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चीफ जस्टिस के खिलाफ नहीं चलेगा महाभियोग, रिटायरमेंट से पहले दे सकते हैं नेताओं और राजनीति पर असर डालने वाले अहम फैसले

वैसे तो चीफ जस्‍टिस की बेंच में कई अहम मामलों की सुनवाई हो रही है, लेकिन कुछ ऐसे मामले भी हैं जिन पर फैसलों का नेताओं और राजनीति पर बड़ा असर हो सकता है। सांसदों-विधायकों के कोर्ट में प्रैक्टिस करने पर रोक लगाने और अयोध्‍या विवाद के केस ऐसे ही मामलों में शामिल हैं।

Author नई दिल्ली | April 23, 2018 4:01 PM
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा। (Express Photo By Ganesh Shirsekar/Files)

देश के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग चलाने का विपक्ष का प्रस्‍ताव राज्‍यसभा सभापति वेंकैया नायडू ने सोमवार (23 अप्रैल) को खारिज कर दिया। अब जस्‍टिस मिश्रा रिटायरमेंट से पहले कई अहम मामलों में फैसले सुना सकेंगे। वह दो अक्‍टूबर, 2018 को रिटायर हो रहे हैं। हालांकि, अगर संसदीय समिति की एक सिफारिश मान ली गई तो वह दो अक्‍टूबर, 2020 तक रह सकते हैं। समिति ने सिफारिश की है कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की सेवानिवृत्‍ति उम्र 65 से बढ़ा कर 67 साल कर दी जाए। वैसे तो चीफ जस्‍टिस की बेंच में कई अहम मामलों की सुनवाई हो रही है, लेकिन कुछ ऐसे मामले भी हैं जिन पर फैसलों का नेताओं और राजनीति पर बड़ा असर हो सकता है। सांसदों-विधायकों के कोर्ट में प्रैक्टिस करने पर रोक लगाने और अयोध्‍या विवाद के केस ऐसे ही मामलों में शामिल हैं। एक नजर उन मामलों पर, जिनकी सुनवाई जस्‍टिस दीपक मिश्रा की बेंच में चल रही है।
किस केस की सुनवाई से किसकी सेहत पर असरः सांसदों-विधायकों के कोर्ट में प्रैक्टिस करने पर रोक लगाने की याचिका पर सीजेआई सुनवाई कर रहे हैं। अंतिम फैसले में अगर इस पर रोक लग गई तो कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, अभिषेक मनु सिंघवी आदि तमाम नेता सांसद रहते प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे। कांग्रेस ही नहीं कई दलों के तमाम नेता सांसद-विधायक रहते हुए भी कोर्ट में फीस लेकर मुकदमे लड़ते हैं। याचिकाकर्ता अश्वनी उपाध्याय ( सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और बीजेपी नेता) ने जनसत्ताडॉटकॉम से बातचीत में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 49 के मुताबिक सरकारी या गैरसरकारी संस्थान का पूर्णकालिक वेतनभोगी व्यक्ति किसी कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं कर सकता। बावजूद इसके ज्यादातर नेता सांसद और विधायक होते हुए वकालत करते हैं।

दागियों के पार्टी बनाने और सांसदों-विधायकों के वकालत करने पर रोक लगाने की जनहित याचिका करने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय

राजनीतिक सुधार की बात: केस में दोषी होने पर पार्टी बनाने या पदाधिकारी बनाने पर रोक की याचिका पर भी मुख्य न्यायाधीश सुनवाई कर रहे हैं। आगामी तीन मई को सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर फैसला सुना सकता है। अगर ऐसा होता है तो लालू प्रसाद यादव, ओमप्रकाश चौटाला जैसे कई नेताओं की राजनीति खत्म हो जाएगी। इतना ही नहीं फास्ट ट्रैक कोर्ट में सांसदों-विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों का साल भर में त्वरित निस्तारण की व्यवस्था अमल मे आ गई है। अश्वनी उपाध्याय के मुताबिक, राहुल और सोनिया गांधी नेशनल हेराल्ड केस में फंसे हैं। ऐसे में उनके मामलों का भी एक साल में निस्तारण होगा। अगर केस में दोषी साबित हुए तो फिर चुनाव लड़ने पर पाबंदी ही नहीं बल्कि पार्टी की राजनीति भी नहीं कर सकेंगे। फरवरी में इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस कह चुके हैं-यदि एक दोषी व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता तो फिर वह पार्टी मुखिया बनकर कैसे उम्मीदवार तय कर सकता है, क्या यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ नहीं है?

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राम मंदिर मामले में आ सकता है जल्द फैसलाः बताया जा रहा है कि अयोध्या विवाद में विपक्ष 2019 के बाद सुनवाई चाहता है। जबकि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा इसकी त्वरित सुनवाई के पक्ष में हैं। अगर चुनाव से पहले इस मामले में फैसला आ गया तो राजनीति पर इसका व्‍यापक असर पड़ सकता है और कांग्रेस व भाजपा अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार फैसले से राजनीतिक मकसद साध सकते हैं। इसके अलावा नौ मई को रोहिंग्या और बांग्लादेशी शरणार्थियों के मुद्दे पर आखिरी सुनवाई है।नेताओं के दो सीट से चुनाव लड़ने का मामला, बहुविवाह, हलाला और आधार से जुड़े मामले भी जस्टिस दीपक मिश्रा की कोर्ट  में चल रहे हैं। ये सभी पीआइएल अश्वनी उपाध्याय ने कर रखीं हैं।

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