भारतीय जनता पार्टी ने केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का अध्यक्ष बनाया है। नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष अभी नए रोल में सेटल हो पाते इससे पहले पार्टी अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी को जनता के साथ ही राज्य में अपने कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की स्पष्ट आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
मीडिया से बात करते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा कि ढिल्लों उनके अच्छे दोस्त हैं। हालांकि, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के लिए उनका चयन सही नहीं है। उनकी यह टिप्पणी उस वक्त सामने आई जब भाजपा आलाकमान ने राज्य में सुनील जाखड़ को हटाकर केवल सिंह ढिल्लों का पंजाब भाजपा की जिम्मेदारी सौंप दी। बतौर पंजाब भाजपा अध्यक्ष जाखड़ का कार्यकाल केवल दो महीने ही बच रहा था।
कैप्टन के इस बयान ने पार्टी के अंदर चर्चाओं के एक नए दौर को जन्म दे दिया है। साथ पार्टी के अंदर की कलह भी सतह पर आ गई है। यह इसलिए चिंताजनक है क्योंकि पार्टी बंगाल में शानदार जीत के बाद अब पंजाब विधानसभा चुनाव में जीत के सपने देख रही है। पंजाब भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति के बाद पार्टी के भीतर असहमति की आवाजें भले ही निजी तौर पर सुनाई दे रही थीं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ऐसे पहले वरिष्ठ नेता बने जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की।
अमरिंदर सिंह ने संकेत दिया कि पार्टी को मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था, यानी प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा की जोड़ी को ही जारी रखना चाहिए था। उन्होंने कहा, “सुनील जाखड़ और अश्विनी शर्मा को ही आगे काम करने दिया जा सकता था।” यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अमरिंदर सिंह आमतौर पर भाजपा के आंतरिक मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचते रहे हैं। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने अपनी पार्टी पंजाब लोक कांग्रेस का भाजपा में विलय कर दिया था।
सितंबर 2021 में पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और कांग्रेस छोड़ने के बाद अमरिंदर सिंह ने पंजाब लोक कांग्रेस का गठन किया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के साथ गठबंधन किया था, लेकिन यह गठबंधन कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सका।
उस चुनाव में भाजपा ने 73 सीटों पर चुनाव लड़कर केवल दो सीटें जीती थीं, जबकि पंजाब लोक कांग्रेस और शिअद (संयुक्त) अपना खाता भी नहीं खोल पाए थे। इसके बाद से स्वास्थ्य कारणों के चलते अमरिंदर सिंह सक्रिय राजनीति से काफी हद तक दूर रहे हैं। ऐसे में भाजपा नेतृत्व को लेकर उनकी यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भाजपा ने ढिल्लों को क्यों चुना?
ढिल्लों को पंजाब भाजपा की बागडोर सौंपा जाना कई राजनीतिक पर्यवेक्षक के लिए चौंकाने वाला था। बरनाला से कांग्रेस विधायक रहे ढिल्लों ने साल 2022 में जून महीने में भापजा ज्वाइन की थी। इससे पहले वो कई वर्षों तक कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। हालांकि केवल सिंह ढिल्लों को एक ऐसे नेता के तौर पर देखा जाता है जिनकी सभी दलों के नेताओं से अच्छी व्यक्तिगत संबंध हैं और जो आसानी से लोगों तक पहुंच रखते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में उनका चुनावी प्रदर्शन मिला जुला रहा है।
ढिल्लों ने 2007 और 2012 में कांग्रेस के विपक्ष में रहने के दौरान बरनाला विधानसभा सीट जीती थी। हालांकि इसके बाद उन्हें लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ा। वे 2017 का विधानसभा चुनाव, 2019 का संगरूर लोकसभा चुनाव (कांग्रेस टिकट पर), 2022 का संगरूर लोकसभा उपचुनाव और 2024 का बरनाला विधानसभा उपचुनाव (भाजपा टिकट पर) हार गए।
इसी वजह से भाजपा के भीतर कुछ नेता नेतृत्व परिवर्तन को लेकर निजी तौर पर सवाल उठा रहे हैं। एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “वह लगातार चार चुनाव हार चुके हैं और अब उन्हें उस पार्टी की कमान सौंपी गई है जो पंजाब में खुद को एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित करना चाहती है। हममें से कई लोग अब भी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस प्रयोग के पीछे तर्क क्या है।”
हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने ढिल्लों को अलग नजरिए से देखा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखता है जो पार्टी के पारंपरिक शहरी हिंदू वोट बैंक से आगे बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक आधार का विस्तार कर सकते हैं।
मालवा क्षेत्र से आने वाले ढिल्लों की नियुक्ति को राज्य के सबसे अहम राजनीतिक क्षेत्र में पार्टी को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से करीब 69 सीटें अकेले मालवा क्षेत्र में आती हैं, इसलिए यह इलाका चुनावी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
आलाकमान बनाम प्रदेश नेता
दिलचस्प बात यह रही कि केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति पर चर्चा करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा और कांग्रेस की कार्यशैली के बीच एक बुनियादी अंतर की ओर भी इशारा किया। एक मीडिया संस्थान से बातचीत में उन्होंने कहा, “भाजपा में आमतौर पर किसी से पूछा नहीं जाता, सीधे फैसला कर दिया जाता है। जबकि कांग्रेस में नियमित रूप से फीडबैक लिया जाता था।”
