लगभग तीस सालों तक एक ठग सैम पीटर, राहुल पीटर, डैनी थरक्कन, राजेश रॉबिन्सन, एंथनी फ्रांसिस के नाम से जाना जाता था। पुलिस का कहना है कि उसने सालों में और भी कई नाम इस्तेमाल किए होंगे लेकिन हम अब तक सिर्फ़ इन पांच के बारे में ही जानते हैं। उसने अपनी लोकेशन बदली और कभी-कभी वह एजेंसी भी बदल दी जिसका वह प्रतिनिधित्व करने का दावा करता था। कभी वह नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) का अधिकारी होता था, तो कभी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का आदमी। वह अपनी पहचान से मेल खाने के लिए नकली पासपोर्ट, आधार और पैन कार्ड रखता था।
पुलिस के लिए उसके नाम का एक ही मतलब था और वह था धोखा देने में निपुण एक ठग। यह नाम बॉलीवुड फिल्म स्पेशल 26 से काफी मिलता-जुलता था, जिसमें एक गैंग अमीर लोगों को निशाना बनाने के लिए बड़ी चालाकी से CBI अधिकारियों की नकल करता है। 1 सितंबर को इस 64 वर्षीय मोस्ट वांटेड ठग सैम एंटनी उर्फ सैम पीटर को मंगलुरु सिटी पुलिस ने केरल के कन्नूर से गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी 2019 के एक मामले में की गई है।
मंगलुरु पुलिस ने की गिरफ्तारी
पुलिस को अब भी यह बात हैरान करती है कि वह कितनी आसानी से खुद को कोई और बता देता था। मंगलुरु ईस्ट के पुलिस इंस्पेक्टर अनंथा पद्मनाभ, जिन्होंने उसकी गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की, उन्होंने बताया, “वह अंग्रेजी अच्छी बोलता है और कानून पर उसका अधिकार कमाल का है। अगर किसी को उसकी हिस्ट्री के बारे में पता नहीं है और वह उससे 10 मिनट बात करता है, तो वह उन्हें यकीन दिला सकता है कि वह कोई बड़ा बिजनेसमैन या किसी केंद्रीय एजेंसी का ऑफिसर है।”
एक पुलिस ऑफिसर उसके बारे में बताते हैं, “अच्छी बॉडी, अच्छे कपड़े, शर्ट अंदर, जूते पॉलिश किए हुए, एक ब्यूरोक्रेट की बॉडी लैंग्वेज के साथ वह रहता है। अंग्रेजी भाषा पर उसकी पकड़ के साथ वह आंख बंद करके इज्ज़त कमा सकता था।”
असल में पुलिस अधिकारियों ने बाद में उसका साफ ब्यौरा दिया और उसकी तस्वीरें भी जारी कीं। उसके लेटेस्ट मग शॉट में, उसकी बड़ी-बड़ी आंखें सूजी हुई दिख रही हैं। उसकी नाक चौड़ी है और मूंछें हैं। उसके सिर पर बहुत सारे बाल हैं, हालांकि आगे से वे पतले हो रहे हैं। वह पुलिस को बताता है कि वह अपने बालों को कलर नहीं करता है। लेकिन बाल ढलती उम्र के हिसाब से बहुत काले हैं। आरोपी 5 फुट 8 इंच लंबा हैं और उनका शरीर मजबूत और मस्कुलर है। उसका शब्द नपा-तुला होते है और उसका लहजा अधिकारपूर्ण होता है। कोल्लम से MBA ग्रेजुएट एंटनी शादीशुदा हैं और दो बच्चे हैं। हालांकि, खबर है कि उनकी पत्नी और बच्चे उनके साथ नहीं रहते हैं।
क्या था ठगी का तरीका?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एंटनी का ‘तरीका’ आसान था। वह बैंक धोखाधड़ी, टैक्स विवादों और केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े वित्तीय विवादों में फंसे अमीर व्यापारियों से संपर्क करता और ‘फीस’ के बदले में उनकी कानूनी परेशानियों को खत्म करने की पेशकश करता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर एंटनी खुद को नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (NCIB) का सीनियर अधिकारी बताता था। NCIB एक स्वतंत्र गैर-सरकारी संस्था है जो अपराधों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने का काम करती है। लेकिन एंटनी अपने पीड़ितों के सामने इसे देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक के तौर पर पेश करता।
कई लोग इस झांसे में आ गए। एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि कुछ ने तो शिकायत भी नहीं की। जहां भी केंद्रीय जांच एजेंसियों से जुड़ा कोई विवाद होता था, एंटनी हाजिर होता था। जांचकर्ताओं को जो सवाल हैरान कर रहा है वह यह है कि उसे कैसे पता था कि कहां पेश होना है। अधिकारी का कहना है, “क्या उसे मीडिया से जानकारी मिली या उसने केंद्रीय एजेंसियों में अंदर के लोगों को तैयार किया? हमें अभी तक उसकी जानकारी के सोर्स का पता लगाना है।”
