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केरलः HC में सुनवाई के दौरान बाथरूम में शेविंग करते हुए दिखा शख्स, पहले भी आ चुके हैं ऐसे कई मामले

वर्चुअल सुनवाई के दौरान इस तरह के कई मामले देखे जा चुके हैं। पिछले साल 21 दिसंबर को मद्रास उच्च न्यायालय ने आरडी संथाना कृष्णन नाम के एक वकील को वर्चुअल कार्यवाही के दौरान एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर(फोटो सोर्स: PTI)।

कोरोना महामारी के चलते अदालतों में सुनवाई भी प्रभावित हुई है और ऑनलाइन सुनवाई का सहारा लिया जा रहा है। इस बीच वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हो रही सुनवाई में कई अजीबो-गरीब मामले देखने को मिल रहे हैं। बता दें कि केरल हाई कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई के दौरान एक शख्स शेविंग करते दिखा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बता दें कि केरल उच्च न्यायालय में मंगलवार को जस्टिस वीजी अरुण के समक्ष ऑनलाइन सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति को ब्रश और शेविंग करते हुए देखा गया। वीडियो में दिख रहा है कि व्यक्ति उठते ही वॉश-बेसिन की तरफ जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस घटना पर जस्टिस अरुण का ध्यान नहीं दिया। लेकिन इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

इससे पहले भी आए कई मामले: गौरतलब है कि इस तरह के कई मामले बीते दिनों में देखे जा चुके हैं। पिछले साल 21 दिसंबर को मद्रास उच्च न्यायालय ने आरडी संथाना कृष्णन नाम के एक वकील को वर्चुअल कार्यवाही के दौरान एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया था। जिसके बाद उन्हें देश के सभी अदालत, ट्रिब्यूनल्स और अथॉरिटीज में प्रैक्टिस करने से रोक दिया गया है।

पिछले साल वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने भी कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष वर्चुअल सुनवाई के दौरान कथित तौर पर अर्ध-नग्न दिखाई देने वाले व्यक्ति के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​और यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अदालती सुनवाई में मोबाइल से हिस्सा लेने से आने वाली रुकावटों को लेकर वकीलों पर नाराजगी जाहिर की। चीफ जस्टिस (CJI) एन वी रमन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने कहा कि हमें मोबाइल के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना पड़ेगा। बता दें कि इस तरह की सुनवाई को लेकर चीफ जस्टिस एन वी रमन्ना, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ नाखुश दिखी।

दरअसल सोमवार को कई वकीलों द्वारा मोबाइल के जरिए डिजिटल सुनवाई में भाग लेने के चलते कई बार रुकावट की समस्या आई। ऐसे में नाराजगी जताते हुए पीठ ने कहा कि हमें मोबाइल के माध्यम से सुनवाई में शामिल होने पर प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है।

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