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सौम्या रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त बलात्कारी की मौत की सज़ा, केरल सरकार व परिवार ने की निंदा

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2012 में गोविंदाचामी को आदतन अपराधी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी और कहा था कि बर्बर बलात्कार महिला की मौत के कारणों में था।

उच्चतम न्यायालय (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने 23 वर्षीय सौम्या से बर्बर बलात्कार और उसकी हत्या करने के दोषी गोविंदाचामी की मौत की सजा को गुरुवार को निरस्त कर दिया और उसके खिलाफ लगे हत्या के आरोपों को हटा कर उसे सात साल कैद की सजा सुनाई। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं-376 (बलात्कार के लिए दंड), 394 (लूटपाट करने में जानबूझकर नुकसान पहुंचाने), 325 (जानबूझकर गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए दंड) के तहत लगे आरोपों को बरकरार रखा।

केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सौम्या हत्या मामले में तमिलनाडु के विरुदनगर से ताल्लुक रखने वाले गोविंदाचामी को फास्ट ट्रैक अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा की 17 दिसंबर, 2013 को पुष्टि की थी। अभियोजन के अनुसार घटना 1 फरवरी, 2011 को उस समय हुई जब कोच्चि में शॉपिंग मॉल में काम करने वाली सौम्या एर्नाकुलम-शोरनपुर पैसेंजर ट्रेन के महिला डिब्बे में सफर कर रही थी। गोविंदाचामी ने उस पर हमला किया और धीमी गति से चल रही ट्रेन से उसे धक्का दे दिया। हमलावर भी ट्रेन से कूद गया और घायल पड़ी महिला को उठाकर वल्लातोल नगर में रेल पटरी के पास एक जंगल क्षेत्र में ले गया व वहां उससे बलात्कार किया। चोटों के चलते छह फरवरी 2011 को राजकीय मेडिकल कालेज अस्पताल त्रिशूर में सौम्या की मौत हो गई। अभियोजन ने यह भी रेखांकित किया कि गोविंदाचामी गृहराज्य में पहले भी आठ मामलों में दोषी ठहराया जा चुका था।

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2012 में गोविंदाचामी को आदतन अपराधी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी और कहा था कि बर्बर बलात्कार महिला की मौत के कारणों में था। अपराध बर्बर था, इसने समाज को झकझोर कर रख दिया। दो साल बाद हाईकोर्ट ने सुनाई गई मौत की सजा बरकरार रखी जिसे उसने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

कैसे हुई थी सौम्या की बर्बर हत्या

कोच्चि में शॉपिंग मॉल में काम करने वाली सौम्या (23) एर्नाकुलम-शोरनपुर पैसेंजर ट्रेन के महिला डिब्बे में 1 फरवरी, 2011 को सफर कर रही थी। गोविंदाचामी ने सौम्या को धीमी गति से चल रही ट्रेन से धक्का दे दिया। हमलावर भी ट्रेन से कूद गया और घायल पड़ी महिला को उठाकर वल्लातोल नगर में रेल पटरी के पास एक जंगल क्षेत्र में ले गया व वहां उससे बलात्कार किया।

केरल सरकार व परिवार ने निंदा की
केरल सरकार और सौम्या के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की और कहा कि वे समीक्षा याचिका दायर करेंगे। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि यह कोई सजा नहीं है और केरल के लोगों के लिए इसे पचा पाना बहुत मुश्किल है। इससे मानवता में विश्वास रखने वाले लोगों के जेहन में बेचैनी पैदा होगी। केरल सरकार जल्द से जल्द समीक्षा याचिका दायर करेगी। उन्होंने बयान में कहा, ‘हम सौम्या के परिवार के लिए न्याय सुनिश्चित करने की खातिर सर्वश्रेष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की सेवा लेंगे।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि निचली अदालत और उच्च न्यायालय ने सभी पहलुओं की जांच करने के बाद आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि कई तरह के सबूतों की जांच की गई, जिनसे गोविंदाचामी का दोष साबित हुआ। इनमें फोरेंसिक विशेषज्ञों से मिले सबूत शामिल हैं।

सौम्या की मां सुमति ने पलक्कड़ जिले में शोरनूर स्थित आवास पर संवाददाताओं से कहा, ‘मेरी बेटी को इतनी बेदर्दी से मारा गया। यह दिल तोड़ने वाला फैसला है।’ उन्होंने फैसले को राज्य अभियोजक की ‘नाकामी’ बताया जो सुप्रीम कोर्ट में मामला ‘सही से’ पेश नहीं कर पाए और कहा कि वह अपनी बेटी को न्याय दिलाने की अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। सौम्या अपने परिवार के लिए आजीविका अर्जित करने वाली एकमात्र सदस्य थी।

सुमति ने रोते हुए कहा, ‘मैं समीक्षा याचिका दायर करूंगी। मैं न्याय मिलने तक लड़ाई जारी रखूंगी। मैं मुख्यमंत्री से मिलूंगी और अपना दुख बयां करूंगी।’ कानून मंत्री ए के बालन ने कहा कि केरल में आम लोगों की धारणा है कि ‘गोविंदाचामी को 100 बार भी फांसी पर लटकाया जाए’ तो भी यह उसके बर्बर अपराध के लिए कम होगा। माकपा नेता वी एस अच्युतानंदन ने कहा कि फैसला ‘स्तब्ध करने वाला’ और ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है।

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