पुलिस अधिकारी का कहना है कि एक बार जब उसे कोई टारगेट मिल जाता था, तो एंटनी अपने काम को असली दिखाने के लिए जरूरी चीज़ें जुटा लेता था। इसमें छेड़छाड़ किए गए टेक्स्ट, नकली छापे के वीडियो और NCIB और दूसरी एजेंसियों के नकली लेटरहेड शामिल है।
पुलिस अधिकारी एक व्यापारी अब्दुल शरीफ के मामले का हवाला देते हैं कि वह कैसे काम करता था। एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि 2018 में, शरीफ के भाई शियाबुद्दीन से डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) पूछताछ कर रहा था, जब कस्टम डिपार्टमेंट ने एयरपोर्ट पर सोने की एक खेप ज़ब्त की थी। एंटनी को किसी तरह इस बारे में पता चल गया। ऑफिसर का कहना है, ”उसने पांच लोगों की एक टीम बनाई और शरीफ के पास जाकर दावा किया कि वह NCIB का सीनियर ऑफिसर है, और एक डील का प्रस्ताव रखा। वह रिश्वत के बदले उसके भाई के खिलाफ केस बंद करवा देगा।” ऑफिसर का कहना है कि अगले 10 महीनों में एंथनी ने कथित तौर पर शरीफ से कई किश्तों में 1.13 करोड़ रुपये वसूले।
जब तक शरीफ को इस धोखाधड़ी का पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इसके बाद शरीफ ने शिकायत दर्ज कराई और 27 अगस्त 2019 को कर्नाटक के कोनाजे पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। पुलिस अधिकारी याद करते हैं कि 2019 में बेंगलुरु के येलहंका न्यू टाउन पुलिस स्टेशन में एंटनी के खिलाफ दर्ज एक और मामले में उसने NCIB अधिकारी बनकर एक ऑफिस खोला, उसे सात महीने तक चलाया और किराया दिए बिना भाग गया। पुलिस अधिकारी का कहना है कि एंटनी कोई खास गैंग नहीं चलाता था। पुलिस ने बताया, “‘लेकिन उसका एक परमानेंट पार्टनर था, जो बेंगलुरु में एक वकील था।”
कैसे पुलिस को मिले सुराग?
जब पुलिस ने एंटनी के रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए, तो उन्हें पता चला कि यह 1997 तक फैला हुआ था। एक और पुलिस ऑफिसर ने बताया, ”पहला मामला छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ पुलिस स्टेशन में दर्ज एक धोखाधड़ी का था।” एक साल बाद 1998 में कर्नाटक में एंटनी का पहला मामला कुशालनगर टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ। लेकिन पुलिस का मानना है कि यह मामला राज्य में उसकी गतिविधियों की शुरुआत नहीं हो सकता है। अधिकारी कहते हैं, ”ऐसे और भी मामले हो सकते हैं जो कभी रिकॉर्ड में नहीं आए।”
पुलिस ने उसे आखिरी बार 2019 में पकड़ा था। उस साल 16 अगस्त को, पुलिस अधिकारी मारुति एसवी को जानकारी मिली कि NCIB का एक सीनियर ऑफिसर मंगलुरु के साई आर्य लॉज में ठहरा हुआ है। मारुति एस वी याद करते हैं कि इस सीनियर NCIB अधिकारी ने दावा किया था कि वह एक जरूरी जांच के लिए वहां है। सेंट्रल एजेंसियां आमतौर पर लोकल पुलिस को अलर्ट करती हैं। इसलिए, मारुति को शक था कि कुछ गड़बड़ है। जब वह मौके पर गए तो उन्हें एंटनी मिला, जो उस समय सैम पीटर बनकर अपने साथियों के साथ था। उसके पास रिवॉल्वर थीं। हालांकि एंटनी ने NCIB ऑफिसर वाली ठगी करने की कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हुआ। पुलिस ने खुद कार्रवाई करते हुए लॉज पर छापा मारा और एंटनी और उसके 7 साथियों (मदन, बोपन्ना, चिन्नप्पा, सुनील राजू, कोडंडाराम, अब्दुल लतीफ, मोहिद्दीन चेरियन) को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को हथियार (एक रिवॉल्वर और पिस्टल), नकली ID कार्ड, कैश, गाड़ियां (जिसमें एक महिंद्रा ज़ाइलो और एक जीप शामिल है), मोबाइल फोन और 15.7 लाख रुपये से ज़्यादा की प्रॉपर्टी के डॉक्यूमेंट्स मिले। एंटनी पर नकली पहचान बताने, क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी, आर्म्स एक्ट के चार्ज और स्टेट एम्बलम के गलत इस्तेमाल के लिए केस दर्ज किया गया।