उनका यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की केंद्रीकृत निर्णय प्रक्रिया की ओर संकेत करता है, जिसे पार्टी के कई नेता उसकी ताकत मानते हैं। खुद केवल सिंह ढिल्लों ने भी इस बात को मजबूती से रखा। उन्होंने कहा, “भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। फैसले संगठनात्मक आकलन के आधार पर लिए जाते हैं। मैंने इस पद के लिए कभी दिल्ली जाकर लॉबिंग नहीं की। सच तो यह है कि मुझे खुद नहीं पता था कि मुझे प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा। यही भाजपा और कांग्रेस के बीच का फर्क है।”
कांग्रेस की तुलना में भाजपा के संगठन को “जमीन-आसमान का फर्क” बताते हुए ढिल्लों ने कहा कि इसी अनुशासन की वजह से पार्टी देश के 21 राज्यों में सरकार बनाने में सफल हुई है।
विधानसभा चुनाव 2027 की चुनौती
हालिया शहरी निकाय चुनावों में भाजपा ने पंजाब में अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है और 2021 की तुलना में बेहतर नतीजे हासिल किए हैं। हालांकि, निकाय चुनावों की सफलता को विधानसभा सीटों में बदलना पार्टी के लिए कहीं बड़ी चुनौती होगी। पार्टी को अब भी ग्रामीण पंजाब के बड़े हिस्से, खासकर सिख मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता हासिल करने में संघर्ष करना पड़ रहा है।
किसान आंदोलन की छाया अभी भी राजनीतिक माहौल को प्रभावित करती है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) राज्य में सत्तारूढ़ दल के रूप में मजबूत स्थिति में है। ऐसे में ढिल्लों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भाजपा को कुछ क्षेत्रों तक सीमित प्रभाव वाली पार्टी से निकालकर पूरे राज्य में प्रभावशाली राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करना होगी।
संगठन को साथ रखने की कोशिश
प्रदेश अध्यक्ष बनने के अगले ही दिन ढिल्लों ने चंडीगढ़ में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इसे संगठन में एकजुटता बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ढिल्लों ने कहा, “हम सभी एक ही सोच के साथ काम कर रहे हैं। प्रगति तब होती है जब पूरी टीम मिलकर काम करे। हम ‘सबका साथ, सबका विकास’ में विश्वास रखते हैं और इसी रास्ते पर पंजाब आगे बढ़ेगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें फोन कर बधाई दी थी। हालांकि अमरिंदर सिंह की नाराजगी सामने आने से पहले ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस नियुक्ति पर तंज कस दिया था। मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “बरनाला की जनता से 2017, 2019 और 2024 में हारने वाले भाजपा नेता केवल ढिल्लों को पंजाब भाजपा अध्यक्ष बनने पर बधाई। सुनील जाखड़ के प्रति संवेदनाएं। रवनीत बिट्टू, मनप्रीत बादल, फतेहजंग बाजवा, तरुण चुघ और अश्विनी शर्मा को यह अपमान सहने की शक्ति मिले।”
सूत्रों के अनुसार, जिन नेताओं के नाम भगवंत मान ने लिए थे, वे भी प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल थे।
जाखड़ का संतुलित रुख
इस पूरे बदलाव के बीच सुनील जाखड़ ने संतुलित और परिपक्व रुख अपनाया। उन्होंने ढिल्लों को बधाई देते हुए कहा कि पंजाब भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य करना उनके लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों रहा है। जाखड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “केवल ढिल्लों जी को मेरी शुभकामनाएं और पूरा समर्थन है। मुझे विश्वास है कि उनके नेतृत्व में संगठन और मजबूत होगा तथा पंजाब की सेवा और अधिक समर्पण के साथ करेगा।”
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि आगामी रिक्तियों के दौरान जाखड़ को राज्यसभा भेजा जा सकता है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
गठबंधन की बहस फिर शुरू
अमरिंदर सिंह के बयान के बाद पंजाब भाजपा में एक पुरानी बहस भी फिर से शुरू हो गई है—क्या भाजपा अपने दम पर पंजाब में सरकार बना सकती है? पूर्व मुख्यमंत्री का मानना है कि भाजपा अकेले सत्ता में नहीं आ सकती और उसे भविष्य में शिरोमणि अकाली दल या किसी अन्य मजबूत क्षेत्रीय दल के साथ गठबंधन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नए प्रदेश अध्यक्ष को इस दिशा में भी सोचने की जरूरत है।
हालांकि भाजपा नेतृत्व पंजाब में स्वतंत्र रूप से विस्तार को लेकर लगातार आत्मविश्वास जता रहा है और उन राज्यों का उदाहरण दे रहा है जहां पार्टी कभी हाशिये पर मानी जाती थी लेकिन बाद में मजबूत राजनीतिक ताकत बनकर उभरी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केवल सिंह ढिल्लों पार्टी की महत्वाकांक्षाओं और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी को कितना कम कर पाते हैं। यही उनकी अध्यक्षता की सफलता और 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं को तय करेगा।
इस बीच, भाजपा के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन ने अमरिंदर सिंह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह हमारे वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं। उन्होंने जो कहा है, वह उनका व्यक्तिगत मत हो सकता है।” उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति भाजपा की नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है और पार्टी धर्म के आधार पर राजनीति नहीं करती।
सरीन ने कहा, “हमारा उद्देश्य पंजाब को समृद्ध बनाना है। हमारे कार्यकर्ता विभिन्न धर्मों और पृष्ठभूमियों से आते हैं और सभी पंजाब की ‘चढ़दी कला’ के लिए काम करते हैं।” सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने सिसवां फार्महाउस पहुंचकर कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात भी की। इसे प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के बाद शिष्टाचार भेंट के रूप में देखा जा रहा है।
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