस धीर, विनोद कुमार बिन्नी और जगदीश प्रधान को पार्टी ने थाली में विधानसभा का टिकट सजा कर दे दिया। दिल्ली भाजपा के संगठन में इन सभी सीटों पर कई दावेदार थे। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली को लेकर कई अहम फैसलों पर दिल्ली संगठन को नजरंदाज किया।
भाजपा में परंपरा है कि किसी भी चुनाव में उम्मीदवारों का चयन मंडल स्तर से शुरू होता है। पहले संभावित उम्मीदवारों के नाम मंडल तय कर जिले की टीम के पास भेजता है।

उसके बाद जिला उन नामों में से छंटनी कर प्रदेश संगठन को भेजता है। बाद में प्रदेश संगठन उन नामों की छंटनी कर भाजपा के संसदीय बोर्ड के पास भेज देता है। उम्मीदवार के नाम का अंतिम फैसला संसदीय बोर्ड करता है। इस बार भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बिना किसी के सलाह के अपने निवास पर ही आप और कांग्रेस के कई नेताओं को बुलाकर उन्हें भाजपा में शामिल कर विधानसभा चुनाव की टिकट का भी आश्वासन दे दिया। दिल्ली में भाजपा संगठन के ज्यादातर नेता इस तरह के फैसलों से काफी नाराज दिखे। दिल्ली में आप और कांग्रेस के जो नेता भाजपा के खिलाफ झंडा उठाए खड़े रहे, उन्हें रातोरात भाजपा में शामिल कर पार्टी का टिकट दे दिया गया।

भाजपा में किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाए जाने से भी कई नेताओं में खासी नाराजगी है। उनका कहना है कि पार्टी आलाकमान पहले जब फैसला ले चुका था कि इस बार किसी के भी नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा जाएगा, तो फिर ऐसे में अचानक क्या हुआ कि पार्टी आलाकमान को अपना फैसला बदलना पड़ा।

किरण बेदी को लेकर भाजपा के कुछ नेताओं ने बयानबाजी शुरू कि तो तत्काल अमित शाह ने सबकी कलास लेनी शुरू कर दी और पार्टी के अनुशासन का डंडा दिखा दिया। इसके चलते बेदी के खिलाफ मुखर विरोध शांत हो गया। ऐसा नहीं है कि इस मामले में सब शांत हो गया है, दिल्ली भाजपा में अंदर ही अंदर चिंगारी धधक रही है। यदि चुनावों तक वह चिंगारी नहीं बुझी, तो उसका खमियाजा दिल्ली के चुनाव में भाजपा को झेलना पड़ सकता है।

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