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केरल: वीएस अच्‍युतानंदन ने जि‍स नेता को भ्रष्‍टाचार के आरोप में जेल करवाई थी, लेफ्ट सरकार ने उसे द‍िया कैब‍िनेट मंत्री का दर्जा

केरल कांग्रेस (बी) के नेता आर बालाकृष्णन पिल्लई को सीपीएम नेता वीएस अच्युतानंदन ने अपने मुख्यमंत्रीकाल में सुप्रीम कोर्ट में जाकर सजा दिलवायी थी।
केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन। राज्य में सीपीएम के नेतृत्व वाली लेफ्ट फ्रंट सरकार है।

राजनीति की माया निराली है। राजनेता और राजनीतिक दल कब अपने ही कहे से पलट जाएं यह कहना मुश्किल है। ताजा मामला केरल का है। राज्य की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार ने केरल कांग्रेस (बी) के नेता आर बालाकृष्णन पिल्लई को केरल स्टेट वेलफेयर कॉर्पोरेशन फॉर फॉरवर्ड कम्युनिटीज (केएसडब्ल्यूसीएफसी) का चेयरमैन बनाते हुए कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया है। आप सोच रहे होंगे कि इसमें बड़ी बात क्या है? किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले थोड़ा ठहर जाइए। ये वही बालाकृष्णन हैं जिन्हें साल 2011 में सीपीएम नेता वीएस अच्युतानंदन के नेतृत्ववाली लेफ्ट फ्रंट सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाकर भ्रष्टाचार के लिए एक साल की जेल करवाई थी।

आप सोच रहे होंगे ये चमत्कार कैसे हुआ? आखिर जिस नेता को वामपंथी नेताओं ने पानी पी-पी कर भ्रष्टाचारी बताया हो उसे ही इतना महत्वपूर्ण पद कैसे मिल गया? वामपंथी सरकार के इस हृदय परिवर्तन की एक मात्र वजह यह है कि 82 वर्षीय बालाकृष्णन 2016 में केरल विधान सभा चुनाव से ठीक पहले 2015 में पाला बदलते हुए कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) का दामन छोड़कर एलडीएफ का आंचल पकड़ लिया था। बालाकृष्णन की केरल कांग्रेस (बी) एलडीएफ सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है। तो फिर क्या? कौन सी राजनीतिक पार्टी है जिसे अपने सहयोगियों के “दाग” अच्छे नहीं लगते?

केरल कांग्रेस के रूप में अलग पार्टी बनाने से पहले बालाकृष्णन कांग्रेसी थे। 1970 के दशक में उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर केरल कांग्रेस बना ली। कुछ साल बाद केरल कांग्रेस भी दो फाड़ हो गयी और बालाकृष्णन ने केरल कांग्रेस (बी) धड़े की कमान संभाल ली। बाद में उन्होंने राज्य में गठबंधन की राजनीति के महत्व को समझा और यूडीएफ के संस्थापकों में रहे। राज्य की कांग्रेस नीत सरकार में वो मंत्री भी रह चुके हैं।

मंत्री रहने के दौरान बालाकृष्णन पर एक पनबिजली परियोजना का ठेका देने में पद के दुरुपयोग का आरोप लगा। केरल हाई कोर्ट से बालाकृष्णन और उनके दो साथी बाइज्जत बरी हो गये। लेकिन तत्कालीन सीएम अच्युतानंदन हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए और आखिरकार बालाकृष्णन को सर्वोच्च अदालत ने पद के दुरुपयोग का दोषी मानते हुए एक साल की सजा सुनाई।  बहरहाल, आपको बता दें कि बालाकृष्णन यूडीएफ सरकार में भी इसी कॉर्पोरेशन के चेयरमैन रह चुके हैं।

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