Kerala News: केरल के कोझिकोड़ के पास फेरोक के निवासी मचिलाकथु परिवार के लिए बकरीद एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई, क्योंकि उनका बेटा अब्दुल रहीम दो दशक सऊदी अरब की जेल में सजा काटने और फांसी की सजा से बचने के बाद केरल वापस आ गया। इस मौके पर उससे मिलने के लिए बड़ी संख्या में लोग उसके घर गए, जिस पर अब्दुल ने भी लोगों का शुक्र जताया।
अब्दुल रहीम सऊदी अरब में ड्राइवर की नौकरी करते थे। उनकी देखरेख में बच्चे की मौत हो गई थी। इसके चलते ही वे पिछले 20 साल की सजा हुई थी। गुरुवार सुबह वे सऊदी अरब से एग्जिट वीजा पर केरल पहुंच गए। कोझिकोड हवाई अड्डे से बाहर निकलते ही उनके पैतृक घर के पास सैकड़ों लोग उनका स्वागत करने के लिए इंतजार कर रहे थे।
अब्दुल रहीम के लिए लोगों में सहानुभूति
अब्दुल रहीम की याद कई बुजुर्गों के लिए धुंधली सी हो गई थी। उनके साथ सऊदी अरब में जो कुछ हुआ था, उसके चलते केरलवासियों के मन में उनके प्रति सहानुभूति का भाव रहा था। इसके चलते ही केरल में लोगों ने एक असाधारण क्राउडफंडिंग अभियान शुरू किया, जो कि सऊदी अरब में अब्दुल की रिहाई सुनिश्चित करने में अहम रहा। दशकों बाद घर लौटे अब्दुल रहीम ने अपने सभी शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, “मैं दुनिया भर में बसे सभी केरलवासियों का शुक्रिया अदा करता हूँ जिन्होंने मेरी रिहाई को संभव बनाया।”
लकवाग्रस्त बच्चे की मौत का मामला
सऊदी अरब जाने के पहले अब्दुल रहीम केरल में ऑटो रिक्शा और स्कूल बस चलाता था। वे अपने छह भाई-बहनों में सबसे छोटे है। सऊदी अरब में ड्राइवर की नौकरी मिलने के बाद 28 नवंबर, 2006 को रियाद की यात्रा की। सऊदी अरब में रहीम को अपने मालिक के 17 वर्षीय बेटे की सहायता करने का भी जिम्मा सौंपा गया था, जो लकवाग्रस्त था और सांस लेने के लिए यंत्र पर निर्भर था। 24 दिसंबर 2006 को जब रहीम किशोर को पीछे बैठाकर गाड़ी चला रहा था, तब कथित तौर पर सांस लेने में सहायता करने वाला यंत्र अलग हो गया, जिससे लड़के की मृत्यु हो गई।
34 करोड़ रुपये का मुआवजा
अब्दुल रहीम उस समय 26 साल के थे। सऊदी अरब पहुंचने के महज 28 दिन बाद गिरफ्तार कर लिया गया और अंततः 2011 में एक सऊदी अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। उच्च न्यायालयों ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके चलते केरल में उनका परिवार कई वर्षों तक फांसी की आशंका के साये में जीता रहा। अप्रैल 2024 में पीड़ित के परिवार ने 34 करोड़ रुपये के ब्लड मनी वाली मुआवजे के बदले उन्हें माफ करने पर सहमति जताई।
रहीम के परिवार के लिए अकेले इतनी बड़ी रकम जुटाना नामुमकिन था। इसके चलते दुनिया भर के मलयाली लोगों के समर्थन से एक बड़े पैमाने पर क्राउडफंडिंग कैंपेन चला और यह रकम इकट्ठा की गई। आम कामगारों, प्रवासी भारतीयों, सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक हस्तियों ने इसमें बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
जेल जाने के बाद हुई थी पिता की मौत
पीड़ित परिवार द्वारा मुआवज़ा स्वीकार कर लेने के बाद मृत्युदंड को रद्द कर दिया गया। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने रहीम को 20 साल की जेल की सजा काटने का आदेश दिया, जो कि इस साल 20 मई को समाप्त हुई। कोझिकोड में रहीम के परिवार के लिए यह एक कठिन समय रहा है। उनके पिता मुहम्मदकुट्टी की जेल जाने के छह महीने बाद मृत्यु हो गई, जबकि उनकी मां फातिमा नवंबर 2024 को माफी मिलने के बाद एक बार ही मिल पाई। कभी-कभार वीडियो कॉल ही उनके लिए एकमात्र राहत थी।
पूर्व सीएम विजयन के घर पर छापे से भड़के सीपीएम कार्यकर्ता, ईडी अधिकारियों की टीम पर किया पथराव
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर ईडी के अधिकारियों के वाहनों पर हमला किया। सीपीआईएम के कार्यकर्ताओं ने ईंट और पत्थर से अधिकारियों की कार के शीशे तोड़ दिए। पढ़िए पूरी खबर…