पुलिस को आखिरकार एहसास हुआ कि उन्होंने एक ऐसे आदमी को पकड़ लिया है जो कई राज्यों में वॉन्टेड था। उसके खिलाफ 2007 में इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। एक पुलिस अधिकारी हंसते हुए कहता है, “केस पर काम करने वाले कुछ स्टाफ तब पैदा भी नहीं हुए थे जब एंटनी ने क्राइम करना शुरू किया था।” सालों से आरोपी एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर और रास्ते में पहचान बदलकर पुलिस से आगे रहने में कामयाब रहा था।
एक पुलिस अधिकारी का कहना है, “आमतौर पर, वह एक जगह पर कई क्राइम करता था और बाद में दूसरी जगह, दूसरे राज्य में फिर से क्राइम शुरू करने के लिए गायब हो जाता था। उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ में क्राइम करने के बाद वह कर्नाटक आया, बाद में, वह बिहार गया, फिर चेन्नई, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश गया।”
अधिकारी का कहना है कि एंटनी सुरक्षित जगह उत्तर-पूर्वी राज्य थे, जहां उसके बहुत सारे कॉन्टैक्ट थे। उसने यह भी ध्यान रखा कि कोई साफ डिजिटल या फ़ाइनेंशियल निशान न छोड़े। उसने कभी अपने नाम पर मोबाइल SIM कार्ड रजिस्टर नहीं कराया। हालांकि उसके कई बैंक अकाउंट थे। पुलिस का कहना है कि उसके नाम के अकाउंट से कोई पैसे का लेन-देन नहीं हुआ। एक पुलिस अधिकारी का कहना है, “जांच के दौरान, हमें यह भी पता चला कि लखनऊ में उसकी एक गर्लफ्रेंड है, जिसने उसे अक्सर पैसे ट्रांसफर किए हैं।” उससे अभी पूछताछ होनी है।
गायब हुआ और फिर हो गई गिरफ़्तारी
पुलिस ने कहा कि 2023 में एंटनी को ज़मानत मिल गई। वह बिना समय बर्बाद किए तुरंत गायब हो जाता है। अगले तीन साल तक पुलिस उसे ढूंढने की कोशिश करती रही, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। आखिरकार उसका सुराग नहीं मिला। तीन महीने पहले मंगलुरु सिटी पुलिस लंबे समय से पेंडिंग केस देख रही थी, उसे एंटनी की फाइल मिली। इस बार उसे गिरफ्तार करने का पक्का इरादा करके, पुलिस ने उसे ट्रैक करने के लिए सिटी क्राइम ब्रांच (CCB) के तहत तीन स्पेशल टीमें बनाईं।
एक पुलिस अधिकारी याद करते हुए बताते हैं, ”हमारे पास उसका कॉन्टैक्ट नंबर या उसके ठिकाने के बारे में कोई डिटेल्स नहीं थीं। हमें बस इतना पता था कि वह केरल से है और उसने अपना ज़्यादातर समय चेन्नई में बिताया है।’ ‘इसलिए, हमने उन दोनों राज्यों में उसकी तलाश शुरू कर दी। हमने उन लोगों से कॉन्टैक्ट करना शुरू किया जो पहले उसके साथी थे।” फिर पुलिस को कुछ ऐसा मिला जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी।
चीफ गेस्ट के तौर पर इवेंट्स में शामिल हो रहा था ठग
कहा जाता है कि एंटनी केरल के एक नेता के करीब आ गया था और चीफ गेस्ट के तौर पर इवेंट्स में शामिल हो रहा था। अधिकारी कहते हैं, ”वह हाल ही में केरल में एक मीडिया इवेंट में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुआ था। हमें इस इवेंट की तस्वीरें मिलीं। इस तरह हमने आखिरकार उसे पकड़ लिया।” CCB पुलिस इंस्पेक्टर रफीक KM का कहना है कि जब आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, तब भी उसके पास नकली डॉक्यूमेंट्स थे और वह दूसरे नाम से रह रहा था। उन्होंने कहा, ”गिरफ्तारी के दौरान डेनियल थरकन नाम से वह रह रहे थे, जो NCIB से ‘रिटायर्ड सीनियर ऑफिसर’ था।”
मंगलुरु सिटी पुलिस ने अब एंटनी से जुड़े 17 केस की लिस्ट बनाई है। मंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर सुधीर कुमार रेड्डी सी एच कहते हैं, “हमने देश के सभी पुलिस स्टेशनों को लिखा है ताकि पता लगाया जा सके कि उसके खिलाफ कोई केस पेंडिंग है या नहीं।” मंगलुरु ईस्ट पुलिस ने 2019 के केस में चार्जशीट भी फाइल कर दी है और ट्रायल चल रहा है।
लेकिन एंटनी की गिरफ्तारी के बाद भी, उसकी धोखेबाजी बंद नहीं हुई। जल्द ही कर्नाटक के एक सीनियर पुलिस ऑफिसर को केरल से कॉल आने लगे, जिसमें कहा गया कि वह एक ईमानदार और सीधा ऑफिसर है, जिसे गलत तरीके से उठाया गया है। अधिकारी कहते हैं, “मुझे एक वकील, एक बिजनेसमैन और एक और असरदार आदमी का कॉल आया जो शॉक में थे। उन्होंने कहा कि डेनियल (एंटनी) एक सीधा इंसान है। मुझे उन्हें यकीन दिलाने के लिए उसकी हिस्ट्री शेयर करनी पड़ी।”
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