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चंडीगढ़ है देश का सबसे सुशासित केंद्र शासित प्रदेश

सुशासन के मामले में बड़े राज्यों की श्रेणी में शीर्ष चार स्थानों पर दक्षिणी राज्य केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, और कर्नाटक काबिज हैं। इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश, ओड़ीशा और बिहार आखिरी पायदान पर हैं छोटे राज्यों में गोवा सबसे सुशासित, मणिपुर सबसे ज्यादा कुशासित। इसके बाद दिल्ली और उत्तराखंड का नंबर

Author बंगलुरु, | October 31, 2020 7:01 AM
केरल बड़े राज्‍यों में देश के सबसे सुशासित राज्‍य।

गैर लाभकारी संगठन पब्लिक अफेयर सेंटर (पीएसी) की ओर से शुक्रवार को यहां जारी पब्लिक अफेयर इंडेक्स (पीएआइ)-2020 के मुताबिक 1.05 पीएआइ के साथ चंड़ीगढ़ देश का सबसे सुशासित केंद्र शासित प्रदेश है। बड़े राज्यों की श्रेणी में केरल देश का सबसे सुशासित राज्य है जबकि उत्तर प्रदेश सबसे निचले पायदान पर है।

बंगलुरु से संचालित गैर लाभकारी संगठन ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इस संगठन के अध्यक्ष भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन हैं। पीएसी ने कहा कि राज्यों की रैंकिंग स्थायी विकास के संदर्भ में एकीकृत सूचकांक पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक शासन के संदर्भ में बड़े राज्यों की श्रेणी में शीर्ष चार रैंकों पर दक्षिणी राज्य- केरल (1.388 पीएआइ सूचकांक अंक), तमिलनाडु (0.912), आंध्र प्रदेश (0.531) और कर्नाटक (0.468) काबिज हैं।

संगठन के मुताबिक इस श्रेणी में उत्तर प्रदेश, ओड़ीशा और बिहार आखिरी पायदान पर हैं। इन राज्यों का पीएआइ अंक नकारात्मक है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश को ऋणात्मक 1.461, ओड़ीशा को ऋणात्मक 1.201 और बिहार को ऋणात्मक 1.158 पीएआइ मिला है।
छोटे राज्यों की श्रेणी में गोवा को 1.745 पीएआई के साथ शीर्ष रैंकिंग मिली है। इसके बाद मेघालय (0.797), और हिमाचल प्रदेश (0.725) का स्थान है। इस श्रेणी में सबसे खराब प्रदर्शन मणिपुर (ऋणात्मक 0.363), दिल्ली (ऋणात्मक 0.289) और उत्तराखंड (ऋणात्मक 0.277) का है।

सबसे सुशासित केंद्र शासित राज्यों की सूची में चंडीगढ़ के बाद पुडुचेरी (0.52), लक्षद्वीप (0.003), दादरा और नगर हवेली (ऋणात्मक 0.69) का स्थान है। पीएसी के मुताबिक सुशासन का आकलन स्थायी विकास के संदर्भ में तीन आधारों समानता, विकास और निरंतरता के आधार पर किया गया। इस मौके पर कस्तूरीरंगन ने कहा, ‘पीएआइ- 2020 से जो साक्ष्य और अंतरदृष्टि मिलती है वह हमें भारत में चल रहे आर्थिक और सामाजिक बदलावों पर विचार करने के लिए विवश करती है।’

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