केरल की तिरुवनंतपुरम सिटी साइबर क्राइम पुलिस की एक टीम ने राजनीतिक विचारक टीजी मोहनदास को कोच्चि के मट्टनचेरी स्थित उनके घर से हिरासत में ले लिया है।

टीजी मोहनदास पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें आरएसएस का नेता कहा गया, जिस पर आरएसएस की ओर से बयान जारी किया गया है।

आरएसएस के दक्षिण केरलम सह प्रांत कार्यवाह के बी श्रीकुमार ने कहा, “टी जी मोहनदास की ओर से हाल ही के आंदोलन (प्रदर्शन) पर दिया गया वक्तव्य उनके निजी विचार हैं। वो संघ में किसी भी स्तर पर कोई दायित्ववान कार्यकर्ता नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उनके इन विचारों से न केवल असहमत हैं बल्कि मानता है की ऐसे विचारों की हर प्रकार से भर्त्सना की जानी चाहिए।”

पुलिस ने हिरासत में लिया

केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने टी.जी. मोहनदास के उन कथित आपत्तिजनक बयानों की पुलिस जांच के आदेश दिए थे। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पुलिस ने रविवार को टीजी मोहनदास को उनके आवास से हिरासत में ले लिया है।

क्यों शुरू हुआ यह विवाद?

यह विवाद मोहनदास के यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए वीडियो से जुड़े हुए हैं। 26 जुलाई को अपलोड किए गए एक वीडियो में उन्होंने बताया कि अगर हालात को संभालने की जिम्मेदारी उनके पास होती, तो वे प्रदर्शनकारियों से कैसे निपटते।

क्या कहा था टीजी मोहनदास ने?

TG मोहनदास ने कहा था कि वह जंतर-मंतर के आस-पास चार वर्ग किलोमीटर के इलाके में कर्फ्यू लगाएंगे और प्रदर्शनकारियों से तीन बार वहां से हटने के लिए कहेंगे। फिर उन्होंने कहा, “उसके बाद मैं गोली चलाऊंगा। लोग इधर-उधर भागेंगे। कुछ की मौत हो सकती है। कुछ बच भी सकते हैं। कुछ गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि चार घंटे के भीतर स्थिति को काबू में कर लिया जाएगा और शवों को अस्पताल ले जाया जाएगा।

महिलाओं पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

एक अन्य वीडियो में, मोहनदास ने प्रदर्शनों में शामिल महिलाओं के बारे में एक अलग विवादास्पद टिप्पणी की। वीडियो में मोहनदास को यह कहते हुए सुना गया, “पुलिस को उस इलाके से हटा लेना चाहिए और इसे प्रदर्शनकारियों के भरोसे छोड़ देना चाहिए। रेप और हत्याएं होंगी। रेप की शिकायतें नहीं होंगी, क्योंकि उन्हें रेप पसंद है।”

हुई थी जमकर आलोचना

इसके बाद इन टिप्पणियों ने राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने जमकर आलोचना की। साथ ही ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) ने मोहनदास के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक शिकायत दर्ज की, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनकी इन टिप्पणियों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दिया।

आगे कहा, “पुलिस ने जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, उनमें तीन साल से कम की सजा का प्रावधान है, और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तीन साल से कम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी की जरूरत नहीं होती। यह सिर्फ सत्ताधारी पार्टी को खुश करने के लिए किया जा रहा एक राजनीतिक ड्रामा है।”

इस रिपोर्ट के पूर्व संस्करण में टी.जी. मोहनदास को त्रुटिवश आरएसएस नेता बताया गया था। इसके लिए हम गहरा खेद व्यक्त करते हैं।

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आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत की यह टिप्पणी कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत में देरी करके गलती की है, संघ परिवार के हलकों में परीक्षा पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन पर एक टिप्पणी से कहीं अधिक के रूप में देखी जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें