Kerala Elections 2026: केरल में विधानसभा चुनाव के लिए एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होना है। इस चुनाव में बीजेपी विकास और कल्याणकारी राजनीति के मुद्दे पर जनता के बीच एक विकल्प पेश कर रही है। बीजेपी का केरल की राजनीति में उतरना मुसलमान समाज के लोगों का वोटिंग पैटर्न तय कर सकता है।
केरल के मतदाताओं में एक-चौथाई हिस्सा अल्पसंख्यक समुदाय का है, जिसमें एक बड़ा वोट बैंक मुस्लिम समाज का है, जो कि उत्तरी केरल के जिलों यानी मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड, में चुनावी परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। यह समुदाय कांग्रेस के सहयोगी दल ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (IUML) का मुख्य आधार है।
केरल में BJP का बढ़ता प्रभाव
केरल की राजनीति में कांग्रेस का भविष्य मुस्लिम मतदाताओं पर निर्भर है। यदि कांग्रेस लगातार तीसरी बार हारती है, तो अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग में यह डर है कि पार्टी बिखर सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस के सिकुड़ने के चलते राज्य में बीजेपी और ज्यादा मजबूत हो सकती है। इसीलिए बीजेपी इस चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक की दिशा और दशा कैसे तय कर सकती है।
कांग्रेस-CPIM के बीच टकराव
मुस्लिम वोटों को लुभाने के चक्कर में कांग्रेस और CPI(M) एक-दूसरे पर बीजेपी के साथ गुप्त समझौते का आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा CPI(M) पर लगाए गए आरोपों के एक दिन बाद मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने गुरुवार को कांग्रेस पर पलटवार किया है। सीएम पिनाराई विजयन ने राहुल गांधी और उनकी पार्टी को बीजेपी की “बी-टीम” करार दिया। इसको लेकर ही विजयन और प्रदेश कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन के बीच सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस हुई।
‘कांग्रेस हारी तो बिखर जाएगी’
सुन्नी महल फेडरेशन के राज्य संगठित सचिव नसर फैजी कूडाथई ने कहा, “केवल विकास ही समुदाय के लिए निर्णायक कारक नहीं होगा। कई लोगों को डर है कि यदि UDF 10 साल विपक्ष में रहने के बाद सत्ता में नहीं लौट पाता है, तो वह बिखर जाएगा। ऐसी स्थिति में कांग्रेस कमजोर हो जाएगी और राज्य में बीजेपी को पैठ बनाने का मौका मिलेगा।”
बता दें कि यह फेडरेशन ‘समस्त केरल जमियतुल उलेमा’ से जुड़े विभिन्न मस्जिद कमेटियों का एक मंच है, जो आमतौर पर IUML समर्थक माना जाता है। अब तक लोकसभा चुनावों में बीजेपी का मुकाबला करने में दृढ़ता केरल के मुस्लिमों के लिए एक बड़ा मुद्दा रही है।
मुस्लिम समाज करता रहा है कांग्रेस का समर्थन
2014 से 2024 तक के संसदीय चुनावों में मुस्लिम समुदाय ने मुख्य रूप से उत्तर में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF का समर्थन किया था। इसके चलते गठबंधन ने लगभग सभी सीटें जीती थीं। वहीं पिछले दो विधानसभा चुनावों में इसी क्षेत्र में उन्होंने CPI(M) के नेतृत्व वाले ‘लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट’ (LDF) पर भरोसा जताया था।
BJP अब एक ऐसे कारक के रूप में उभरी है, जो अल्पसंख्यक समुदाय की पसंद को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि NDA यह धारणा बनाने में सफल रहा है कि वह कई सीटें जीतने की स्थिति में है। इसकी वजह यह भी है कि पिछले साल के अंत में तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनावों में बीजेपी को जीत मिली थी, और पहली बार केरल मे पार्टी का एक मेयर बना था।
CPM की रणनीति में बदलाव
साल 2000 के बाद जब लेफ्ट की राजनीति में पिनाराई विजयन पूर्व विधायक ई.पी. जयराजन और दिवंगत कोडियेरी बालकृष्णन जैसे नेता उभरे, तो CPI(M) ने अल्पसंख्यक समुदाय और अमीर मुस्लिम प्रवासियों के साथ सीधे संबंध स्थापित किए। IUML का मुकाबला करने के लिए पार्टी ने समुदाय के व्यापारियों और रसूखदारों को भी अपने साथ जोड़ा। ज़मीनी स्तर पर पार्टी ने खुद को समुदाय के हितों के रक्षक और संघ परिवार के खिलाफ एक ढाल के रूप में पेश किया।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद वे अपने कोर हिंदू वोट बैंक को वापस पाने की CPI(M) की कोशिशों ने मुस्लिमों को नाराज किया। इससे यह संदेश गया कि पार्टी अब भाजपा के खिलाफ उतनी आक्रामक नहीं रही। जब प्रमुख एझावा नेता वेल्लापल्ली नटेशन ने बार-बार मुस्लिम विरोधी बयान दिए तो CPI(M) की चुप्पी की आलोचना हुई। नटेशन ने आरोप लगाया था कि यदि UDF सत्ता में आता है तो राज्य में IUML का शासन होगा।
कांग्रेस गुट के समर्थन में जमात-ए-इस्लामी
अहम बात यह है कि जो कि जमात-ए-इस्लामी दशकों से CPIM का समर्थन किया था, उसका झुकाव भी अब UDF की ओर हो गया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस ही एकमात्र विकल्प है। वहीं सुन्नी गुटों के बीच का विवाद भी कम हुआ है। जहां EK गुट IUML के करीब है, वहीं AP गुट पहले CPI(M) समर्थक माना जाता था।
फिर भी समुदाय के सभी लोग यह नहीं मानते कि बीजेपी के डर से वोट एकतरफा ही गिरेंगे। आम मुस्लिमों को LDF सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला है और हालिया स्थानीय चुनावों में UDF को कांतपुरम अबूबकर मुसलियार के नेतृत्व वाले AP गुट का समर्थन भी मिला है।
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केरल में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले सीएम पिनाराई विजयन मीडिया में अपनी इमेज सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। केरल चुनावों की उलटी गिनती के बीच, 80 वर्षीय मुख्यमंत्री ने पिछले तीन दिनों में कम से कम 20 इंटरव्यू दिए हैं। इस दौरान उन्होंने टीवी चैनलों, न्यूज पेपर्स, यूट्यूबर्स और पॉडकास्टर्स सभी को इंटरव्यू दिए। इन साक्षात्कारों में उन्होंने अपनी इमेज के उलट तीखे सवालों का बड़ी शांति से जवाब दिया है। पढ़िए पूरी खबर…
