केरल कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर हलचल तेज हो चुकी है। असल में मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ कैबिनेट में शामिल होने जा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने साफ कर दिया है कि वह अपने पद से इस्तीफा देंगे। इसके बाद केरल कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव होने की संभावना है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, अगले हफ्ते इस मुद्दे पर मंथन शुरू होने वाला है। इस समय राहुल गांधी विदेश दौरे पर हैं। उनके लौटने के बाद नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर चर्चा शुरू की जाएगी।
मुश्किल में कांग्रेस की केरल सरकार
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि इस समय सरकार को नीतिगत फैसलों और नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस के भीतर और विपक्ष, दोनों की ओर से सवालों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस मुश्किल समय में सरकार को दिशा देने के लिए संगठनात्मक नेतृत्व ही मौजूद नहीं है। हैरानी की बात यह है कि सरकार बनने के बाद PCC की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की सिर्फ एक ही बैठक हो पाई है।
इस समय PCC अध्यक्ष की दौड़ में कई नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें कोडिक्कुन्निल सुरेश, एंटो एंटनी, बेनी बेहनन, शफी परंबिल, विधायक मैथ्यू कुजलनादन और पूर्व विधायक जोसेफ वझक्कन शामिल हैं। बड़ी बात यह है कि जोसेफ वझक्कन को गृह मंत्री रमेश चेन्निथला का भी समर्थन हासिल है।
कौन बनेगा नया प्रदेश अध्यक्ष?
वहीं, कोडिक्कुन्निल सुरेश अपनी वरिष्ठता के आधार पर खुद को मजबूत दावेदार मान रहे हैं। वह आठ साल तक कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं और कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ दलित नेताओं में गिने जाते हैं। अब तक केरल कांग्रेस ने किसी दलित नेता को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया है। यही वजह है कि उन्हें भी इस दौड़ में मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
केरल कांग्रेस में दिलचस्प बात यह भी है कि जब मुख्यमंत्री पद का चयन होना था, तब नायर नेताओं के बीच मुकाबला था। वहीं अब प्रदेश अध्यक्ष के पद के लिए ईसाई नेताओं के बीच ज्यादा प्रतिस्पर्धा मानी जा रही है। सनी जोसेफ की बात करें तो उन्हें मई 2025 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था। उस समय पार्टी ने ईसाई समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह फैसला लिया था।
वैसे, केरल कांग्रेस का अगला प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा, इसमें के. सी. वेणुगोपाल की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक सूत्र ने कहा, “मुख्यमंत्री सतीशन ऐसे PCC अध्यक्ष चाहते हैं, जो सरकार के साथ तालमेल बनाकर काम कर सके।”
कांग्रेस के पुराने अनुभव
कांग्रेस के लिए बेहतर तालमेल इसलिए भी जरूरी माना जा रहा है क्योंकि 2011 से 2016 के बीच, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ऊमन चांडी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रमेश चेन्निथला के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे थे। रमेश चेन्निथला ने कई मौकों पर ऊमन चांडी पर पार्टी से सलाह-मशविरा किए बिना बड़े फैसले लेने का आरोप लगाया था। इसी वजह से मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन इस बार नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन में ज्यादा सतर्कता बरत रहे हैं, ताकि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।
इस समय मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की मुश्किलें भी बढ़ती नजर आ रही हैं। कांग्रेस के कई नेता खुलकर उनकी कार्यशैली की आलोचना कर रहे हैं। राज्य में शराब कर को लेकर भी कुछ कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पार्टी से सलाह-मशविरा किए बिना ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं।
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