एग्जिट पोल के रुझान कांग्रेस के लिए विशेष खुशखबरी लेकर नहीं आए। विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल में कांग्रेस मजबूती से कमबैक करती नहीं दिख रही। केरल को छोड़कर कांग्रेस को कहीं से खुशखबरी मिलती नजर नहीं आ रही है। दक्षिण राज्य में कांग्रेस (UDF) को 77 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, पुडुचेरी में आठ, असम में 30, तमिलनाडु में 2-4 सीट मिलने का अनुमान लगाया गया है।

एग्जिट पोल पर पार्टी के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। एक तरफ जहां उन्होंने केरल में संभावित जीत को लेकर खुशी जताई है। वहीं अन्य राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत होने का दावा किया है।

कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने बुधवार को कहा कि डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन आराम से बहुमत हासिल कर सरकार बनाएगा। केरल में अगर यूडीएफ सत्ता में आता है तो मुख्यमंत्री कौन होगा, इस सवाल पर उन्होंने एएनआई से कहा, “नतीजे आने के बाद कांग्रेस पार्टी में सीएलपी (विधायक दल) नेता चुनने की प्रक्रिया होती है। हाईकमान निर्वाचित विधायकों से सलाह-मशविरा करके अंतिम फैसला लेता है।”

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल पर उन्होंने कहा, “डीएमके गठबंधन सरकार बनाएगा और उसे स्पष्ट बहुमत मिलेगा। एम.के. स्टालिन फिर से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री चुने जाएंगे। तमिलनाडु की जनता डीएमके गठबंधन के साथ है।” एग्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) केरल में जीत की ओर बढ़ता दिख रहा है।

‘पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता’

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “ओपिनियन पोल पूरी तरह भरोसेमंद नहीं होते। कांग्रेस हमेशा से कहती रही है कि इन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। असम में कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है, जबकि केरल में लंबे समय से कांग्रेस के पक्ष में माहौल रहा है। बंगाल में बीजेपी को आगे दिखाया जा रहा है, लेकिन हमें इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं दिखता।”

उन्होंने चुनाव के दौरान सरकारी मशीनरी और केंद्रीय बलों के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा, “सरकारी मशीनरी और केंद्रीय बलों का उपयोग चिंताजनक है, इससे लोकतंत्र पर सवाल उठते हैं।”

कांग्रेस सांसद राजेश ठाकुर ने कहा कि एग्जिट पोल हमेशा वास्तविक नतीजों से अलग होते हैं और शक पैदा करते हैं। उन्होंने कहा, “एग्जिट पोल फिर सामने आए हैं, लेकिन हमेशा की तरह ये वास्तविक परिणामों से अलग होते हैं। कुछ आंकड़े एक पक्ष को खुश करने के लिए दिखाए जाते हैं, तो कुछ दूसरे पक्ष के लिए। इससे चुनाव आयोग और यहां तक कि ईवीएम पर भी सवाल खड़े होते हैं। मतदान के दौरान ही ऐसे आंकड़े सामने आते हैं, जिनकी पुष्टि नहीं की जा सकती।”

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी के खिलाफ बड़ा वोट शेयर था, लेकिन यह सत्ता विरोधी लहर विपक्षी दलों में बंट गई। उन्होंने कहा, “एंटी-इंकंबेंसी वोट सभी विपक्षी दलों में बंट गया है। यह कहना मुश्किल है कि इसका असर कहां और कैसे पड़ा, लेकिन साफ है कि टीएमसी के खिलाफ बड़ा वोट शेयर था। हालांकि ये वोट बिखर गए कुछ बीजेपी को, कुछ कांग्रेस को, कुछ सीपीआई(एम) को और कुछ हुमायूं कबीर की पार्टी को मिले।”

वहीं, एग्जिट पोल के अनुमान पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि एग्जिट पोल में कोई सच्चाई नहीं है। बंगाल नें जिस तरह से सत्ता विरोध लहर है, वहां पर चुनाव परिणाम कुछ भी हो सकता है। मतदान का प्रतिशत इतना अधिक गया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।

यह भी पढ़ें – एग्जिट पोल ही निकले ‘एग्जैक्ट पोल’ तो ये 5 संदेश नजरअंदाज नहीं किए जा सकते

बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी के एग्जिट पोल्स ने राजनीतिक तस्वीर का एक अनुमान तो दिया, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि ये एग्जिट पोल ही हैं, ‘एग्जैक्ट पोल’ नहीं। यानी अंतिम नतीजों की जगह ये सिर्फ रुझान बताते हैं। और इन्हीं रुझानों से पांच बड़े संकेत उभरते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं।