हाल ही में 24 फरवरी को तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने खम्मम जिले की विनोबा नवोदय कॉलोनी में 31 एकड़ जमीन पर बने 170 से ज्यादा घरों को ध्वस्त कर दिया। इस काम के लिए करीब 4,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए। कई परिवारों ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने कार्रवाई जारी रखी। इस पर विपक्षी दलों भारत राष्ट्र समिति (BRS) और बीजेपी ने तीखी आलोचना की।
लेकिन 2 मार्च को इस मामले में एक अनोखा खिलाड़ी भी सामने आया। केरल के मुख्यमंत्री और सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता पिनारयी विजयन ने ट्विटर (X) पर कांग्रेस सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में यह “बुलडोजर राज” बीजेपी की शैली की नकल है और कांग्रेस ने गरीब लोगों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की।
विजयन के करीबियों का कहना है कि उन्होंने गरीबों की स्थिति को देखकर यह प्रतिक्रिया दी। केरल विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और विजयन तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने की राह देख रहे हैं, इसलिए यह मामला सीपीआई(एम) को कांग्रेस पर हमला करने का मौका भी दे रहा है।
मकान क्यों तोड़े गए?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक खम्मम जिले के वेलुगुमतला इलाके में 31 एकड़ जमीन पर लगभग 170 कच्चे घर बन गए थे। यह जमीन मूल रूप से 1951 में भूदान आंदोलन के तहत आवंटित की गई थी। जमीन पर कब्जा करने वाले लोगों को आधिकारिक तौर पर जमीन नहीं दी गई थी, लेकिन आरोप है कि वे इसे कब्जा किए हुए थे।
राजस्व मंत्री पी. श्रीनिवास रेड्डी के अनुसार लगभग 760 परिवार जमीन पर रह रहे थे और आधे से ज्यादा लोग खम्मम जिले के नहीं थे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि जमीन की कीमत लगभग 300 करोड़ रुपये है और पिछले 10 साल से इसे अवैध तरीके से कब्जा किया गया था। 2014 से 2023 तक बीआरएस की सरकार थी।
सरकार ने योजना बनाई है कि प्रभावित परिवारों को राज्य की इंदिरम्मा हाउसिंग योजना के तहत दूसरी कॉलोनी में नए घर और प्लॉट दिए जाएं। मंत्री श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि “योग्य परिवारों को 15 दिन में इंदिरम्मा घर मिल जाएगा और वहां सरकारी स्कूल व आंगनवाड़ी की सुविधा भी होगी।” मौजूदा समय में हटाए गए परिवार खम्मम जिले की कुछ सरकारी सुविधाओं में रह रहे हैं।
बीआरएस और बीजेपी का रुख
बीआरएस (BRS) और बीजेपी (BJP) ने इस कार्रवाई की आलोचना की। बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामाराव (KTR) ने कहा कि जिले के तीन मंत्रियों की रियल एस्टेट लालच की वजह से हजारों लोग बेघर हुए। केटीआर खुद ध्वस्त किए गए इलाके का दौरा कर वहां मौजूद लोगों से मिला।
बीजेपी के राज्य अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि करीब 600 परिवारों के 1,800 लोग इस कार्रवाई से बेघर हुए। उनका आरोप है कि तेलंगाना हाईकोर्ट ने कई आदेश दिए थे कि विवादित जमीन पर स्थिति को यथावत रखा जाए, बावजूद इसके सरकार ने ध्वस्त कर दिया।
सरकार के सूत्रों का कहना है कि हाईकोर्ट ने केवल कुछ संपत्तियों को रोकने का आदेश दिया था, बाकी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों को हटाना सरकार का काम था।
पिनारयी विजयन ने क्या कहा?
केरल के सीएम पिनारयी विजयन ने एक्स पर लिखा, “खम्मम में 700 भूदान आवंटित घरों को ध्वस्त कर 3,000 लोग बेघर हुए। यह तेलंगाना की कांग्रेस सरकार का असली चेहरा दिखाता है। यह ‘बुलडोजर राज’ सीधे बीजेपी के मॉडल जैसा है।”
उन्होंने केरल में कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा, “जो लोग गरीबों के साथ खड़े होने का दावा करते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि उनके दल ने तेलंगाना में गरीबों के साथ जो किया, उसके लिए जिम्मेदारी लें।”
तेलंगाना कांग्रेस ने विजयन के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कई मंत्रियों ने कहा कि सीएम गलत जानकारी पर बोल रहे हैं और केरल की कांग्रेस का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। एक नेता ने कहा, “विजयन का खम्मम में अचानक रुचि दिखाना सिर्फ केरल में अपनी सरकार बचाने की कोशिश है।”
सीपीआई (एम) का पक्ष
विजयन के समर्थक कहते हैं कि उनकी प्रतिक्रिया चुनाव से प्रेरित नहीं थी, बल्कि गरीबों की स्थिति पर आधारित थी। सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि यह सिर्फ केरल या चुनाव की लड़ाई नहीं है, बल्कि गरीबों के घरों पर कब्जे के खिलाफ न्याय की लड़ाई है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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